Agriculture
कृषि (Agriculture) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश की लगभग दो-तिहाई (2/3) जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। भारत की GDP में कृषि का योगदान लगभग 15-17% है, लेकिन यह रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश है।
भारतीय कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है — इसीलिए भारतीय कृषि को "मानसून का जुआ" कहा जाता है। देश में विविध जलवायु, मृदा और भू-आकृतियों के कारण विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
भारत में कृषि के विभिन्न प्रकार पाए जाते हैं जो भौगोलिक परिस्थितियों, तकनीकी स्तर और उत्पादन के उद्देश्य पर निर्भर करते हैं:
भारत में तीन प्रमुख शस्य ऋतुएँ (Crop Seasons) हैं जो मानसून चक्र पर आधारित हैं:
भारत में विविध जलवायु के कारण अनेक प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। प्रमुख फसलें और उनकी भौगोलिक स्थितियाँ:
स्वतंत्रता के बाद भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनेक तकनीकी और संस्थागत सुधार किए गए:
खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है सभी लोगों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता। भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं:
भारत में कृषि के प्रमुख प्रकार:
रबी फसलें:
खरीफ फसलें:
हरित क्रांति 1960 के दशक में भारतीय कृषि में आई वह क्रांतिकारी परिवर्तन है जिसमें उच्च उपज किस्म (HYV) बीजों, रासायनिक उर्वरकों और सिंचाई सुविधाओं के उपयोग से खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।
चावल (Rice):
गेहूँ (Wheat):
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण खाद्य सुरक्षा योजना है। इसके तहत:
भारतीय कृषि मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भर है। मानसून समय पर आए तो फसल अच्छी होती है, न आए या कम हो तो सूखा पड़ता है। अत्यधिक वर्षा से बाढ़ आती है। इस अनिश्चितता के कारण भारतीय कृषि को "मानसून का जुआ" कहा जाता है। सिंचाई सुविधाओं के बावजूद अभी भी लगभग 60% कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर है।
जायद फसलें रबी और खरीफ के बीच मार्च से जून की अवधि में उगाई जाती हैं। ये अल्पकालिक फसलें हैं जो मुख्यतः सिंचाई पर निर्भर होती हैं। उदाहरण: तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, मूँग, सब्जियाँ। ये गर्मियों में बाज़ार में उपलब्ध ताज़ी सब्जियों और फलों की आपूर्ति करती हैं।
श्वेत क्रांति (Operation Flood) भारत में डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की एक सफल योजना थी। इसने अमूल मॉडल (सहकारी दुग्ध उत्पादन) को पूरे देश में विस्तारित किया। इसके परिणामस्वरूप भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना। इसने ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि की।
भारत की प्रमुख फसलें और उनकी भौगोलिक स्थितियाँ: