📍 School Code: 220736 | Samdari, Balotra, Rajasthan 📧 gsssjethantri@gmail.com
अध्याय 1 · राजनीति विज्ञान · कक्षा 10

सत्ता की साझेदारी

Power Sharing

1. परिचय — Introduction

यह अध्याय दो देशों — बेल्जियम (Belgium) और श्रीलंका (Sri Lanka) — के उदाहरणों से शुरू होता है। दोनों देशों में विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता के बँटवारे का प्रश्न उठा। बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी (Power Sharing) का मार्ग अपनाया जबकि श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) का।

इन दोनों उदाहरणों के माध्यम से हम समझेंगे कि लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी क्यों आवश्यक है और इसके विभिन्न रूप क्या हैं। सत्ता की साझेदारी न केवल संघर्ष रोकती है बल्कि लोकतंत्र की आत्मा (spirit of democracy) भी है।

2. बेल्जियम की कहानी

बेल्जियम यूरोप का एक छोटा देश है जिसकी जनसंख्या लगभग एक करोड़ है। यहाँ की जातीय संरचना (ethnic composition) बहुत जटिल है — 59% लोग डच (Flemish) भाषा बोलते हैं, 40% फ्रेंच भाषा बोलते हैं, और शेष 1% जर्मन भाषी हैं।

बेल्जियम की विशेष समस्या:

  • राजधानी ब्रसेल्स (Brussels) में 80% फ्रेंच भाषी हैं जबकि पूरे देश में डच भाषी बहुसंख्यक हैं
  • फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यक होते हुए भी अधिक समृद्ध और शक्तिशाली थे
  • डच भाषी समुदाय को अपने साथ भेदभाव महसूस होता था

बेल्जियम ने इस समस्या का समायोजन मॉडल (Accommodation Model) से समाधान किया। 1970 से 1993 के बीच चार बार संविधान में संशोधन किए गए:

📌 बेल्जियम का समायोजन मॉडल:

  • केन्द्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या समान रखी गई
  • केन्द्र सरकार की कुछ शक्तियाँ राज्य सरकारों को दी गईं — ये राज्य सरकारें किसी एक समुदाय के अधीन नहीं हैं
  • ब्रसेल्स में अलग सरकार बनाई गई जिसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है
  • सामुदायिक सरकार (Community Government) का निर्माण — भाषा, संस्कृति, शिक्षा जैसे मुद्दों पर निर्णय लेने का अधिकार

3. श्रीलंका की कहानी

श्रीलंका दक्षिण एशिया का एक द्वीपीय देश है। यहाँ की जनसंख्या में लगभग 74% सिंहली (Sinhala) भाषी हैं और लगभग 18% तमिल (Tamil) हैं। तमिलों में भी दो उपसमूह हैं — श्रीलंकाई तमिल (13%) और भारतीय तमिल (5%)।

1948 में स्वतंत्रता के बाद श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) की नीति अपनाई गई। सिंहली समुदाय की बहुसंख्या के आधार पर सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिनसे तमिल समुदाय हाशिए पर चला गया।

📌 श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद के कदम:

  • 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा (Official Language Act) बनाया गया
  • विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता
  • बौद्ध धर्म को संरक्षण और बढ़ावा देने की नीति
  • तमिल राजनीतिक दलों की मांगों की लगातार उपेक्षा

इन नीतियों के कारण तमिल समुदाय में अलगाव की भावना बढ़ी और 1983 में गृहयुद्ध (Civil War) शुरू हो गया जो 2009 तक चला। इस गृहयुद्ध में हजारों लोग मारे गए और लाखों विस्थापित हुए। यह बहुसंख्यकवाद की विफलता का सबसे स्पष्ट उदाहरण है।

4. सत्ता की साझेदारी क्यों?

सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो प्रकार के तर्क दिए जाते हैं:

सत्ता की साझेदारी के दो आधार:

  • व्यावहारिक तर्क (Prudential Reasons): सत्ता की साझेदारी से विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव कम होता है, राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है और सामाजिक विभाजन गहरा नहीं होता। श्रीलंका का उदाहरण दिखाता है कि बहुसंख्यकवाद से गृहयुद्ध तक हो सकता है।
  • नैतिक तर्क (Moral Reasons): सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है। लोकतंत्र का मूल अर्थ ही है कि शासन में सभी नागरिकों की भागीदारी हो। बिना साझेदारी के लोकतंत्र अपना अर्थ खो देता है।

व्यावहारिक तर्क परिणाम (outcome) पर आधारित है — सत्ता की साझेदारी से अच्छे परिणाम आते हैं। नैतिक तर्क मूल्य (value) पर आधारित है — सत्ता की साझेदारी अपने आप में सही है, चाहे इसके परिणाम कुछ भी हों।

5. सत्ता की साझेदारी के रूप

आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के चार मुख्य रूप पाए जाते हैं:

📌 सत्ता की साझेदारी के चार रूप:

  • क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution): सरकार के विभिन्न अंगों — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — के बीच सत्ता का बँटवारा। ये अंग एक-दूसरे पर नियंत्रण रखते हैं (Checks and Balances)।
  • ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical Distribution / Federalism): सरकार के विभिन्न स्तरों — केन्द्र, राज्य और स्थानीय सरकार — के बीच सत्ता का बँटवारा। इसे संघवाद कहते हैं।
  • विभिन्न सामाजिक समूहों में बँटवारा: विभिन्न सामाजिक समूहों — भाषायी, धार्मिक, जातीय — को शासन में उचित हिस्सेदारी देना। जैसे — बेल्जियम की सामुदायिक सरकार।
  • राजनीतिक दलों, दबाव समूहों और आन्दोलनों में बँटवारा: विभिन्न राजनीतिक दल, दबाव समूह (Pressure Groups) और नागरिक आन्दोलन सत्ता को प्रभावित करते हैं और नियंत्रित करते हैं।

ये सभी रूप लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं क्योंकि ये सुनिश्चित करते हैं कि सत्ता किसी एक व्यक्ति या समूह के हाथ में केन्द्रित न हो। सत्ता का विकेन्द्रीकरण (decentralization) लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है।

⚡ त्वरित पुनरावृत्ति — Quick Revision

📌 बेल्जियम vs श्रीलंका — तुलना

  • बेल्जियम: जनसंख्या ~ 1 करोड़ | श्रीलंका: जनसंख्या ~ 2 करोड़
  • बेल्जियम: डच 59%, फ्रेंच 40%, जर्मन 1% | श्रीलंका: सिंहली 74%, तमिल 18%
  • बेल्जियम: समायोजन (Accommodation) का मार्ग | श्रीलंका: बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism)
  • बेल्जियम: एकता और शांति बनी रही | श्रीलंका: गृहयुद्ध (1983-2009)
  • बेल्जियम: सामुदायिक सरकार बनी | श्रीलंका: तमिलों का अलगाव बढ़ा

📌 सत्ता की साझेदारी के चार रूप

  • क्षैतिज (Horizontal): विधायिका + कार्यपालिका + न्यायपालिका के बीच
  • ऊर्ध्वाधर (Vertical): केन्द्र + राज्य + स्थानीय सरकार (संघवाद)
  • सामाजिक समूहों में: भाषायी, धार्मिक, जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व
  • राजनीतिक दलों/दबाव समूहों में: बहुदलीय प्रणाली, दबाव समूह, आन्दोलन

📌 महत्वपूर्ण शब्दावली

  • सत्ता की साझेदारी (Power Sharing) — विभिन्न समूहों और संस्थाओं के बीच सत्ता का बँटवारा
  • बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) — बहुसंख्यक समुदाय द्वारा अपनी इच्छा से शासन, अल्पसंख्यकों की उपेक्षा
  • सामुदायिक सरकार (Community Government) — भाषा, संस्कृति, शिक्षा के लिए समुदाय आधारित सरकार
  • गृहयुद्ध (Civil War) — एक ही देश के नागरिकों के बीच सशस्त्र संघर्ष
  • नियंत्रण एवं संतुलन (Checks and Balances) — सरकार के अंगों का एक-दूसरे पर नियंत्रण

📌 महत्वपूर्ण तथ्य

  • बेल्जियम में 1970 से 1993 के बीच चार बार संविधान संशोधन हुआ
  • श्रीलंका में 1956 में Official Language Act पारित हुआ
  • श्रीलंका का गृहयुद्ध 1983-2009 तक चला
  • ब्रसेल्स में 80% जनसंख्या फ्रेंच भाषी है
  • बेल्जियम यूरोपीय संघ (EU) का मुख्यालय है

📖 पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर — NCERT Solutions

प्रश्न 1: बेल्जियम और श्रीलंका की सत्ता में साझेदारी की व्यवस्था में क्या मूल अंतर है?

