1. धातुओं के भौतिक गुण — Physical Properties of Metals
धातुएँ (Metals) वे तत्व हैं जो इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाते हैं। अधिकांश धातुएँ आवर्त सारणी के बाईं ओर स्थित हैं।
धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण:
- चमक (Lustre/Metallic shine): धातुओं की सतह चमकदार होती है। ताजी काटी गई सतह पर यह चमक स्पष्ट दिखती है।
- कठोरता (Hardness): अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं। अपवाद: सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) इतने मुलायम हैं कि उन्हें चाकू से काटा जा सकता है।
- आघातवर्धनीयता (Malleability): धातुओं को हथौड़े से पीटकर पतली चादर बनाई जा सकती है। सोना (Au) और चाँदी (Ag) सबसे अधिक आघातवर्ध्य हैं।
- तन्यता (Ductility): धातुओं को खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है — 1 ग्राम सोने से 2 किमी लंबा तार बनाया जा सकता है।
- ऊष्मा एवं विद्युत चालकता (Heat & Electrical Conductivity): धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं। चाँदी (Ag) सबसे अच्छी चालक है, फिर तांबा (Cu) और फिर सोना (Au)।
- ध्वानिकता (Sonorous): धातुएँ टकराने पर टनटनाहट की ध्वनि (ringing sound) उत्पन्न करती हैं। इसी कारण स्कूल की घंटी धातु से बनी होती है।
- उच्च गलनांक और क्वथनांक (High Melting & Boiling Point): अधिकांश धातुओं का गलनांक उच्च होता है। अपवाद: गैलियम (Ga) और सीज़ियम (Cs) का गलनांक बहुत कम है।
महत्वपूर्ण अपवाद (Important Exceptions):
- पारा (Mercury/Hg): कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में रहने वाली एकमात्र धातु।
- सोडियम (Na) और पोटैशियम (K): बहुत मुलायम — चाकू से काटे जा सकते हैं।
- सोडियम, पोटैशियम, लीथियम (Na, K, Li): इनका घनत्व बहुत कम होता है — ये पानी पर तैरते हैं।
- टंगस्टन (W): सबसे अधिक गलनांक (3422°C) — बल्ब के फिलामेंट में प्रयोग।
2. अधातुओं के भौतिक गुण — Physical Properties of Non-metals
अधातुएँ (Non-metals) वे तत्व हैं जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anion) बनाते हैं। ये आवर्त सारणी के दाईं ओर स्थित हैं।
अधातुओं के प्रमुख भौतिक गुण:
- भंगुर (Brittle): अधातुएँ कठोर नहीं होतीं और आसानी से टूट जाती हैं। इन्हें चादर या तार में नहीं बदला जा सकता।
- चमकहीन (Non-lustrous/Dull): अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती। अपवाद: आयोडीन (I₂) में धात्विक चमक होती है।
- कुचालक (Non-conductors): अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। अपवाद: ग्रेफाइट (Graphite) विद्युत का सुचालक है।
- निम्न गलनांक और क्वथनांक (Low MP & BP): अधातुओं का गलनांक व क्वथनांक सामान्यतः कम होता है।
- ध्वानिक नहीं (Non-sonorous): अधातुएँ टकराने पर ध्वनि उत्पन्न नहीं करतीं।
अधातुओं के अपवाद (Exceptions in Non-metals):
- हीरा (Diamond): प्रकृति में पाया जाने वाला सबसे कठोर पदार्थ (अधातु कार्बन का अपररूप)।
- ग्रेफाइट (Graphite): विद्युत का सुचालक (पेंसिल की लीड, इलेक्ट्रोड में प्रयोग)।
- आयोडीन (Iodine/I₂): चमकदार (lustrous) अधातु।
- ब्रोमीन (Bromine/Br₂): कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में रहने वाली एकमात्र अधातु।
3. धातुओं के रासायनिक गुण — Chemical Properties of Metals
3.1 ऑक्सीजन से अभिक्रिया (Reaction with Oxygen)
धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड (Metal Oxide) बनाती हैं। ये ऑक्साइड प्रायः क्षारकीय (Basic) होते हैं।
उदाहरण:
- 4Na + O₂ → 2Na₂O (सोडियम ऑक्साइड — क्षारकीय)
- 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ (एलुमिनियम ऑक्साइड — उभयधर्मी/Amphoteric: अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करता है)
- 2Cu + O₂ → 2CuO (कॉपर ऑक्साइड — काला)
- 2Mg + O₂ → 2MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड — श्वेत चमकदार ज्वाला)
उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides):
- Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O (अम्ल से अभिक्रिया)
- Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O (क्षार से अभिक्रिया)
- ZnO भी उभयधर्मी ऑक्साइड है।
3.2 जल से अभिक्रिया (Reaction with Water)
विभिन्न धातुएँ जल से भिन्न-भिन्न दरों पर अभिक्रिया करती हैं:
उदाहरण:
- 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ (ठंडे जल से तीव्र अभिक्रिया — ज्वाला के साथ)
- 2K + 2H₂O → 2KOH + H₂↑ (ठंडे जल से अत्यंत तीव्र अभिक्रिया)
- Ca + 2H₂O → Ca(OH)₂ + H₂↑ (ठंडे जल से, धीमी अभिक्रिया)
- Mg + 2H₂O → Mg(OH)₂ + H₂↑ (गर्म जल से अभिक्रिया)
- 3Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂↑ (भाप/steam से अभिक्रिया)
- Al, Zn, Fe — गर्म जल या भाप से अभिक्रिया करते हैं।
- Cu, Ag, Au, Pt — जल से कोई अभिक्रिया नहीं करते।
3.3 अम्ल से अभिक्रिया (Reaction with Acids)
धातुएँ तनु अम्ल (dilute acids) से अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
उदाहरण:
- Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
- 2Al + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂↑
- Mg + 2HCl → MgCl₂ + H₂↑
- Fe + H₂SO₄ → FeSO₄ + H₂↑
ध्यान दें:
- Cu, Ag, Au जैसी कम क्रियाशील धातुएँ तनु HCl/H₂SO₄ से अभिक्रिया नहीं करतीं।
- तांबा (Cu) तनु HNO₃ से अभिक्रिया करता है (HNO₃ एक उपचायक अम्ल है)।
3.4 अन्य धातुओं के लवण विलयन से अभिक्रिया (Reaction with Salt Solutions)
अधिक क्रियाशील धातु, कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
उदाहरण:
- Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s) (लोहा, तांबे को विस्थापित करता है — विलयन नीले से हरा हो जाता है)
- Zn(s) + CuSO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + Cu(s)
- Cu(s) + 2AgNO₃(aq) → Cu(NO₃)₂(aq) + 2Ag(s) (तांबा, चाँदी को विस्थापित करता है)
- Cu + FeSO₄ → कोई अभिक्रिया नहीं (Cu, Fe से कम क्रियाशील है)
4. क्रियाशीलता श्रेणी — Reactivity Series
धातुओं को उनकी क्रियाशीलता (Reactivity) के घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर जो श्रेणी बनती है उसे क्रियाशीलता श्रेणी या सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) कहते हैं।
क्रियाशीलता श्रेणी (घटते क्रम में):
- K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Ni > Sn > Pb > [H] > Cu > Hg > Ag > Au > Pt
- K (पोटैशियम) सबसे अधिक क्रियाशील, Pt (प्लैटिनम) सबसे कम क्रियाशील।
- हाइड्रोजन (H) से ऊपर की धातुएँ तनु अम्ल से H₂ गैस मुक्त करती हैं।
- हाइड्रोजन (H) से नीचे की धातुएँ (Cu, Hg, Ag, Au, Pt) तनु अम्ल से H₂ गैस मुक्त नहीं करतीं।
5. आयनिक यौगिक — Ionic Compounds
जब धातुएँ अधातुओं से अभिक्रिया करती हैं, तो धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागती हैं और अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं। इस प्रकार बने यौगिक आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) कहलाते हैं।
NaCl (सोडियम क्लोराइड) का निर्माण:
- Na → Na⁺ + e⁻ (सोडियम एक इलेक्ट्रॉन त्यागता है — धनायन बनता है)
- Cl + e⁻ → Cl⁻ (क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है — ऋणायन बनता है)
- Na⁺ + Cl⁻ → NaCl (स्थिरवैद्युत आकर्षण बल द्वारा आयनिक बंध बनता है)
आयनिक यौगिकों के गुण (Properties of Ionic Compounds):
- उच्च गलनांक और क्वथनांक (High MP & BP): मजबूत आयनिक बंध के कारण इन्हें तोड़ने में अधिक ऊर्जा लगती है।
- कठोर एवं भंगुर (Hard but Brittle): ये ठोस कठोर होते हैं लेकिन दबाव डालने पर टूट जाते हैं।
