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अध्याय 2 · इतिहास · कक्षा 10

भारत में राष्ट्रवाद

Nationalism in India

🔍 परिचय — Introduction

भारत में राष्ट्रवाद (Nationalism) का विकास औपनिवेशिक शासन (Colonial Rule) के विरुद्ध एक लंबे संघर्ष की प्रक्रिया था। प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के बाद भारतीय राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात हुआ जिसमें महात्मा गांधी ने जन आंदोलनों के माध्यम से स्वतंत्रता संघर्ष को एक नई दिशा दी।

इस अध्याय में हम जानेंगे कि कैसे असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement), सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) और अन्य जन आंदोलनों ने भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट किया और राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की पृष्ठभूमि:

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद आर्थिक कठिनाइयाँ — करों में वृद्धि, महामारी
  • 1919 का रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) — बिना मुकदमे के कैद का अधिकार
  • 13 अप्रैल 1919 — जलियाँवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Massacre)
  • गांधीजी का दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन (1915) और सत्याग्रह का प्रयोग

1. प्रथम विश्व युद्ध, खिलाफत और असहयोग

प्रथम विश्व युद्ध (World War I, 1914-18) ने भारतीय राजनीति में गहरा परिवर्तन लाया। युद्ध के कारण रक्षा व्यय में भारी वृद्धि हुई, करों में बढ़ोतरी की गई और सैनिकों की जबरन भर्ती की गई। 1918-19 में फसल खराब होने और इन्फ्लुएंजा महामारी ने स्थिति और गंभीर बना दी।

रॉलेट एक्ट (1919) के विरोध में गांधीजी ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलवाईं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।

📌 असहयोग-खिलाफत आंदोलन (1920-22) — प्रमुख बातें:

  • खिलाफत का मुद्दा: तुर्की के खलीफा (Caliph) के साथ ब्रिटेन के दुर्व्यवहार का विरोध
  • मुहम्मद अली और शौकत अली ने खिलाफत आंदोलन शुरू किया
  • गांधीजी ने खिलाफत और असहयोग को एक साथ जोड़ा — हिंदू-मुस्लिम एकता
  • सरकारी उपाधियाँ, विदेशी वस्तुओं, सरकारी स्कूलों और न्यायालयों का बहिष्कार (Boycott)
  • दिसम्बर 1920 — कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में असहयोग कार्यक्रम स्वीकृत

2. असहयोग आंदोलन में विभिन्न वर्गों की भागीदारी

असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) में समाज के विभिन्न वर्गों ने अपने-अपने तरीके से भाग लिया, लेकिन प्रत्येक वर्ग ने स्वराज (Swaraj) को अपने अनुसार परिभाषित किया।

विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी:

  • शहरी मध्य वर्ग: विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़े, वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार किया, खादी और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाया
  • किसान (Peasants): अवध में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसान आंदोलन — तालुकदारों और जमींदारों के विरुद्ध
  • आदिवासी (Tribals): आंध्र प्रदेश के गूडेम पहाड़ियों में अल्लूरी सीताराम राजू ने सशस्त्र विद्रोह किया
  • बागान मजदूर (Plantation Workers): असम में चाय बागान मजदूरों ने बागान छोड़ कर घर जाने की कोशिश की — इनलैंड एमिग्रेशन एक्ट का विरोध

फरवरी 1922 में चौरी-चौरा कांड (Chauri Chaura Incident) में भीड़ ने एक पुलिस चौकी में आग लगा दी जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए। गांधीजी ने हिंसा के कारण असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। इसके बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने — चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने 1923 में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) बनाई।

3. सविनय अवज्ञा आंदोलन

1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज (Complete Independence) की माँग की गई। 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसके बाद गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की।

📌 नमक यात्रा / दांडी मार्च (Salt March) — 12 मार्च 1930:

  • गांधीजी ने अपने 78 विश्वसनीय स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी (गुजरात) तक 240 मील की पदयात्रा की
  • 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर नमक कानून तोड़ा
  • यह आंदोलन ब्रिटिश नमक एकाधिकार (Salt Monopoly) के विरुद्ध था
  • देश भर में लोगों ने नमक बनाकर कानून तोड़ा, विदेशी कपड़ों की होली जलाई
  • शराब की दुकानों पर धरना, सरकारी करों का भुगतान बंद किया

सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों ने भाग लिया। समृद्ध किसानों (Patidars) ने राजस्व देने से इनकार किया। गरीब किसानों ने लगान माफी की माँग की। व्यापारी वर्ग ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। महिलाओं ने बड़ी संख्या में नमक बनाने, शराब की दुकानों पर धरना देने और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर पिकेटिंग में भाग लिया।

4. सविनय अवज्ञा की सीमाएँ

सविनय अवज्ञा आंदोलन की कुछ महत्वपूर्ण सीमाएँ थीं। समाज के सभी वर्ग इसमें समान रूप से शामिल नहीं हुए।

आंदोलन की प्रमुख सीमाएँ:

  • दलित समुदाय (Dalits): डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 1930 में दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) की माँग की। उन्होंने कांग्रेस पर सवर्ण हिंदुओं के वर्चस्व का आरोप लगाया
  • 1932 का पूना पैक्ट (Poona Pact): गांधीजी और अम्बेडकर के बीच समझौता — दलितों के लिए आरक्षित सीटें स्वीकार की गईं
  • मुस्लिम समुदाय: बड़ी संख्या में मुसलमान इस आंदोलन से दूर रहे। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेद बढ़ते गए
  • मुहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग की

इस प्रकार भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर विभिन्न तनाव विद्यमान थे जिन्हें पूरी तरह सुलझाया नहीं जा सका।

5. सामूहिक अपनेपन का भाव

राष्ट्रवाद के विकास में सामूहिक अपनेपन का भाव (Sense of Collective Belonging) अत्यंत महत्वपूर्ण था। यह भावना विभिन्न माध्यमों — संस्कृति, इतिहास, प्रतीकों और चिह्नों — के द्वारा विकसित की गई।

📌 सामूहिक अपनेपन के प्रमुख प्रतीक और माध्यम:

  • बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने 1870 में 'वंदे मातरम्' गीत लिखा — भारत माता की स्तुति
  • रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 'आमार सोनार बांग्ला' और अन्य राष्ट्रवादी गीत लिखे
  • भारत माता (Mother India) की छवि — अबनीन्द्रनाथ टैगोर ने प्रसिद्ध चित्र बनाया
  • लोक कथाओं और लोक गीतों के माध्यम से राष्ट्रवाद का प्रसार
  • तिरंगा झंडा (1921 से) राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना
  • इतिहास की पुनर्व्याख्या — भारत के गौरवशाली अतीत को उजागर किया गया

हालांकि, सामूहिक पहचान बनाने की इस प्रक्रिया में कभी-कभी कुछ समुदायों की उपेक्षा भी हुई। विभिन्न समूहों ने राष्ट्र की अलग-अलग कल्पना की, जिससे तनाव भी पैदा हुए। फिर भी, स्वतंत्रता संग्राम ने एक साझी राष्ट्रीय पहचान का निर्माण किया जो आज भी भारतीय लोकतंत्र की नींव है।

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📌 महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • 1915 — गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे
  • 1917 — चंपारण सत्याग्रह (बिहार)
  • 1918 — खेड़ा सत्याग्रह (गुजरात), अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन
  • 1919 — रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल)
  • 1920 — असहयोग-खिलाफत आंदोलन शुरू, कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन
  • फरवरी 1922 — चौरी-चौरा कांड, असहयोग आंदोलन वापस
  • 1923 — स्वराज पार्टी की स्थापना
  • 1928 — साइमन कमीशन का भारत आगमन
  • दिसम्बर 1929 — कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन, पूर्ण स्वराज की माँग
  • 12 मार्च 1930 — दांडी मार्च / नमक यात्रा शुरू
  • 6 अप्रैल 1930 — गांधीजी ने दांडी में नमक कानून तोड़ा
  • 1930 — प्रथम गोलमेज सम्मेलन (First Round Table Conference)
  • 1931 — गांधी-इरविन समझौता (Gandhi-Irwin Pact)
  • 1932 — पूना पैक्ट (Poona Pact)

📌 महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

  • महात्मा गांधी — सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा आंदोलनों के नेता
  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर — दलित अधिकारों के चैम्पियन, पूना पैक्ट
  • जवाहरलाल नेहरू — लाहौर अधिवेशन के अध्यक्ष, पूर्ण स्वराज प्रस्ताव
  • मुहम्मद अली और शौकत अली — खिलाफत आंदोलन के नेता
  • अल्लूरी सीताराम राजू — आंध्र प्रदेश में आदिवासी विद्रोह के नेता
  • बाबा रामचंद्र — अवध में किसान आंदोलन के नेता
  • चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू — स्वराज पार्टी के संस्थापक
  • अबनीन्द्रनाथ टैगोर — भारत माता का प्रसिद्ध चित्र बनाया

📌 महत्वपूर्ण शब्दावली

  • सत्याग्रह (Satyagraha) — सत्य का आग्रह, अहिंसक प्रतिरोध की विधि
  • बहिष्कार (Boycott) — विदेशी वस्तुओं, संस्थाओं और उपाधियों का त्याग
  • स्वदेशी (Swadeshi) — देशी वस्तुओं का उपयोग और प्रोत्साहन
  • रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) — बिना मुकदमे के कैद का अधिकार देने वाला कानून (1919)
  • खिलाफत (Khilafat) — तुर्की के खलीफा के समर्थन में आंदोलन
  • स्वराज (Swaraj) — स्व-शासन / आत्म-शासन
  • पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj) — पूर्ण स्वतंत्रता
  • पिकेटिंग (Picketing) — दुकानों या कार्यालयों के बाहर धरना देना

📌 तुलना — असहयोग vs सविनय अवज्ञा आंदोलन

  • समय: असहयोग — 1920-22 | सविनय अवज्ञा — 1930-34
  • आरम्भ: खिलाफत + जलियाँवाला बाग | नमक यात्रा (दांडी मार्च)
  • स्वरूप: सरकारी संस्थाओं का बहिष्कार | कानूनों का जानबूझकर उल्लंघन
  • माँग: स्वराज (Self-rule) | पूर्ण स्वराज (Complete Independence)
  • समाप्ति: चौरी-चौरा हिंसा | गांधी-इरविन समझौता (1931)
  • महिला भागीदारी: सीमित | व्यापक — नमक बनाना, पिकेटिंग

📖 पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर — NCERT Solutions

प्रश्न 1: व्याख्या करें कि भारत में असहयोग आंदोलन किन-किन कारणों से शुरू हुआ?

भारत में असहयोग आंदोलन निम्नलिखित कारणों से शुरू हुआ:

  • रॉलेट एक्ट (1919): ब्रिटिश सरकार ने बिना मुकदमे के किसी को भी कैद करने का अधिकार देने वाला कानून बनाया, जिसने भारतीयों में गहरा आक्रोश पैदा किया
  • जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919): अमृतसर में जनरल डायर द्वारा निहत्थी भीड़ पर गोलीबारी ने पूरे देश को आंदोलित कर दिया
  • खिलाफत का मुद्दा: प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने तुर्की के खलीफा के साथ अपमानजनक व्यवहार किया, जिससे भारतीय मुसलमान नाराज हुए
  • आर्थिक कठिनाइयाँ: युद्ध के बाद करों में वृद्धि, महँगाई और इन्फ्लुएंजा महामारी ने जनता को परेशान किया
  • हिंदू-मुस्लिम एकता: गांधीजी ने खिलाफत और स्वराज के मुद्दों को जोड़कर व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया
प्रश्न 2: सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों ने किस प्रकार भाग लिया?

सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी इस प्रकार थी:

  • समृद्ध किसान (पाटीदार, जाट): इन्होंने सरकारी राजस्व और लगान देने से इनकार किया। हालांकि, जब आंदोलन वापस लिया गया तो ये निराश हुए
  • गरीब किसान: ये चाहते थे कि उनका बकाया लगान माफ किया जाए, लेकिन कांग्रेस ने जमींदारों को नाराज न करने के लिए इस माँग का समर्थन नहीं किया
  • व्यापारी वर्ग: उन्होंने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और स्वदेशी को बढ़ावा दिया। FICCI जैसे संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया
  • औद्योगिक मजदूर: मजदूरों ने सीमित रूप से भागीदारी की क्योंकि कांग्रेस ने उनकी विशिष्ट माँगों को स्वीकार नहीं किया
  • महिलाएँ: बड़ी संख्या में महिलाओं ने नमक बनाने, शराब की दुकानों पर धरना देने और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर पिकेटिंग में भाग लिया
प्रश्न 3: 1921 में असहयोग आंदोलन वापस क्यों लिया गया?

फरवरी 1922 में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। इसके प्रमुख कारण थे:

  • चौरी-चौरा कांड: 5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा (गोरखपुर) में आंदोलनकारियों ने एक पुलिस चौकी में आग लगा दी जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए
  • अहिंसा का उल्लंघन: गांधीजी का मानना था कि आंदोलन हिंसक हो गया है और यह सत्याग्रह के मूल सिद्धांत — अहिंसा — के विरुद्ध है
  • गांधीजी को लगा कि जनता अभी अहिंसक आंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है
  • उन्होंने कहा कि हिंसक आंदोलन से ब्रिटिश सरकार को दमन का बहाना मिल जाएगा

कई कांग्रेसी नेता इस निर्णय से असहमत थे। चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने 1923 में स्वराज पार्टी बनाकर विधायी राजनीति में भाग लेने का निर्णय लिया।

प्रश्न 4: नमक यात्रा की चर्चा करें और स्पष्ट करें कि यह उपनिवेशवाद के विरुद्ध प्रतिरोध का एक प्रभावी प्रतीक क्यों था?

नमक यात्रा (दांडी मार्च): 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने अपने 78 विश्वसनीय स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से दांडी (गुजरात तट) तक लगभग 240 मील (385 किमी) की पदयात्रा शुरू की। 24 दिन चलकर 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर उन्होंने समुद्र तट पर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा

यह प्रभावी प्रतीक क्यों था:

  • नमक सबकी जरूरत: नमक अमीर-गरीब सभी के भोजन का अनिवार्य हिस्सा था, इसलिए यह मुद्दा हर वर्ग को जोड़ता था
  • ब्रिटिश एकाधिकार का प्रतीक: नमक कर और नमक बनाने पर प्रतिबंध औपनिवेशिक शोषण का स्पष्ट उदाहरण था
  • सरल प्रतिरोध: कोई भी व्यक्ति समुद्र तट पर जाकर नमक बना सकता था — यह विरोध का सबसे सरल तरीका था
  • अंतर्राष्ट्रीय ध्यान: इस यात्रा ने विश्व मीडिया का ध्यान आकर्षित किया और ब्रिटिश शासन के अन्याय को उजागर किया
  • जन भागीदारी: नमक यात्रा के बाद देश भर में हजारों लोगों ने नमक कानून तोड़ा, जिससे यह एक जन आंदोलन बन गया
प्रश्न 5: सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?

सत्याग्रह (Satyagraha) शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — 'सत्य' (Truth) और 'आग्रह' (Insistence/Firmness)। इसका अर्थ है — सत्य का आग्रह या सत्य के लिए दृढ़ संकल्प

गांधीजी के अनुसार सत्याग्रह की प्रमुख विशेषताएँ:

  • यह अहिंसक प्रतिरोध (Non-violent Resistance) की एक विधि है जिसमें शारीरिक बल (Physical Force) का प्रयोग नहीं किया जाता
  • सत्याग्रही आत्मबल (Soul Force / Moral Force) से उत्पीड़क की अंतरात्मा को जगाता है
  • यह निष्क्रिय प्रतिरोध नहीं बल्कि सक्रिय अहिंसा है — सत्याग्रही अन्याय सहने से इनकार करता है लेकिन हिंसा नहीं करता
  • गांधीजी ने इसे पहले दक्षिण अफ्रीका में आजमाया और फिर भारत में चंपारण (1917), खेड़ा (1918) और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में सफलतापूर्वक प्रयोग किया

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बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) किस वर्ष पारित हुआ?
  • A) 1915
  • B) 1919
  • C) 1920
  • D) 1930
✅ सही उत्तर: B) 1919 — रॉलेट एक्ट 1919 में पारित हुआ जिसने सरकार को बिना मुकदमे के किसी को भी कैद करने का अधिकार दिया।
2. जलियाँवाला बाग हत्याकांड कब हुआ?
  • A) 10 मार्च 1919
  • B) 26 जनवरी 1920
  • C) 13 अप्रैल 1919
  • D) 12 मार्च 1930
✅ सही उत्तर: C) 13 अप्रैल 1919 — जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ जहाँ जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर गोलियाँ चलवाईं।
3. गांधीजी ने दांडी मार्च कब शुरू किया?
  • A) 12 मार्च 1930
  • B) 6 अप्रैल 1930
  • C) 26 जनवरी 1930
  • D) 12 मार्च 1920
✅ सही उत्तर: A) 12 मार्च 1930 — गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी तक नमक यात्रा शुरू की और 6 अप्रैल को दांडी पहुँचकर नमक कानून तोड़ा।
4. स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के संस्थापक कौन थे?
  • A) गांधीजी और नेहरू
  • B) मुहम्मद अली और शौकत अली
  • C) अम्बेडकर और गांधीजी
  • D) चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू
✅ सही उत्तर: D) चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू — 1923 में असहयोग आंदोलन वापस लिए जाने के बाद इन्होंने स्वराज पार्टी बनाई।
5. साइमन कमीशन (Simon Commission) भारत कब आया?
  • A) 1925
  • B) 1928
  • C) 1930
  • D) 1932
✅ सही उत्तर: B) 1928 — साइमन कमीशन 1928 में भारत आया। इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था, इसलिए इसका व्यापक विरोध हुआ और "Simon Go Back" के नारे लगाए गए।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)