बेल्जियम ने विभिन्न समुदायों के बीच समायोजन (Accommodation) का रास्ता अपनाया। संविधान में संशोधन कर समान प्रतिनिधित्व, सामुदायिक सरकार और संघीय ढाँचा अपनाया गया। इससे एकता और शांति बनी रही।

श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) का रास्ता अपनाया। सिंहली बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा के अनुसार भाषा, शिक्षा और रोजगार नीतियाँ बनाई गईं। तमिल अल्पसंख्यकों की मांगों की उपेक्षा की गई जिससे गृहयुद्ध हुआ।

मूल अंतर: बेल्जियम ने सत्ता का बँटवारा किया जबकि श्रीलंका ने सत्ता को बहुसंख्यक समुदाय के पास केन्द्रित किया।

प्रश्न 2: सत्ता की साझेदारी के पक्ष में व्यावहारिक और नैतिक तर्क क्या हैं?

व्यावहारिक तर्क (Prudential Reasons):

  • सत्ता की साझेदारी से सामाजिक समूहों के बीच टकराव कम होता है
  • राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है
  • बहुसंख्यक का अत्याचार (Tyranny of majority) रुकता है
  • श्रीलंका जैसे गृहयुद्ध से बचा जा सकता है

नैतिक तर्क (Moral Reasons):

  • सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है
  • लोकतंत्र में सभी नागरिकों की भागीदारी का अधिकार है
  • शासन प्रभावित लोगों की सहमति से चलना चाहिए
प्रश्न 3: बेल्जियम में सत्ता की साझेदारी के लिए क्या व्यवस्था की गई?

बेल्जियम में निम्नलिखित व्यवस्थाएँ की गईं:

  • केन्द्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की समान संख्या
  • कुछ विशेष कानूनों के लिए दोनों भाषायी समूहों के बहुमत की सहमति अनिवार्य
  • राज्य सरकारों को अधिक शक्तियाँ दी गईं
  • ब्रसेल्स में समान प्रतिनिधित्व वाली अलग सरकार
  • सामुदायिक सरकार — भाषा, संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी मुद्दों पर
प्रश्न 4: श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद ने किस प्रकार गृहयुद्ध को जन्म दिया?

श्रीलंका में 1948 में स्वतंत्रता के बाद सिंहली बहुसंख्यक समुदाय ने अपना वर्चस्व स्थापित किया:

  • 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया गया
  • नौकरियों और विश्वविद्यालयों में सिंहलियों को प्राथमिकता
  • बौद्ध धर्म को संरक्षण देने की नीति
  • तमिलों की मांगों को लगातार नकारा गया

इससे तमिल समुदाय में अलगाव और असंतोष बढ़ा। 1983 में यह असंतोष गृहयुद्ध में बदल गया जो 2009 तक चला, जिसमें हजारों लोगों की जान गई।

प्रश्न 5: सत्ता के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर वितरण में क्या अंतर है?

क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution):

  • सरकार के एक ही स्तर पर विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा
  • विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच
  • Checks and Balances की व्यवस्था

ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical Distribution):

  • सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच सत्ता का बँटवारा
  • केन्द्र, राज्य और स्थानीय सरकार के बीच
  • इसे संघवाद (Federalism) कहते हैं
  • ऊपर का स्तर निचले स्तर को आदेश नहीं दे सकता