- जल में विलेय (Soluble in water): अधिकांश आयनिक यौगिक जल में घुलनशील हैं।
- विद्युत चालकता (Electrical Conductivity): ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते (आयन स्थिर)। गलित (molten) अवस्था या जलीय विलयन (aqueous solution) में विद्युत का चालन करते हैं (आयन मुक्त होकर गतिशील)।
6. धातुओं का निष्कर्षण — Extraction of Metals
पृथ्वी की भूपर्पटी (Earth's crust) में धातुएँ प्रायः यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं। इन्हें खनिज (Minerals) कहते हैं। जिन खनिजों से धातु का निष्कर्षण लाभदायक होता है, उन्हें अयस्क (Ores) कहते हैं।
सक्रियता के आधार पर धातुओं का वर्गीकरण:
- अत्यधिक सक्रिय (Top — K, Na, Ca, Mg, Al): विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction) द्वारा प्राप्त।
- मध्यम सक्रिय (Middle — Zn, Fe, Pb, Cu): कार्बन (C) द्वारा अपचयन से प्राप्त।
- कम सक्रिय (Bottom — Cu, Ag, Au, Pt): स्वतंत्र अवस्था में या स्वत: अपचयन (Self-reduction) से प्राप्त।
6.1 भर्जन (Roasting)
सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करके ऑक्साइड में बदलना।
उदाहरण:
- 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ (जिंक सल्फाइड का भर्जन)
- 2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂ (कॉपर सल्फाइड का भर्जन)
6.2 निस्तापन (Calcination)
कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में गर्म करके ऑक्साइड में बदलना।
उदाहरण:
- ZnCO₃ → ZnO + CO₂ (जिंक कार्बोनेट का निस्तापन)
- CaCO₃ → CaO + CO₂ (चूना पत्थर का निस्तापन)
6.3 अपचयन (Reduction)
प्राप्त धातु ऑक्साइड को कार्बन (कोक) का उपयोग करके शुद्ध धातु में बदलना।
उदाहरण:
- ZnO + C → Zn + CO (जिंक ऑक्साइड का अपचयन)
- Fe₂O₃ + 3C → 2Fe + 3CO (आयरन ऑक्साइड का अपचयन)
- Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ (थर्माइट अभिक्रिया — Al द्वारा अपचयन)
6.4 विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining)
अशुद्ध धातु को शुद्ध करने के लिए विद्युत अपघटन (Electrolysis) का उपयोग किया जाता है।
विद्युत अपघटनी शोधन की प्रक्रिया:
- एनोड (Anode/+): अशुद्ध धातु का मोटा टुकड़ा।
- कैथोड (Cathode/-): शुद्ध धातु की पतली पट्टी।
- विद्युत अपघट्य (Electrolyte): उसी धातु के लवण का अम्लीय विलयन।
- विद्युत धारा प्रवाहित करने पर — एनोड से अशुद्ध धातु घुलती है, कैथोड पर शुद्ध धातु जमा होती है, अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड पंक (Anode Mud) के रूप में नीचे बैठ जाती हैं।
7. संक्षारण एवं मिश्रधातु — Corrosion & Alloys
7.1 संक्षारण (Corrosion)
जब धातुएँ अपने परिवेश में उपस्थित नमी, ऑक्सीजन, अम्ल, CO₂ आदि से अभिक्रिया करके क्षय होती हैं तो इसे संक्षारण कहते हैं।
संक्षारण के उदाहरण:
- लोहे पर जंग: 4Fe + 3O₂ + xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O (भूरा-लाल जंग)
- ताँबे पर हरी परत: Cu + O₂ + CO₂ + H₂O → CuCO₃·Cu(OH)₂ (कॉपर कार्बोनेट)
- चाँदी का काला पड़ना: Ag + H₂S → Ag₂S (सिल्वर सल्फाइड)
संक्षारण रोकने के उपाय (Prevention of Corrosion):
- पेंटिंग (Painting): सतह पर पेंट करना।
- तेल/ग्रीस लगाना (Oiling/Greasing): मशीनों के पुर्जों पर।
- गैल्वेनीकरण (Galvanisation): लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाना — सबसे प्रभावी तरीका।
- मिश्रधातु बनाना (Alloying): जैसे स्टेनलेस स्टील।
- विद्युत लेपन (Electroplating): एक धातु पर दूसरी धातु की परत चढ़ाना।
7.2 मिश्रधातु (Alloys)
मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं का, या धातु और अधातु का समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture) है। मिश्रधातु बनाने से धातुओं के गुणों में सुधार होता है।
