1. परिचय — संघवाद क्या है
संघवाद (Federalism) शासन की वह प्रणाली है जिसमें सत्ता केन्द्रीय सरकार (Central/Union Government) और क्षेत्रीय सरकारों (State/Provincial Governments) के बीच विभाजित होती है। दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं और किसी एक स्तर की सरकार दूसरे को मनमाने आदेश नहीं दे सकती।
संघीय व्यवस्था बड़े और विविधतापूर्ण देशों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है क्योंकि यह एकता में विविधता (Unity in Diversity) का सम्मान करती है।
📌 संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ:
- सरकार के दो या अधिक स्तर होते हैं (केन्द्र + राज्य + स्थानीय)
- प्रत्येक स्तर का अपना अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) होता है
- सत्ता का विभाजन संविधान द्वारा निर्धारित होता है — कोई भी सरकार एकतरफा बदलाव नहीं कर सकती
- एक स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान की व्याख्या और विवादों के निपटारे का कार्य करती है
- वित्तीय स्वायत्तता — प्रत्येक स्तर के राजस्व के अपने स्रोत होते हैं
2. संघवाद के प्रकार
संघीय व्यवस्थाओं का निर्माण दो तरीकों से होता है:
दो प्रकार की संघीय व्यवस्था:
- साथ आकर बनाना (Coming Together Federation): स्वतंत्र राज्य अपनी संप्रभुता का कुछ हिस्सा छोड़कर एक बड़ी इकाई बनाते हैं। उदाहरण — USA, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया। इसमें राज्यों को अधिक स्वायत्तता होती है।
- साथ रखकर बनाना (Holding Together Federation): एक बड़ा देश अपनी शक्तियों को विभाजित कर विभिन्न इकाइयों को सत्ता देता है। उदाहरण — भारत, स्पेन, बेल्जियम। इसमें केन्द्र सरकार अधिक शक्तिशाली होती है।
3. भारत में संघीय व्यवस्था
भारतीय संविधान ने संघीय ढाँचा अपनाया है, हालाँकि संविधान में "Federation" शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है — इसे "Union of States" कहा गया है। भारत में सत्ता तीन सूचियों के माध्यम से विभाजित है:
📌 तीन सूचियाँ (Three Lists):
- संघ सूची (Union List): रक्षा, विदेश मामले, बैंकिंग, संचार, मुद्रा — 97 विषय — केवल केन्द्र सरकार कानून बना सकती है
- राज्य सूची (State List): पुलिस, व्यापार, कृषि, सिंचाई, स्थानीय सरकार — 66 विषय — केवल राज्य सरकार कानून बना सकती है
- समवर्ती सूची (Concurrent List): शिक्षा, वन, विवाह, श्रम — 47 विषय — दोनों सरकारें कानून बना सकती हैं, टकराव पर केन्द्र का कानून मान्य
अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers): जो विषय तीनों सूचियों में नहीं हैं, उन पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार को है। उदाहरण — कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर जैसे नए विषय।
4. विकेन्द्रीकरण
विकेन्द्रीकरण (Decentralization) का अर्थ है केन्द्र और राज्य सरकारों से सत्ता को स्थानीय सरकारों (Local Self-Government) को हस्तांतरित करना। 1992 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन द्वारा स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
📌 पंचायती राज — तीन स्तर:
- ग्राम पंचायत: ग्राम सभा द्वारा चुनी जाती है — गाँव स्तर पर शासन
- पंचायत समिति (Block Level): कई ग्राम पंचायतों का समूह — खंड स्तर
- जिला परिषद (District Level): जिला स्तर पर — सभी पंचायत समितियों का प्रतिनिधित्व
73वें और 74वें संशोधन के प्रमुख प्रावधान:
- स्थानीय निकायों के नियमित चुनाव अनिवार्य
- अनुसूचित जातियों, जनजातियों और OBC के लिए सीटों का आरक्षण
- कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
- प्रत्येक राज्य में राज्य चुनाव आयोग की स्थापना
- शहरी क्षेत्रों में नगरपालिका (Municipality) की स्थापना
5. भाषायी राज्यों का गठन
स्वतंत्रता के बाद भारत के राज्यों का गठन भाषा के आधार पर किया गया। 1953 में आंध्र प्रदेश पहला भाषायी राज्य बना। 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganization Commission) की सिफारिशों के आधार पर राज्यों की सीमाएँ भाषा के अनुसार तय की गईं।
