Development
विकास (Development) एक ऐसी अवधारणा है जिसका अर्थ अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग होता है। एक सामान्य धारणा यह है कि विकास का मतलब केवल आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) है, लेकिन वास्तव में विकास एक बहुआयामी प्रक्रिया है जिसमें आय के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वतंत्रता जैसे पहलू भी शामिल हैं।
अलग-अलग व्यक्तियों की विकास की कल्पना भिन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए, एक लड़की शिक्षा और समान अवसर चाहती है, एक किसान अपनी उपज का उचित मूल्य चाहता है, और एक औद्योगिक मजदूर बेहतर वेतन व कार्य-स्थितियाँ चाहता है। इस प्रकार विकास के लक्ष्य (Development Goals) व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करते हैं।
विकास को केवल आय (Income) से नहीं मापा जा सकता। यद्यपि अधिक आय अधिक सुविधाएँ खरीदने में सहायक होती है, लेकिन लोग केवल पैसे से ही खुश नहीं होते। लोग समानता (Equality), स्वतंत्रता (Freedom), सुरक्षा (Security) और सम्मान (Respect) भी चाहते हैं।
पाठ्यपुस्तक में तीन मित्रों — गुरनाम सिंह, साधना और सपना — का उदाहरण दिया गया है जो अपने-अपने दृष्टिकोण से नौकरी चुनते हैं। गुरनाम सबसे अधिक वेतन वाली नौकरी चाहता है, साधना ऐसी नौकरी जहाँ सीखने के अवसर हों, और सपना ऐसी नौकरी जहाँ उसे सामाजिक सम्मान मिले। यह उदाहरण दर्शाता है कि विकास के लक्ष्य मिश्रित (Mixed Goals) होते हैं।
देशों की तुलना करने के लिए सबसे सामान्य मानदंड आय (Income) है। विश्व बैंक (World Bank) देशों को उनकी प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) के आधार पर वर्गीकृत करता है। 2019 में जिन देशों की प्रति व्यक्ति आय US$ 12,056 प्रति वर्ष या अधिक थी, उन्हें उच्च आय वाले देश (Rich/Developed Countries) कहा गया। भारत निम्न मध्यम आय (Low Middle Income) वाले देशों की श्रेणी में आता है।
हालांकि, UNDP (United Nations Development Programme) आय के अलावा शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) को भी विकास के प्रमुख संकेतक मानता है। इसके लिए मानव विकास सूचकांक (Human Development Index — HDI) का उपयोग किया जाता है जिसमें तीन मानदंड शामिल हैं — प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा (साक्षरता दर तथा नामांकन अनुपात) और स्वास्थ्य (जन्म के समय जीवन प्रत्याशा)।
भारत के विभिन्न राज्यों में विकास का स्तर बहुत भिन्न है। केरल (Kerala) में साक्षरता दर और जीवन प्रत्याशा सबसे अधिक है जबकि बिहार (Bihar) में ये संकेतक अपेक्षाकृत कम हैं। पंजाब और हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय अधिक है लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य संकेतकों में ये केरल से पीछे हैं।
इसी प्रकार अंतर्राष्ट्रीय तुलना में, श्रीलंका भारत से कम प्रति व्यक्ति आय होने के बावजूद कई मानव विकास संकेतकों में बेहतर स्थिति में है। यह दर्शाता है कि केवल आय विकास का सही माप नहीं है — शिक्षा और स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सतत विकास (Sustainable Development) का अर्थ है ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे बिना भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को खतरे में डाले। यह अवधारणा पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल देती है।
भारत में भूजल (Groundwater) का अत्यधिक दोहन एक गंभीर समस्या है। कई राज्यों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इसी प्रकार अनवीकरणीय संसाधन (Non-renewable Resources) जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। यदि इनका उपयोग वर्तमान दर से जारी रहा तो ये कुछ दशकों में समाप्त हो सकते हैं।
विकास की धारणा भिन्न होती है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की परिस्थितियाँ, आवश्यकताएँ और लक्ष्य अलग-अलग होते हैं। उदाहरण:
इस प्रकार, विकास के लक्ष्य परस्पर विरोधी भी हो सकते हैं।
प्रति व्यक्ति आय = कुल राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या। विश्व बैंक इसके आधार पर देशों को विकसित और विकासशील में वर्गीकृत करता है।
यह विकास का अच्छा मापदंड नहीं है क्योंकि:
मानव विकास सूचकांक (Human Development Index — HDI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित एक समग्र सूचकांक है। इसमें तीन कारक शामिल हैं:
HDI का मान 0 से 1 के बीच होता है। यह विश्व बैंक की तुलना में व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है क्योंकि यह केवल आय पर निर्भर नहीं है।
केरल बनाम पंजाब तुलना दर्शाती है कि अधिक आय का अर्थ बेहतर विकास नहीं है:
केरल में शिक्षा और स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय अधिक है, जिससे मानव विकास के संकेतक बेहतर हैं। इससे सिद्ध होता है कि सरकारी नीतियाँ आय से अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
सतत विकास वह विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे बिना भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को खतरे में डाले।
भूजल का उदाहरण:
इसी प्रकार कोयला, पेट्रोलियम जैसे अनवीकरणीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विकास भी सतत विकास का अंग है।
आय के अलावा विकास को मापने के लिए कई अन्य मानदंड भी आवश्यक हैं: शिक्षा (साक्षरता दर, नामांकन अनुपात), स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर), समानता (लैंगिक समानता, आय वितरण), पर्यावरण (स्वच्छ जल, वायु गुणवत्ता) और सुरक्षा (सामाजिक सुरक्षा, रोजगार गारंटी)। इसीलिए UNDP का HDI आय, शिक्षा और स्वास्थ्य तीनों को मिलाकर विकास मापता है।
राष्ट्रीय आय (National Income) किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर प्राप्त होती है। राष्ट्रीय आय देश की कुल आर्थिक शक्ति दर्शाती है जबकि प्रति व्यक्ति आय औसत जीवन स्तर का अनुमान देती है। भारत की राष्ट्रीय आय विश्व में ऊँची है, लेकिन विशाल जनसंख्या के कारण प्रति व्यक्ति आय कम है।
नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources) वे हैं जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनः उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे — सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, वन। अनवीकरणीय संसाधन (Non-renewable Resources) वे हैं जो सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और एक बार उपयोग होने पर समाप्त हो जाते हैं, जैसे — कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस। सतत विकास के लिए अनवीकरणीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और नवीकरणीय संसाधनों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
प्रति व्यक्ति आय विकास का एकमात्र पर्याप्त मापदंड नहीं है, इसके कई कारण हैं:
UNDP का दृष्टिकोण: UNDP विकास को व्यापक रूप से देखता है और मानव विकास सूचकांक (HDI) का उपयोग करता है जिसमें तीन कारक शामिल हैं — (1) जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (स्वास्थ्य), (2) साक्षरता दर और नामांकन अनुपात (शिक्षा), (3) प्रति व्यक्ति आय (जीवन स्तर)। इस प्रकार HDI एक समग्र मूल्यांकन प्रदान करता है जो विश्व बैंक के केवल आय-आधारित दृष्टिकोण से अधिक व्यापक और यथार्थवादी है।