1. खिलाफत आंदोलन क्या था? इसे असहयोग आंदोलन से कैसे जोड़ा गया?

खिलाफत आंदोलन तुर्की के खलीफा (Caliph) के समर्थन में शुरू किया गया था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने तुर्की (Ottoman Empire) को विभाजित कर दिया और खलीफा की शक्ति छीन ली। भारतीय मुसलमान इससे नाराज थे। मुहम्मद अली और शौकत अली ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया। गांधीजी ने खिलाफत और असहयोग को एक साथ जोड़कर हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित की और एक व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया।

2. पूना पैक्ट (Poona Pact, 1932) क्या था?

पूना पैक्ट (1932) गांधीजी और डॉ. अम्बेडकर के बीच हुआ एक समझौता था। ब्रिटिश सरकार ने कम्युनल अवॉर्ड (Communal Award) के तहत दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) दिए थे। गांधीजी ने इसे राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा मानकर आमरण अनशन शुरू किया। अंततः समझौते में अलग निर्वाचन क्षेत्रों की जगह आरक्षित सीटें (Reserved Seats) प्रदान की गईं।

3. अल्लूरी सीताराम राजू कौन थे? उनका योगदान क्या था?

अल्लूरी सीताराम राजू आंध्र प्रदेश के गूडेम पहाड़ियों में आदिवासी विद्रोह के नेता थे। उन्होंने 1920 के दशक में औपनिवेशिक वन नीतियों (Colonial Forest Laws) के विरुद्ध सशस्त्र गुरिल्ला युद्ध किया। ये वन कानून आदिवासियों को जंगल में स्वतंत्र रूप से रहने और पशुचारण से रोकते थे। राजू ने गांधीजी को अपना प्रेरणास्रोत माना और खादी पहनने तथा शराब त्यागने का समर्थन किया, लेकिन उनका तरीका सशस्त्र संघर्ष था। 1924 में अंग्रेजों ने उन्हें पकड़कर फाँसी दे दी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)

1. भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारणों, स्वरूप और सीमाओं का विस्तार से वर्णन करें।

कारण: 1929 में विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (Great Depression) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। कृषि उत्पादों की कीमतें गिरीं, किसान कर्ज में डूबे। कांग्रेस ने दिसम्बर 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज (Complete Independence) का प्रस्ताव पारित किया। 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

स्वरूप: गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को दांडी मार्च शुरू किया और 6 अप्रैल को नमक कानून तोड़ा। इसके बाद पूरे देश में आंदोलन फैल गया — लोगों ने नमक बनाया, विदेशी कपड़ों की होली जलाई, शराब की दुकानों पर धरना दिया, सरकारी करों का भुगतान बंद किया। पेशावर में खान अब्दुल गफ्फार खान (Frontier Gandhi) ने पठानों को संगठित किया।

सीमाएँ: (1) दलित समुदाय — डॉ. अम्बेडकर ने कांग्रेस पर सवर्ण वर्चस्व का आरोप लगाया और दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की माँग की। (2) मुस्लिम समुदाय — बड़ी संख्या में मुसलमान इस आंदोलन से दूर रहे क्योंकि उन्हें लगता था कि हिंदू बहुसंख्यक सरकार में उनके हितों की उपेक्षा होगी। (3) गरीब किसान — लगान माफी की उनकी माँग को कांग्रेस ने पूरी तरह समर्थन नहीं दिया। (4) औद्योगिक मजदूर — उनकी भागीदारी सीमित रही।

1931 में गांधी-इरविन समझौते के बाद आंदोलन रोका गया, लेकिन दूसरे गोलमेज सम्मेलन की विफलता के बाद यह 1934 तक चलता रहा।

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