पहले कई लोगों को डर था कि भाषायी राज्य बनाने से देश टूट जाएगा, लेकिन वास्तव में इससे देश और अधिक एकजुट हुआ। लोगों ने अपनी भाषा में शासन की सुविधा पाई और प्रशासन अधिक कुशल हुआ।
6. केन्द्र-राज्य सम्बन्ध
भारत में केन्द्र-राज्य सम्बन्ध समय के साथ बदलते रहे हैं। शुरुआती दशकों में एक दल (कांग्रेस) का केन्द्र और राज्यों दोनों में प्रभुत्व था, इसलिए केन्द्र की शक्ति अधिक दिखती थी।
1989 के बाद गठबंधन सरकारों (Coalition Governments) के युग में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी। अब केन्द्र सरकार राज्य सरकारों के अधिकारों का अधिक सम्मान करने लगी है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई निर्णयों में राज्यों के अधिकारों को मान्यता दी है। इससे भारत में संघवाद मजबूत हुआ है।
गठबंधन युग का प्रभाव:
- क्षेत्रीय दलों का केन्द्र की नीति-निर्माण में प्रभाव बढ़ा
- राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान होने लगा
- राज्यपाल की मनमानी पर सर्वोच्च न्यायालय की रोक
- राष्ट्रपति शासन (President's Rule) का दुरुपयोग कम हुआ
📖 पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर — NCERT Solutions
प्रश्न 1: संघीय शासन व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?▼
संघीय शासन व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ:
- सरकार के दो या अधिक स्तर — केन्द्र और राज्य
- प्रत्येक स्तर का अपना अधिकार क्षेत्र संविधान द्वारा निर्धारित
- संविधान में एकतरफा बदलाव नहीं किया जा सकता
- स्वतंत्र न्यायपालिका — विवादों का निपटारा
- प्रत्येक स्तर के राजस्व के अपने स्रोत
- लिखित और कठोर संविधान
प्रश्न 2: भारत में संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाने में भाषायी राज्यों की क्या भूमिका रही?▼
1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों पर भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया गया।
- लोगों ने अपनी भाषा में प्रशासन पाया जिससे वे शासन से जुड़ सके
- भाषायी विविधता का सम्मान हुआ — लोगों को अपनी पहचान बनाए रखने का अवसर मिला
- भाषायी राज्यों ने देश को तोड़ने की जगह और जोड़ा
- संघीय ढाँचे को व्यावहारिक रूप मिला
प्रश्न 3: 1992 के संविधान संशोधन से पहले और बाद में स्थानीय स्वशासन में क्या अंतर आया?▼
1992 से पहले:
- स्थानीय निकायों का संवैधानिक दर्जा नहीं था
- चुनाव अनियमित होते थे, कई बार वर्षों तक नहीं होते थे
- राज्य सरकारें मनमाने ढंग से स्थानीय निकायों को भंग कर सकती थीं
1992 के बाद (73वाँ और 74वाँ संशोधन):
- संवैधानिक दर्जा मिला — नियमित चुनाव अनिवार्य
- SC/ST, OBC और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित
- राज्य चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से चुनाव कराता है
- राज्य सरकार के लिए शक्तियाँ और राजस्व हस्तांतरित करना अनिवार्य
प्रश्न 4: 'Coming Together' और 'Holding Together' संघवाद में क्या अंतर है?▼
Coming Together Federation: स्वतंत्र राज्य अपनी इच्छा से एक साथ आकर संघ बनाते हैं। राज्य अपनी संप्रभुता का कुछ हिस्सा केन्द्र को सौंपते हैं लेकिन अधिक स्वायत्तता बनाए रखते हैं। उदाहरण — USA, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया।
Holding Together Federation: एक बड़ा देश सत्ता का विभाजन कर विभिन्न इकाइयों को शक्तियाँ देता है। इसमें केन्द्र सरकार अधिक शक्तिशाली होती है। विभिन्न इकाइयों को असमान शक्तियाँ मिल सकती हैं। उदाहरण — भारत, स्पेन, बेल्जियम।
प्रश्न 5: भारत में विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता क्यों है?▼
भारत में विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता निम्न कारणों से है:
- भारत एक विशाल और विविध देश है — स्थानीय समस्याओं को केन्द्र या राज्य से हल करना कठिन है
- स्थानीय लोग अपनी समस्याओं को बेहतर समझते हैं
- लोकतंत्र में जन-भागीदारी बढ़ती है — सबसे निचले स्तर तक
- महिलाओं और कमजोर वर्गों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है
- शासन अधिक जवाबदेह और कुशल होता है
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बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. भारत में शिक्षा किस सूची का विषय है?