महत्वपूर्ण मिश्रधातुएँ (Important Alloys):
- पीतल (Brass): तांबा (Cu) + जस्ता (Zn) [लगभग 70:30]
- कांसा (Bronze): तांबा (Cu) + टिन (Sn) [लगभग 90:10]
- सोल्डर (Solder): सीसा (Pb) + टिन (Sn) [लगभग 50:50] — तारों की सोल्डरिंग में प्रयोग (कम गलनांक)
- स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel): लोहा (Fe) + क्रोमियम (Cr) + निकेल (Ni) + कार्बन (C) — जंग नहीं लगता
- ड्यूरालुमिन (Duralumin): एलुमिनियम (Al) + तांबा (Cu) + मैग्नीशियम (Mg) + मैंगनीज़ (Mn) — हवाई जहाज बनाने में
सोने के आभूषण:
- शुद्ध सोना (24 कैरेट) बहुत मुलायम होता है, इसलिए आभूषण बनाने के लिए इसमें तांबा या चाँदी मिलाई जाती है।
- 22 कैरेट सोना = 22 भाग शुद्ध सोना + 2 भाग तांबा/चाँदी।
📖 NCERT पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर — Solutions
पाठगत प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1: ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो (i) कमरे के ताप पर द्रव हो। (ii) चाकू से आसानी से काटी जा सकती हो। (iii) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक हो। (iv) ऊष्मा की कुचालक हो।▼
(i) पारा (Mercury/Hg) — कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में रहता है।
(ii) सोडियम (Na) — बहुत मुलायम होता है, चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
(iii) चाँदी (Ag) — ऊष्मा और विद्युत दोनों की सबसे अच्छी चालक है।
(iv) सीसा (Lead/Pb) — ऊष्मा की कुचालक है।
प्रश्न 2: आघातवर्धनीयता (Malleability) एवं तन्यता (Ductility) के अर्थ बताइए।▼
आघातवर्धनीयता (Malleability): वह गुण जिसके कारण धातुओं को हथौड़े से पीटकर पतली चादरों (sheets) में बदला जा सकता है। सोना (Au) और चाँदी (Ag) सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं।
तन्यता (Ductility): वह गुण जिसके कारण धातुओं को खींचकर पतले तारों (wires) में बदला जा सकता है। सोना (Au) सबसे अधिक तन्य धातु है।
प्रश्न 3: सोडियम को केरोसिन में क्यों रखा जाता है?▼
सोडियम (Na) अत्यंत क्रियाशील धातु है। यह खुली हवा में रखने पर तुरंत ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके Na₂O बनाता है और जल/नमी से तीव्र अभिक्रिया करके H₂ गैस बनाता है जो आग पकड़ सकती है। इसलिए सोडियम को केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है ताकि यह वायु और नमी के संपर्क में न आए।
प्रश्न 4: एम्फोटेरिक (उभयधर्मी) ऑक्साइड क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।▼
जो धातु ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं, उन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides) कहते हैं।
उदाहरण:
- Al₂O₃ (एलुमिनियम ऑक्साइड):
Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O (अम्ल से)
Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O (क्षार से)
- ZnO (जिंक ऑक्साइड):
ZnO + 2HCl → ZnCl₂ + H₂O (अम्ल से)
ZnO + 2NaOH → Na₂ZnO₂ + H₂O (क्षार से)
प्रश्न 5: दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगी तथा दो धातुओं के नाम बताइए जो ऐसा नहीं कर सकतीं।▼
हाइड्रोजन विस्थापित करने वाली धातुएँ (क्रियाशीलता श्रेणी में H से ऊपर):
- जस्ता (Zinc): Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
- मैग्नीशियम (Mg): Mg + 2HCl → MgCl₂ + H₂↑
हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करने वाली धातुएँ (क्रियाशीलता श्रेणी में H से नीचे):
- तांबा (Copper/Cu)
- चाँदी (Silver/Ag)
प्रश्न 6: लोहे (Iron) से बनी वस्तुओं को हम पेंट क्यों करते हैं?▼
लोहे की वस्तुओं पर पेंट करने से लोहे की सतह वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी के सीधे संपर्क में नहीं आती। इससे संक्षारण (Corrosion) अर्थात् जंग लगने की प्रक्रिया रुक जाती है और लोहे की वस्तु लंबे समय तक टिकी रहती है। यह संक्षारण रोकने का एक सस्ता और प्रभावी तरीका है।
प्रश्न 7: आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है?▼
आयनिक यौगिक धनायनों (Cations) और ऋणायनों (Anions) के बीच मजबूत स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force of attraction) से बने होते हैं। इन मजबूत अंतर-आयनिक आकर्षण बलों को तोड़ने के लिए अत्यधिक ऊर्जा (ऊष्मा) की आवश्यकता होती है। इसलिए आयनिक यौगिकों का गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होता है।
अभ्यास प्रश्न (Exercise Questions)
प्रश्न 8: निम्नलिखित में किस युगल का विस्थापन द्वारा अभिक्रिया होगी? (a) NaCl(aq) + Cu(s) (b) MgCl₂(aq) + Al(s) (c) FeSO₄(aq) + Ag(s) (d) AgNO₃(aq) + Cu(s)▼
उत्तर: (d) AgNO₃(aq) + Cu(s)
तांबा (Cu) चाँदी (Ag) से अधिक क्रियाशील है, इसलिए Cu, Ag को विस्थापित कर देगा:
Cu(s) + 2AgNO₃(aq) → Cu(NO₃)₂(aq) + 2Ag(s)
शेष विकल्पों में — (a) Cu, Na से कम क्रियाशील; (b) Al, Mg से कम क्रियाशील; (c) Ag, Fe से कम क्रियाशील — अतः कोई अभिक्रिया नहीं होगी।
प्रश्न 9: धातु निष्कर्षण में भर्जन (Roasting) और निस्तापन (Calcination) में क्या अंतर है?▼
भर्जन (Roasting):
- सल्फाइड अयस्क को वायु की अधिक मात्रा में उच्च ताप पर गर्म करना।
- अयस्क ऑक्साइड में बदल जाता है और SO₂ गैस निकलती है।
- उदाहरण: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂
निस्तापन (Calcination):
- कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में उच्च ताप पर गर्म करना।
- अयस्क ऑक्साइड में बदल जाता है और CO₂ गैस निकलती है।
- उदाहरण: ZnCO₃ → ZnO + CO₂
प्रश्न 10: मिश्रधातु (Alloy) क्या है? मिश्रधातु बनाने का उद्देश्य क्या है?▼
मिश्रधातु (Alloy): दो या अधिक धातुओं का, या किसी धातु और अधातु का समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture)।
मिश्रधातु बनाने के उद्देश्य:
- कठोरता बढ़ाना: शुद्ध सोना मुलायम है, तांबा मिलाने पर कठोर हो जाता है।
- संक्षारण रोकना: स्टेनलेस स्टील (Fe + Cr + Ni + C) में जंग नहीं लगता।
- विद्युत चालकता कम करना: मिश्रधातुओं की विद्युत चालकता शुद्ध धातुओं से कम होती है।
- गलनांक कम करना: सोल्डर (Pb + Sn) का गलनांक Pb और Sn दोनों से कम होता है।
प्रश्न 11: अयस्क (Ore) और खनिज (Mineral) में क्या अंतर है?▼
खनिज (Mineral): भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं। सभी धातु यौगिक खनिज हैं।
अयस्क (Ore): वे खनिज जिनसे धातु का निष्कर्षण आसानी से और लाभदायक रूप से किया जा सकता है, अयस्क कहलाते हैं।
अंतर: सभी अयस्क खनिज हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं हैं। उदाहरण: एलुमिनियम के कई खनिज हैं (जैसे मिट्टी), लेकिन बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O) इसका प्रमुख अयस्क है।
प्रश्न 12: विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining) की प्रक्रिया समझाइए।▼
विद्युत अपघटनी शोधन का उपयोग अशुद्ध धातुओं को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। तांबे (Cu) के शोधन का उदाहरण:
- एनोड (Anode/+): अशुद्ध तांबे का मोटा टुकड़ा
- कैथोड (Cathode/-): शुद्ध तांबे की पतली पट्टी
- विद्युत अपघट्य (Electrolyte): कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का अम्लीय विलयन
प्रक्रिया: विद्युत धारा प्रवाहित करने पर — एनोड पर अशुद्ध तांबा घुलता है (Cu → Cu²⁺ + 2e⁻), कैथोड पर शुद्ध तांबा जमा होता है (Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu)। अघुलनशील अशुद्धियाँ (Ag, Au) एनोड पंक (Anode Mud) के रूप में नीचे बैठ जाती हैं।
प्रश्न 13: गैल्वेनीकरण (Galvanisation) क्या है? यह कैसे संक्षारण को रोकता है?▼