🎯 प्रश्न बैंक — Question Bank

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. बेल्जियम में कुल जनसंख्या का कितना प्रतिशत डच भाषी है?
  • A) 40%
  • B) 50%
  • C) 59%
  • D) 74%
✅ सही उत्तर: C) 59% — बेल्जियम की कुल जनसंख्या में 59% डच (Flemish) भाषी, 40% फ्रेंच भाषी और 1% जर्मन भाषी हैं।
2. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद की शुरुआत किस वर्ष मानी जाती है?
  • A) 1948
  • B) 1956
  • C) 1970
  • D) 1983
✅ सही उत्तर: B) 1956 — 1956 में Official Language Act द्वारा सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया गया, जो बहुसंख्यकवाद की स्पष्ट शुरुआत थी।
3. सत्ता की साझेदारी का नैतिक तर्क (Moral Reason) क्या है?
  • A) गृहयुद्ध रोकता है
  • B) आर्थिक विकास बढ़ता है
  • C) राजनीतिक स्थिरता आती है
  • D) लोकतंत्र की आत्मा है
✅ सही उत्तर: D) लोकतंत्र की आत्मा है — नैतिक तर्क कहता है कि सत्ता की साझेदारी अपने आप में सही है क्योंकि यह लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है।
4. विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा किस प्रकार का वितरण है?
  • A) क्षैतिज वितरण
  • B) ऊर्ध्वाधर वितरण
  • C) सामुदायिक वितरण
  • D) दलीय वितरण
✅ सही उत्तर: A) क्षैतिज वितरण — सरकार के एक ही स्तर पर विभिन्न अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) के बीच सत्ता का बँटवारा क्षैतिज वितरण कहलाता है।
5. बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में कितने प्रतिशत जनसंख्या फ्रेंच भाषी है?
  • A) 40%
  • B) 59%
  • C) 80%
  • D) 100%
✅ सही उत्तर: C) 80% — ब्रसेल्स में 80% जनसंख्या फ्रेंच भाषी है जबकि पूरे देश में डच भाषी बहुसंख्यक (59%) हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)

1. बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) से क्या अभिप्राय है?

बहुसंख्यकवाद वह विश्वास है कि बहुसंख्यक समुदाय को — अपनी अधिक जनसंख्या के आधार पर — जिस तरह चाहे शासन करने का अधिकार है, भले ही इससे अल्पसंख्यक समुदायों की इच्छाओं और आवश्यकताओं की उपेक्षा हो। श्रीलंका इसका प्रमुख उदाहरण है जहाँ सिंहली बहुसंख्यक ने तमिल अल्पसंख्यकों पर अपनी भाषा और नीतियाँ थोपीं।

2. सामुदायिक सरकार (Community Government) क्या है?

सामुदायिक सरकार बेल्जियम में बनाई गई एक विशेष व्यवस्था है। इसमें एक भाषायी समुदाय के लोग — चाहे वे किसी भी क्षेत्र में रहते हों — अपनी भाषा, संस्कृति और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्वयं निर्णय ले सकते हैं। यह सरकार क्षेत्र पर नहीं बल्कि समुदाय पर आधारित है।

3. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है?

सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए आवश्यक है क्योंकि: (1) यह विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव कम करती है और राजनीतिक स्थिरता लाती है। (2) यह लोकतंत्र की आत्मा है — शासन में सभी नागरिकों की भागीदारी होनी चाहिए। (3) यह बहुसंख्यक के अत्याचार (Tyranny of majority) से बचाती है। (4) यह विविधतापूर्ण समाजों में एकता और सद्भाव बनाए रखती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)

1. बेल्जियम और श्रीलंका के उदाहरणों से सत्ता की साझेदारी के महत्व को स्पष्ट करें।

बेल्जियम का उदाहरण: बेल्जियम में डच (59%), फ्रेंच (40%) और जर्मन (1%) भाषी समुदाय हैं। राजधानी ब्रसेल्स में फ्रेंच भाषी 80% हैं। इस जटिल स्थिति में बेल्जियम ने समायोजन का मार्ग अपनाया — केन्द्रीय सरकार में समान प्रतिनिधित्व, राज्य सरकारों को अधिक शक्तियाँ, ब्रसेल्स में समान सरकार और सामुदायिक सरकार। इससे एकता बनी रही।

श्रीलंका का उदाहरण: श्रीलंका में सिंहली (74%) बहुसंख्यक ने 1956 से बहुसंख्यकवाद की नीति अपनाई — सिंहली को राजभाषा, बौद्ध धर्म को संरक्षण, नौकरियों में प्राथमिकता। तमिल अल्पसंख्यकों की मांगों की उपेक्षा से गृहयुद्ध (1983-2009) हुआ।

निष्कर्ष: बेल्जियम का उदाहरण सिद्ध करता है कि सत्ता की साझेदारी से शांति और एकता बनती है। श्रीलंका का उदाहरण दिखाता है कि सत्ता पर एक समुदाय का कब्जा विघटन और हिंसा लाता है। अतः सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में आवश्यक है — यह व्यावहारिक रूप से भी उचित है और नैतिक रूप से भी।

← सभी अध्याय अध्याय 2: संघवाद →