- A) संघ सूची
- B) समवर्ती सूची
- C) राज्य सूची
- D) अवशिष्ट सूची
✅ सही उत्तर: B) समवर्ती सूची — शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, जिस पर केन्द्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
2. पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन से मिला?
- A) 42वाँ संशोधन
- B) 44वाँ संशोधन
- C) 73वाँ संशोधन
- D) 86वाँ संशोधन
✅ सही उत्तर: C) 73वाँ संशोधन — 1992 में 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
3. 'Coming Together' संघवाद का उदाहरण कौन-सा देश है?
- A) भारत
- B) स्पेन
- C) बेल्जियम
- D) संयुक्त राज्य अमेरिका
✅ सही उत्तर: D) संयुक्त राज्य अमेरिका — USA में 13 उपनिवेशों ने मिलकर (Coming Together) एक संघ बनाया।
4. रक्षा (Defence) किस सूची का विषय है?
- A) संघ सूची
- B) राज्य सूची
- C) समवर्ती सूची
- D) अवशिष्ट सूची
✅ सही उत्तर: A) संघ सूची — रक्षा राष्ट्रीय महत्व का विषय है और संघ सूची में आता है जिस पर केवल केन्द्र कानून बनाता है।
5. स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए कितना आरक्षण है?
- A) 25%
- B) 30%
- C) 33%
- D) 50%
✅ सही उत्तर: C) 33% — 73वें और 74वें संशोधन द्वारा स्थानीय निकायों में कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)
1. अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers) क्या हैं?▼
अवशिष्ट शक्तियाँ वे शक्तियाँ हैं जो संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची — किसी में भी नहीं हैं। ऐसे विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार (संसद) को है। उदाहरण — कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर, साइबर अपराध जैसे नए विषय।
2. ग्राम सभा (Gram Sabha) क्या है?▼
ग्राम सभा गाँव के सभी वयस्क मतदाताओं का समूह है। यह पंचायती राज की सबसे निचली और सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। ग्राम सभा ग्राम पंचायत के कामकाज की निगरानी करती है, बजट को स्वीकृति देती है और विकास कार्यों की समीक्षा करती है।
3. समवर्ती सूची पर केन्द्र और राज्य दोनों के कानून में टकराव हो तो क्या होगा?▼
समवर्ती सूची के विषयों पर केन्द्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। यदि दोनों के कानूनों में टकराव (conflict) हो, तो केन्द्र का कानून मान्य होगा और राज्य का कानून उस सीमा तक अमान्य हो जाएगा। यह भारतीय संघवाद में केन्द्र की प्रधानता को दर्शाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)
1. भारत में संघीय व्यवस्था कैसे कार्य करती है? विस्तार से समझाइए।▼
भारत में संघीय व्यवस्था 'Holding Together' प्रकार की है। संविधान में सत्ता का विभाजन तीन सूचियों — संघ सूची (97 विषय), राज्य सूची (66 विषय) और समवर्ती सूची (47 विषय) — में किया गया है। अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र के पास हैं।
संघवाद को मजबूत बनाने वाले कारक:
- भाषायी राज्यों का गठन (1956) — विविधता का सम्मान
- भाषा नीति — हिंदी + अंग्रेजी + 22 अनुसूचित भाषाएँ
- गठबंधन सरकारों का युग — क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी
- विकेन्द्रीकरण — 73वें और 74वें संशोधन द्वारा स्थानीय सरकारों को सत्ता
- स्वतंत्र न्यायपालिका — केन्द्र-राज्य विवादों का निपटारा
इस प्रकार भारत में संघीय व्यवस्था तीन स्तरों — केन्द्र, राज्य और स्थानीय — पर कार्य करती है और समय के साथ यह और मजबूत हुई है।