गैल्वेनीकरण (Galvanisation): लोहे या इस्पात की वस्तुओं पर जस्ते (Zinc) की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया।
संक्षारण रोकने की विधि:
- जस्ते की परत लोहे को वायु और नमी के सीधे संपर्क से बचाती है।
- भले ही जस्ते की परत कट जाए या टूट जाए, जस्ता अधिक क्रियाशील होने के कारण पहले स्वयं ऑक्सीकृत होता है और लोहे को सुरक्षित रखता है।
- इसे बलिदानी सुरक्षा (Sacrificial Protection) कहते हैं।
प्रश्न 14: थर्माइट अभिक्रिया (Thermite Reaction) क्या है? इसका उपयोग कहाँ किया जाता है?▼
थर्माइट अभिक्रिया: जब आयरन ऑक्साइड (Fe₂O₃) को एलुमिनियम (Al) पाउडर के साथ गर्म किया जाता है, तो अत्यधिक ऊष्मा निकलती है और गलित लोहा प्राप्त होता है:
Fe₂O₃(s) + 2Al(s) → Al₂O₃(s) + 2Fe(l) + ऊष्मा
इस अभिक्रिया में इतनी अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है कि लोहा गलित अवस्था में प्राप्त होता है। इसका उपयोग रेल की पटरियों की वेल्डिंग (welding of railway tracks) और टूटी हुई मशीनों की मरम्मत में किया जाता है।
प्रश्न 15: आपने ताम्बे के बर्तन पर हरी परत देखी होगी। यह हरी परत किसकी है और कैसे बनती है?▼
ताँबे के बर्तन पर हरी परत कॉपर कार्बोनेट [CuCO₃·Cu(OH)₂] की होती है, जिसे बेसिक कॉपर कार्बोनेट भी कहते हैं।
निर्माण: जब ताँबा (Cu) लंबे समय तक वायु में उपस्थित नमी (H₂O), ऑक्सीजन (O₂) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के संपर्क में रहता है, तो यह हरी परत बनती है:
2Cu + H₂O + CO₂ + O₂ → CuCO₃·Cu(OH)₂
यह संक्षारण (Corrosion) का एक उदाहरण है।
प्रश्न 16: कारण बताइए — (a) प्लैटिनम, सोना और चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है। (b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम को तेल में रखा जाता है।▼
(a) प्लैटिनम, सोना और चाँदी का आभूषणों में उपयोग:
- ये धातुएँ अत्यंत कम क्रियाशील हैं — वायु, जल या अम्ल से आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं।
- इनमें सुंदर धात्विक चमक (lustre) होती है जो लंबे समय तक बनी रहती है।
- ये आघातवर्ध्य और तन्य हैं — आसानी से आभूषणों के रूप में ढाली जा सकती हैं।
(b) सोडियम, पोटैशियम और लीथियम को तेल में रखना:
- ये धातुएँ अत्यंत क्रियाशील हैं — खुली हवा में रखने पर तुरंत ऑक्सीजन और नमी से अभिक्रिया करती हैं।
- जल से इनकी अभिक्रिया अत्यंत तीव्र और ज्वलनशील होती है।
- तेल (केरोसिन) में डुबोकर रखने से ये वायु और नमी से सुरक्षित रहती हैं।
प्रश्न 17: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते लेकिन जलीय विलयन में करते हैं। कारण बताइए।▼
ठोस अवस्था में: आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन एक निश्चित स्थान पर दृढ़ता से जकड़े (fixed) होते हैं। ये आयन गतिशील नहीं होते, इसलिए विद्युत धारा का प्रवाह संभव नहीं है।
जलीय विलयन/गलित अवस्था में: जल में घोलने या गलाने पर आयनिक बंध टूट जाते हैं और आयन मुक्त हो जाते हैं। ये मुक्त आयन गतिशील होते हैं और विद्युत धारा का वहन कर सकते हैं। इसलिए आयनिक यौगिक विलयन या गलित अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं।
प्रश्न 18: खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर टिन (Sn) का लेप होता है, जस्ते (Zn) का नहीं। क्यों?▼
टिन (Sn) जस्ते (Zn) की तुलना में कम क्रियाशील और कम विषैला (less toxic) है। टिन खाद्य पदार्थों के अम्लों (food acids) से आसानी से अभिक्रिया नहीं करता, जबकि जस्ता अधिक क्रियाशील होने के कारण खाद्य पदार्थों से अभिक्रिया कर सकता है और विषैले जिंक यौगिक बना सकता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसलिए खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर टिन का लेप किया जाता है।
🎯 प्रश्न बैंक — Question Bank
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में रहने वाली धातु कौन-सी है?
- A) सोडियम (Na)
- B) पारा (Hg)
- C) ब्रोमीन (Br)
- D) गैलियम (Ga)
✅ सही उत्तर: B) पारा (Hg) — पारा एकमात्र धातु है जो कमरे के ताप (25°C) पर द्रव अवस्था में रहती है। ब्रोमीन अधातु है।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxide) है?
- A) Na₂O
- B) MgO
- C) Al₂O₃
- D) CaO
✅ सही उत्तर: C) Al₂O₃ — एलुमिनियम ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करता है, इसलिए यह उभयधर्मी ऑक्साइड है।
3. क्रियाशीलता श्रेणी में सबसे अधिक क्रियाशील धातु कौन-सी है?
- A) पोटैशियम (K)
- B) सोडियम (Na)
- C) कैल्शियम (Ca)
- D) मैग्नीशियम (Mg)
✅ सही उत्तर: A) पोटैशियम (K) — क्रियाशीलता श्रेणी में K सबसे ऊपर है: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe...
4. सल्फाइड अयस्क को वायु में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- A) निस्तापन (Calcination)
- B) विद्युत अपघटन (Electrolysis)
- C) प्रगलन (Smelting)
- D) भर्जन (Roasting)
✅ सही उत्तर: D) भर्जन (Roasting) — सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करना भर्जन कहलाता है। जैसे: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂
5. पीतल (Brass) किन धातुओं की मिश्रधातु है?
- A) तांबा और टिन (Cu + Sn)
- B) तांबा और जस्ता (Cu + Zn)
- C) लोहा और क्रोमियम (Fe + Cr)
- D) सीसा और टिन (Pb + Sn)
✅ सही उत्तर: B) तांबा और जस्ता (Cu + Zn) — पीतल (Brass) तांबे (Cu) और जस्ते (Zn) की मिश्रधातु है। Cu + Sn = कांसा (Bronze)।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
1. धातुओं और अधातुओं के बीच तीन भौतिक गुणों का अंतर बताइए।▼
(i) चालकता: धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं, जबकि अधातुएँ कुचालक होती हैं (अपवाद: ग्रेफाइट)।
(ii) आघातवर्धनीयता: धातुएँ आघातवर्ध्य (malleable) होती हैं — चादर बनाई जा सकती है; अधातुएँ भंगुर (brittle) होती हैं — टूट जाती हैं।
(iii) चमक: धातुओं में धात्विक चमक (lustre) होती है; अधातुएँ सामान्यतः चमकहीन होती हैं (अपवाद: आयोडीन)।
2. NaCl (सोडियम क्लोराइड) के निर्माण में इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण की प्रक्रिया समझाइए।▼
सोडियम (Na) की परमाणु संख्या 11 है — इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 1। सोडियम अपने बाहरी कोश का 1 इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na⁺ धनायन बनता है:
Na → Na⁺ + e⁻ (विन्यास: 2, 8)
क्लोरीन (Cl) की परमाणु संख्या 17 है — इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 7। क्लोरीन 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ ऋणायन बनता है:
Cl + e⁻ → Cl⁻ (विन्यास: 2, 8, 8)
Na⁺ और Cl⁻ के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic attraction) से आयनिक बंध बनता है और NaCl बनता है।
3. क्रियाशीलता श्रेणी का उपयोग करके बताइए कि Fe, CuSO₄ विलयन से Cu को क्यों विस्थापित कर सकता है लेकिन Cu, FeSO₄ से Fe को विस्थापित नहीं कर सकता?▼
क्रियाशीलता श्रेणी में लोहा (Fe) तांबे (Cu) से ऊपर है, अर्थात् Fe अधिक क्रियाशील है। अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है:
Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s) ✓ (अभिक्रिया होगी)
लेकिन Cu, Fe से कम क्रियाशील है, इसलिए Cu, Fe को विस्थापित नहीं कर सकता:
Cu(s) + FeSO₄(aq) → कोई अभिक्रिया नहीं ✗
नियम: अधिक क्रियाशील धातु ही कम क्रियाशील धातु को विस्थापित कर सकती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
1. धातुओं के रासायनिक गुणों को उदाहरण सहित विस्तार से समझाइए — ऑक्सीजन, जल, अम्ल तथा अन्य धातुओं के लवण विलयन से अभिक्रियाएँ।▼
1. ऑक्सीजन से अभिक्रिया: धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
- 4Na + O₂ → 2Na₂O (क्षारकीय ऑक्साइड)
- 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ (उभयधर्मी ऑक्साइड)
- 2Cu + O₂ → 2CuO (क्षारकीय ऑक्साइड)
Na, K तीव्रता से, Cu धीमी गति से, Au, Pt ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं करते।
2. जल से अभिक्रिया:
- 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ (ठंडे जल से तीव्र)
- Ca + 2H₂O → Ca(OH)₂ + H₂↑ (ठंडे जल से धीमी)
- 3Fe + 4H₂O(steam) → Fe₃O₄ + 4H₂↑ (भाप से)
- Cu, Ag, Au — जल से कोई अभिक्रिया नहीं।
3. तनु अम्ल से अभिक्रिया: धातु + तनु अम्ल → लवण + H₂↑
- Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
- 2Al + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂↑
- Cu, Ag — तनु HCl/H₂SO₄ से अभिक्रिया नहीं करते (H से नीचे)।
4. लवण विलयन से अभिक्रिया: अधिक क्रियाशील धातु, कम क्रियाशील को विस्थापित करती है।
- Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu (नीला → हरा)
- Cu + 2AgNO₃ → Cu(NO₃)₂ + 2Ag
2. धातुओं के निष्कर्षण की विभिन्न विधियों को सक्रियता श्रेणी के आधार पर विस्तार से समझाइए। भर्जन, निस्तापन, अपचयन और विद्युत अपघटनी शोधन की प्रक्रियाएँ लिखिए।▼
धातुओं का निष्कर्षण उनकी सक्रियता (Reactivity) पर निर्भर करता है:
1. अत्यधिक सक्रिय धातुएँ (K, Na, Ca, Mg, Al):
- ये कार्बन द्वारा अपचयित नहीं हो सकतीं क्योंकि ये कार्बन से भी अधिक सक्रिय हैं।
- विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction) द्वारा गलित अयस्क का विद्युत अपघटन किया जाता है।
- उदाहरण: NaCl (गलित) → Na + Cl₂ (विद्युत अपघटन)
2. मध्यम सक्रिय धातुएँ (Zn, Fe, Pb, Cu):
- भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्क → ऑक्साइड। 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂
- निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्क → ऑक्साइड। ZnCO₃ → ZnO + CO₂
- कार्बन द्वारा अपचयन: ZnO + C → Zn + CO; Fe₂O₃ + 3C → 2Fe + 3CO
3. कम सक्रिय धातुएँ (Cu, Ag, Au, Pt):
- ये प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था (Free state) में पाई जाती हैं।
- Cu₂S को केवल वायु में गर्म करके Cu प्राप्त किया जा सकता है: 2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂; 2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂ (स्वत: अपचयन)
4. विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining):
- एनोड: अशुद्ध धातु, कैथोड: शुद्ध धातु, विद्युत अपघट्य: धातु लवण का विलयन।
- एनोड पर अशुद्ध धातु घुलती है, कैथोड पर शुद्ध धातु जमती है।
- अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड पंक (Anode Mud) में बैठती हैं।