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अध्याय 9 · भौतिक विज्ञान

प्रकाश — परावर्तन तथा अपवर्तन

Light — Reflection and Refraction

1. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)

जब प्रकाश किरण किसी चिकनी सतह से टकराकर वापस लौटती है तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) कहते हैं।

परावर्तन के नियम (Laws of Reflection):

  • प्रथम नियम: आपतित किरण (incident ray), परावर्तित किरण (reflected ray) और अभिलम्ब (normal) — तीनों एक ही तल में होते हैं।
  • द्वितीय नियम: आपतन कोण (angle of incidence, ∠i) सदैव परावर्तन कोण (angle of reflection, ∠r) के बराबर होता है। अर्थात् ∠i = ∠r

परावर्तन के प्रकार:

2. गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)

गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं:

गोलीय दर्पण से संबंधित महत्वपूर्ण पद:

  • ध्रुव (Pole, P): दर्पण की परावर्तक सतह का मध्य बिंदु
  • वक्रता केंद्र (Centre of Curvature, C): उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण एक भाग है
  • वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature, R): गोले की त्रिज्या
  • मुख्य अक्ष (Principal Axis): ध्रुव P और वक्रता केंद्र C से गुजरने वाली रेखा
  • फोकस (Focus, F): मुख्य अक्ष के समानांतर किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं (अवतल) या जिस बिंदु से आती प्रतीत होती हैं (उत्तल)
  • फोकस दूरी (Focal Length, f): ध्रुव P से फोकस F की दूरी
  • संबंध: R = 2f (वक्रता त्रिज्या = 2 × फोकस दूरी)

अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण (6 स्थितियाँ):

  • वस्तु अनंत पर: प्रतिबिम्ब F पर, अत्यंत छोटा, वास्तविक, उल्टा
  • वस्तु C से परे: प्रतिबिम्ब F और C के बीच, छोटा, वास्तविक, उल्टा
  • वस्तु C पर: प्रतिबिम्ब C पर, समान आकार, वास्तविक, उल्टा
  • वस्तु C और F के बीच: प्रतिबिम्ब C से परे, बड़ा, वास्तविक, उल्टा
  • वस्तु F पर: प्रतिबिम्ब अनंत पर, अत्यंत बड़ा, वास्तविक, उल्टा
  • वस्तु P और F के बीच: प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे, बड़ा, आभासी, सीधा

उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब:

उत्तल दर्पण सदैव आभासी (virtual), सीधा (erect) और छोटा (diminished) प्रतिबिम्ब बनाता है, चाहे वस्तु किसी भी स्थिति पर हो। प्रतिबिम्ब सदैव P और F के बीच बनता है।

दर्पण सूत्र एवं आवर्धन (Mirror Formula & Magnification):

  • दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f
  • जहाँ v = प्रतिबिम्ब दूरी, u = वस्तु दूरी, f = फोकस दूरी
  • आवर्धन: m = −v/u = h'/h
  • जहाँ h' = प्रतिबिम्ब की ऊँचाई, h = वस्तु की ऊँचाई
  • m धनात्मक → सीधा प्रतिबिम्ब; m ऋणात्मक → उल्टा प्रतिबिम्ब

नई कार्तीय चिह्न परिपाटी (New Cartesian Sign Convention):

  • सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव (P) से मापी जाती हैं
  • मुख्य अक्ष के अनुदिश आपतित प्रकाश की दिशा को धनात्मक (+) लिया जाता है
  • आपतित प्रकाश के विपरीत दिशा = ऋणात्मक (−)
  • मुख्य अक्ष के ऊपर = +, नीचे = −
  • अवतल दर्पण: u = −, f = −, v = − (वास्तविक) या + (आभासी)
  • उत्तल दर्पण: u = −, f = +, v = + (सदैव)

गोलीय दर्पणों के उपयोग:

3. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)

जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाता है तो उसकी दिशा बदल जाती है। इस घटना को अपवर्तन (Refraction) कहते हैं। यह प्रकाश की चाल में परिवर्तन के कारण होता है।

अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction):

  • प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।
  • द्वितीय नियम (स्नेल का नियम / Snell's Law): n₁ sin i = n₂ sin r
  • अर्थात् sin i / sin r = n₂₁ = स्थिरांक (दिए गए माध्यमों के युग्म के लिए)

अपवर्तनांक (Refractive Index):

काँच के स्लैब से अपवर्तन:

जब प्रकाश किरण काँच के स्लैब (glass slab) से गुजरती है तो निर्गत किरण (emergent ray) आपतित किरण (incident ray) के समानांतर होती है, परंतु पार्श्व विस्थापन (lateral displacement) होता है।

4. लेंस (Lenses)

लेंस दो प्रकार के होते हैं:

प्रतिबिम्ब बनाने के नियम (3 किरणें):

  • किरण 1: मुख्य अक्ष के समानांतर किरण — अपवर्तन के बाद फोकस F से गुजरती है (उत्तल) / फोकस F से अपसरित होती प्रतीत होती है (अवतल)
  • किरण 2: प्रकाशिक केंद्र (O) से गुजरने वाली किरण — बिना विचलन के सीधी निकल जाती है
  • किरण 3: फोकस F से गुजरने वाली किरण — अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है

लेंस सूत्र एवं आवर्धन (Lens Formula & Magnification):

  • लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f
  • आवर्धन: m = v/u = h'/h
  • लेंस की क्षमता (Power): P = 1/f (f मीटर में)
  • P का मात्रक: डाइऑप्टर (Dioptre, D)
  • उत्तल लेंस: P = +ve, अवतल लेंस: P = −ve
  • संयुक्त लेंसों की क्षमता: P = P₁ + P₂ + P₃ + ...

संख्यात्मक उदाहरण:

उदाहरण: एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 15 cm है। वस्तु दर्पण से 30 cm दूर रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है: f = −15 cm, u = −30 cm (चिह्न परिपाटी अनुसार)

दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f

1/v + 1/(−30) = 1/(−15)

1/v = −1/15 + 1/30 = (−2 + 1)/30 = −1/30

v = −30 cm

प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने 30 cm दूरी पर बनता है (C पर), वास्तविक और उल्टा।

आवर्धन m = −v/u = −(−30)/(−30) = −1 (समान आकार, उल्टा)

⚡ सभी सूत्र एवं मुख्य बिंदु — Key Points & Formulas

सूत्र सारणी (Formula Table)

सूत्रविवरणमात्रक
R = 2fवक्रता त्रिज्या = 2 × फोकस दूरीcm / m
1/v + 1/u = 1/fदर्पण सूत्र (Mirror Formula)cm / m
m = −v/u = h'/hदर्पण का आवर्धन (Magnification)इकाई रहित
n = c/vनिरपेक्ष अपवर्तनांकइकाई रहित
n₁ sin i = n₂ sin rस्नेल का नियम (Snell's Law)
1/v − 1/u = 1/fलेंस सूत्र (Lens Formula)cm / m
m = v/u = h'/hलेंस का आवर्धनइकाई रहित
P = 1/fलेंस की क्षमता (f मीटर में)डाइऑप्टर (D)
P = P₁ + P₂संयुक्त लेंसों की क्षमताD

चिह्न परिपाटी (Sign Convention) — नियम

  • सभी दूरियाँ ध्रुव/प्रकाशिक केंद्र से मापी जाती हैं
  • आपतित प्रकाश की दिशा में = + (धनात्मक)
  • विपरीत दिशा में = − (ऋणात्मक)
  • वस्तु सदैव दर्पण/लेंस के बायीं ओर रखी जाती है → u = − (सदैव)
  • अवतल दर्पण/उत्तल लेंस: f = −/+
  • उत्तल दर्पण/अवतल लेंस: f = +/−

दर्पण vs लेंस — तुलना

गुणदर्पण (Mirror)लेंस (Lens)
सिद्धांतपरावर्तन (Reflection)अपवर्तन (Refraction)
सूत्र1/v + 1/u = 1/f1/v − 1/u = 1/f
आवर्धनm = −v/um = v/u
अभिसारीअवतल (Concave)उत्तल (Convex)
अपसारीउत्तल (Convex)अवतल (Concave)
क्षमता (Power)लागू नहींP = 1/f (D)

अवतल दर्पण — प्रतिबिम्ब सारणी

वस्तु की स्थितिप्रतिबिम्ब की स्थितिआकारप्रकृति
अनंत परF परअत्यंत छोटावास्तविक, उल्टा
C से परेF और C के बीचछोटावास्तविक, उल्टा
C परC परसमानवास्तविक, उल्टा
F और C के बीचC से परेबड़ावास्तविक, उल्टा
F परअनंत परअत्यंत बड़ावास्तविक, उल्टा
P और F के बीचदर्पण के पीछेबड़ाआभासी, सीधा

याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • उत्तल दर्पण का प्रतिबिम्ब सदैव — आभासी, सीधा, छोटा
  • अवतल लेंस का प्रतिबिम्ब सदैव — आभासी, सीधा, छोटा
  • काँच का अपवर्तनांक (n) = 1.5, जल का n = 1.33, हीरे का n = 2.42
  • प्रकाश की चाल निर्वात में = 3 × 10⁸ m/s
  • 1 D = 1 m⁻¹ (1 डाइऑप्टर = 1 मीटर⁻¹ फोकस दूरी वाले लेंस की क्षमता)

📖 NCERT प्रश्न-उत्तर — Solutions

पाठ्यपुस्तक प्रश्न (Textbook Questions)

प्रश्न 1: अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।

मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें अवतल दर्पण से परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं, उसे मुख्य फोकस (Principal Focus, F) कहते हैं। अवतल दर्पण का फोकस वास्तविक होता है और दर्पण के सामने स्थित होता है।

प्रश्न 2: एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?

हल: R = 20 cm

f = R/2 = 20/2 = 10 cm

प्रश्न 3: उस दर्पण का नाम बताइए जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।

अवतल दर्पण (Concave Mirror) — जब वस्तु को ध्रुव P और फोकस F के बीच रखा जाए तो सीधा और आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिम्ब बनता है। यह प्रतिबिम्ब आभासी होता है।

प्रश्न 4: हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?

उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण (rear-view mirror) के रूप में वरीयता दी जाती है क्योंकि:

  • यह सदैव सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है
  • इसका दृष्टि क्षेत्र (field of view) बहुत विस्तृत होता है जिससे चालक को पीछे का बड़ा क्षेत्र दिखाई देता है
प्रश्न 5: उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।

हल: R = 32 cm

f = R/2 = 32/2 = +16 cm

(उत्तल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक होती है)

प्रश्न 6: कोई अवतल दर्पण अपने सामने 10 cm दूरी पर रखे किसी बिम्ब का तीन गुणा आवर्धित वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। प्रतिबिम्ब दर्पण से कितनी दूरी पर है?

हल: u = −10 cm, m = −3 (वास्तविक और उल्टा, इसलिए ऋणात्मक)

m = −v/u

−3 = −v/(−10)

−3 = v/10

v = −30 cm

प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने 30 cm की दूरी पर बनता है।

प्रश्न 7: प्रकाश के अपवर्तन के नियम लिखिए।

प्रकाश के अपवर्तन के दो नियम हैं:

  • प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलम्ब — तीनों एक ही तल में होते हैं।
  • द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): किन्हीं दो माध्यमों के युग्म के लिए, आपतन कोण की ज्या (sin i) और अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात स्थिर रहता है। अर्थात् n₁ sin i = n₂ sin r
प्रश्न 8: हीरा का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?

इसका अर्थ है कि निर्वात (या वायु) में प्रकाश की चाल और हीरे में प्रकाश की चाल का अनुपात 2.42 है।

n = c/v = 2.42

अर्थात् हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात में प्रकाश की चाल की 1/2.42 गुणा (लगभग 1.24 × 10⁸ m/s) है। हीरे में प्रकाश बहुत धीमी गति से चलता है, इसीलिए हीरे का अपवर्तनांक बहुत अधिक है।

प्रश्न 9: लेंस की क्षमता (Power) की परिभाषा एवं मात्रक लिखिए।

लेंस की क्षमता (Power of Lens): लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की मात्रा को लेंस की क्षमता कहते हैं।

सूत्र: P = 1/f (जहाँ f मीटर में है)

मात्रक: डाइऑप्टर (Dioptre, D)

1 D = 1 m⁻¹

उत्तल लेंस: P = +ve, अवतल लेंस: P = −ve

प्रश्न 10: कोई डॉक्टर +1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। यह किस प्रकार का लेंस है?

हल: P = +1.5 D

f = 1/P = 1/1.5 = +0.667 m = +66.7 cm

चूँकि P धनात्मक है, यह उत्तल लेंस (Convex Lens) है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति को दूरदृष्टि दोष (Hypermetropia) है।

प्रश्न 11: एक 2 cm ऊँची वस्तु को 15 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस से 20 cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, आकार और प्रकृति ज्ञात कीजिए।

हल: h = 2 cm, f = +15 cm, u = −20 cm

लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f

1/v − 1/(−20) = 1/15

1/v + 1/20 = 1/15

1/v = 1/15 − 1/20 = (4 − 3)/60 = 1/60

v = +60 cm (लेंस के दूसरी ओर)

m = v/u = 60/(−20) = −3

h' = m × h = −3 × 2 = −6 cm

प्रतिबिम्ब: लेंस से 60 cm दूरी पर, 6 cm ऊँचा, वास्तविक और उल्टा, 3 गुणा आवर्धित।

प्रश्न 12: 15 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिम्ब का सीधा प्रतिबिम्ब बनाना चाहते हैं। बिम्ब को दर्पण से कितनी दूरी पर रखना चाहिए? प्रतिबिम्ब किस प्रकार का होगा?

अवतल दर्पण से सीधा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु को ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच अर्थात् 15 cm से कम दूरी पर रखना होगा।

प्रतिबिम्ब आभासी (virtual), सीधा (erect) और आवर्धित (magnified) होगा। यह दर्पण के पीछे बनेगा।

प्रश्न 13: 20 cm फोकस दूरी के अवतल लेंस से 5 cm ऊँची वस्तु की दूरी 30 cm है। लेंस द्वारा बनाए गए प्रतिबिम्ब की स्थिति, आकार और प्रकृति ज्ञात कीजिए।

हल: h = 5 cm, f = −20 cm, u = −30 cm

1/v − 1/u = 1/f

1/v − 1/(−30) = 1/(−20)

1/v + 1/30 = −1/20

1/v = −1/20 − 1/30 = (−3 − 2)/60 = −5/60 = −1/12

v = −12 cm (लेंस के उसी ओर जहाँ वस्तु है)

m = v/u = (−12)/(−30) = +0.4

h' = m × h = 0.4 × 5 = +2 cm

प्रतिबिम्ब: लेंस से 12 cm उसी ओर, 2 cm ऊँचा, आभासी, सीधा और छोटा

प्रश्न 14: दो लेंसों की क्षमता +3.5 D और −2 D है। इनके संयोजन की क्षमता और फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।

हल: P₁ = +3.5 D, P₂ = −2 D

P = P₁ + P₂ = 3.5 + (−2) = +1.5 D

f = 1/P = 1/1.5 = +0.667 m = +66.7 cm

संयोजन एक उत्तल लेंस (अभिसारी) की भाँति व्यवहार करता है।

प्रश्न 15: प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? (c = 3 × 10⁸ m/s)

हल: n = 1.50, c = 3 × 10⁸ m/s

n = c/v

v = c/n = (3 × 10⁸)/1.50 = 2 × 10⁸ m/s

काँच में प्रकाश की चाल 2 × 10⁸ m/s है।

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बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 10 cm है। उसकी वक्रता त्रिज्या होगी:
  • A) 5 cm
  • B) 10 cm
  • C) 20 cm
  • D) 40 cm
✅ सही उत्तर: C) 20 cm — R = 2f = 2 × 10 = 20 cm
2. उत्तल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब सदैव होता है:
  • A) वास्तविक और उल्टा
  • B) आभासी, सीधा और छोटा
  • C) आभासी, सीधा और बड़ा
  • D) वास्तविक और बड़ा
✅ सही उत्तर: B) आभासी, सीधा और छोटा — उत्तल दर्पण सदैव P और F के बीच आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है।
3. एक लेंस की फोकस दूरी +50 cm है। लेंस की क्षमता होगी:
  • A) +5 D
  • B) −2 D
  • C) +0.5 D
  • D) +2 D
✅ सही उत्तर: D) +2 D — P = 1/f = 1/0.50 m = +2 D (f को मीटर में बदलें: 50 cm = 0.50 m)
4. स्नेल के नियम (Snell's Law) के अनुसार:
  • A) n₁ sin i = n₂ sin r
  • B) n₁ cos i = n₂ cos r
  • C) n₁ sin i = n₂ cos r
  • D) n₁ / sin i = n₂ / sin r
✅ सही उत्तर: A) n₁ sin i = n₂ sin r — यह स्नेल का नियम है जो अपवर्तन के द्वितीय नियम को व्यक्त करता है।
5. 15 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण से 30 cm दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?
  • A) 10 cm पर
  • B) 15 cm पर
  • C) 30 cm पर
  • D) अनंत पर
✅ सही उत्तर: C) 30 cm पर — 1/v + 1/(−30) = 1/(−15); 1/v = −1/15 + 1/30 = −1/30; v = −30 cm। वस्तु C पर है, प्रतिबिम्ब भी C पर बनता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)

1. नई कार्तीय चिह्न परिपाटी (New Cartesian Sign Convention) के तीन नियम लिखिए।

(i) सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव (P) से मापी जाती हैं।

(ii) आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक (+) और विपरीत दिशा में ऋणात्मक (−) होती हैं।

(iii) मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाइयाँ धनात्मक और नीचे की ऊँचाइयाँ ऋणात्मक होती हैं।

2. अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण के दो-दो उपयोग लिखिए।

अवतल दर्पण: (i) शेविंग/श्रृंगार दर्पण (ii) वाहनों की हेडलाइट में परावर्तक के रूप में (iii) सोलर फर्नेस (iv) दंत चिकित्सक का दर्पण

उत्तल दर्पण: (i) वाहनों का पश्च-दृश्य दर्पण (rear-view mirror) (ii) सड़क के मोड़ पर लगे दर्पण — इसका दृष्टि क्षेत्र विस्तृत होता है।

3. काँच के स्लैब से अपवर्तन में निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर क्यों होती है?

काँच के स्लैब की दोनों सतहें समानांतर हैं। जब प्रकाश किरण पहली सतह से अंदर प्रवेश करती है तो अभिलम्ब की ओर मुड़ती है (विरल → सघन)। जब वही किरण दूसरी सतह से बाहर निकलती है तो अभिलम्ब से दूर उतने ही कोण पर मुड़ती है (सघन → विरल)। चूँकि दोनों सतहें समानांतर हैं, इसलिए निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर होती है, बस पार्श्व विस्थापन (lateral displacement) होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)

1. अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण की विभिन्न स्थितियों का वर्णन कीजिए। रे डायग्राम की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

अवतल दर्पण द्वारा वस्तु की 6 विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब बनता है:

(i) वस्तु अनंत पर: समानांतर किरणें F पर मिलती हैं। प्रतिबिम्ब F पर, अत्यंत छोटा, बिंदु आकार, वास्तविक और उल्टा।

(ii) वस्तु C से परे: प्रतिबिम्ब F और C के बीच, छोटा, वास्तविक और उल्टा।

(iii) वस्तु C पर: प्रतिबिम्ब C पर ही, समान आकार, वास्तविक और उल्टा।

(iv) वस्तु F और C के बीच: प्रतिबिम्ब C से परे, बड़ा (आवर्धित), वास्तविक और उल्टा।

(v) वस्तु F पर: परावर्तित किरणें समानांतर हो जाती हैं, प्रतिबिम्ब अनंत पर, अत्यंत बड़ा, वास्तविक और उल्टा।

(vi) वस्तु P और F के बीच: प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे, बड़ा, आभासी और सीधा। यही एकमात्र स्थिति है जहाँ अवतल दर्पण आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है।

निष्कर्ष: जैसे-जैसे वस्तु अनंत से ध्रुव की ओर आती है, प्रतिबिम्ब का आकार बढ़ता जाता है और F पर अनंत हो जाता है।

2. उत्तल लेंस और अवतल लेंस में अंतर बताते हुए, लेंस की क्षमता (Power) की अवधारणा समझाइए। एक संख्यात्मक उदाहरण भी दीजिए।

उत्तल लेंस (Convex Lens): बीच में मोटा, किनारों पर पतला। यह अभिसारी लेंस है — समानांतर किरणों को फोकस बिंदु पर केंद्रित करता है। फोकस दूरी और क्षमता दोनों धनात्मक होते हैं। वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिम्ब बना सकता है।

अवतल लेंस (Concave Lens): बीच में पतला, किनारों पर मोटा। यह अपसारी लेंस है — समानांतर किरणों को फैलाता है। फोकस दूरी और क्षमता दोनों ऋणात्मक होते हैं। सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है।

लेंस की क्षमता (Power): किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को मोड़ने (अभिसरण/अपसरण) की मात्रा को लेंस की क्षमता कहते हैं। P = 1/f (f मीटर में), मात्रक = डाइऑप्टर (D)

उदाहरण: दो लेंस जिनकी क्षमता +4 D और −1.5 D है, सटे हुए रखे हैं। संयोजन की कुल क्षमता = +4 + (−1.5) = +2.5 D; फोकस दूरी = 1/2.5 = 0.4 m = 40 cm

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