Acids, Bases and Salts
अम्ल (Acids) वे पदार्थ हैं जो जल में विलयन बनाने पर H⁺ (हाइड्रोजन) आयन देते हैं। क्षारक (Bases) वे पदार्थ हैं जो जल में OH⁻ (हाइड्रॉक्साइड) आयन देते हैं। यह आर्हीनियस परिभाषा (Arrhenius Definition) है।
अम्ल जल में H⁺ (H₃O⁺) आयन देते हैं: HCl → H⁺ + Cl⁻
क्षारक जल में OH⁻ आयन देते हैं: NaOH → Na⁺ + OH⁻
नोट: अम्ल और क्षारक जल की उपस्थिति में ही अम्लीय/क्षारकीय व्यवहार दिखाते हैं। शुष्क HCl गैस सूखे लिटमस पत्र का रंग नहीं बदलती।
pH किसी विलयन की अम्लीयता या क्षारकीयता मापने का पैमाना है। pH = -log[H⁺]
लवण (Salt) अम्ल और क्षारक की उदासीनीकरण अभिक्रिया से बनता है। एक ही अम्ल से बने लवणों को लवण का परिवार कहते हैं।
समुद्री जल के वाष्पीकरण से प्राप्त। इससे कई महत्वपूर्ण रसायन बनते हैं: NaOH, Na₂CO₃, NaHCO₃, Cl₂, HCl।
किसी लवण के एक सूत्र इकाई में जल के अणुओं की निश्चित संख्या को क्रिस्टलन जल कहते हैं।
तीनों परखनलियों में लिटमस पत्र या सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator) डालकर पहचान करें:
दही और खट्टे पदार्थों में अम्ल (लैक्टिक अम्ल, सिट्रिक अम्ल) होता है। ये अम्ल पीतल और तांबे की धातुओं से अभिक्रिया करके विषैले यौगिक (जैसे कॉपर सल्फेट) बनाते हैं जो भोजन को दूषित कर सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस (H₂)
उदाहरण: 2HCl(aq) + Zn(s) → ZnCl₂(aq) + H₂(g)↑
जाँच: जलती हुई तीली गैस के पास लाने पर "पॉप" (फक्) की ध्वनि होती है। यह हाइड्रोजन गैस की पहचान है।
X = धातु कार्बोनेट या बाइकार्बोनेट (जैसे Na₂CO₃ या NaHCO₃)
निकलने वाली गैस CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) है।
समीकरण: Na₂CO₃ + 2HCl → 2NaCl + H₂O + CO₂↑
जाँच: CO₂ गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
HCl और HNO₃ जल में H⁺ (H₃O⁺) आयन उत्पन्न करते हैं जो अम्लीय गुण दिखाते हैं:
HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻
जबकि ऐल्कोहॉल (C₂H₅OH) और ग्लूकोज़ (C₆H₁₂O₆) में हाइड्रोजन तो होता है, लेकिन ये जल में H⁺ आयन उत्पन्न नहीं करते। इसलिए ये अम्लीय गुण नहीं दिखाते।
सदैव अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, जल को अम्ल में नहीं।
कारण: सांद्र अम्ल (विशेषकर H₂SO₄) को जल में मिलाने पर बहुत अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। यदि जल को अम्ल में मिलाएँ तो ऊष्मा इतनी अधिक होगी कि मिश्रण बाहर उछल सकता है और गंभीर जलन (Severe burns) हो सकती है। अम्ल को पतली धार में जल में मिलाने पर ऊष्मा धीरे-धीरे विलयन में समा जाती है।
जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
बेकिंग पाउडर = बेकिंग सोडा (NaHCO₃) + टार्टरिक अम्ल (Tartaric Acid)
गर्म करने पर NaHCO₃ विघटित होकर CO₂ गैस छोड़ता है:
2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + H₂O + CO₂↑
CO₂ गैस के कारण केक/ब्रेड फूलकर मुलायम हो जाते हैं। टार्टरिक अम्ल Na₂CO₃ को उदासीन कर देता है ताकि कड़वा स्वाद न आए।
CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O → CaSO₄·2H₂O
(प्लास्टर ऑफ पेरिस + जल → जिप्सम)
प्लास्टर ऑफ पेरिस जल मिलाने पर कठोर ठोस पदार्थ (जिप्सम) बन जाता है। इसी कारण इसका उपयोग टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने, खिलौने बनाने और सजावटी कार्यों में किया जाता है।
दैनिक जीवन में pH का बहुत महत्व है:
बनाने की विधि: बुझे हुए चूने (Ca(OH)₂) पर क्लोरीन (Cl₂) गैस की क्रिया से:
Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O
उपयोग:
गर्म करने पर NaHCO₃ (बेकिंग सोडा) विघटित होकर सोडियम कार्बोनेट, जल और CO₂ गैस बनाता है:
2NaHCO₃(s) → Na₂CO₃(s) + H₂O(l) + CO₂(g)↑
प्रबल अम्ल: जो जल में पूर्णतः आयनित (ionised) होते हैं और अधिक H⁺ आयन देते हैं।
उदाहरण: HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल), H₂SO₄ (सल्फ्यूरिक अम्ल)
दुर्बल अम्ल: जो जल में आंशिक रूप से आयनित होते हैं और कम H⁺ आयन देते हैं।
उदाहरण: CH₃COOH (एसिटिक अम्ल), H₂CO₃ (कार्बोनिक अम्ल)
किसी लवण के एक सूत्र इकाई में जल के अणुओं की निश्चित संख्या को क्रिस्टलन जल कहते हैं।
उदाहरण:
गर्म करने पर क्रिस्टलन जल निकल जाता है और पदार्थ का रंग बदल जाता है (जैसे CuSO₄·5H₂O नीले से सफेद हो जाता है)।
सदैव अम्ल को जल में पतली धार में मिलाना चाहिए, जल को अम्ल में नहीं।
कारण: सांद्र अम्ल (विशेषकर H₂SO₄) जल में घुलने पर अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। यदि जल को सांद्र अम्ल में मिलाएँ तो उत्पन्न ऊष्मा से मिश्रण उछलकर बाहर आ सकता है जिससे गंभीर जलन हो सकती है। अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाने पर ऊष्मा सुरक्षित रूप से अवशोषित हो जाती है।
बेकिंग सोडा (NaHCO₃):
रासायनिक नाम: सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट
बनाने की विधि: NaCl + H₂O + CO₂ + NH₃ → NH₄Cl + NaHCO₃ (सॉल्वे प्रक्रम)
गुण: सफेद क्रिस्टलीय पाउडर, जल में घुलनशील, गर्म करने पर विघटित: 2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + H₂O + CO₂
उपयोग: बेकिंग पाउडर बनाना, एंटासिड, सोडा-अम्ल अग्निशामक में
धावन सोडा (Na₂CO₃·10H₂O):
रासायनिक नाम: सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट
बनाने की विधि: NaHCO₃ को गर्म करके Na₂CO₃ बनाते हैं, फिर उसे जल में घोलकर पुनः क्रिस्टलीकरण करते हैं: Na₂CO₃ + 10H₂O → Na₂CO₃·10H₂O
उपयोग: कपड़े धोना, काँच/साबुन/कागज़ उद्योग, जल की स्थायी कठोरता दूर करना, बोरैक्स बनाना
pH स्केल: किसी विलयन में H⁺ आयनों की सांद्रता मापने का पैमाना। pH = 0 (सबसे प्रबल अम्ल) से 14 (सबसे प्रबल क्षारक) तक होता है। pH 7 = उदासीन।
दैनिक जीवन में pH का महत्व: