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अध्याय 10 · भौतिक विज्ञान

मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

The Human Eye and the Colourful World

1. मानव नेत्र (The Human Eye)

मानव नेत्र एक अत्यंत मूल्यवान एवं सुग्राही (sensitive) ज्ञानेन्द्रिय है। यह एक प्राकृतिक उत्तल लेंस की भाँति कार्य करता है और हमें रंगबिरंगे संसार को देखने में सक्षम बनाता है।

नेत्र की संरचना (Structure of Eye):

  • कॉर्निया (Cornea): नेत्र की सबसे बाहरी पारदर्शी परत। अधिकांश अपवर्तन यहीं होता है।
  • परितारिका / आइरिस (Iris): रंगीन पर्दा जो पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।
  • पुतली (Pupil): आइरिस का केंद्रीय छिद्र — प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करता है। तेज प्रकाश में सिकुड़ती है, अंधेरे में फैलती है।
  • नेत्र लेंस (Eye Lens): रेशेदार जेली जैसी संरचना — सिलियरी पेशियों द्वारा फोकस दूरी बदल सकता है।
  • दृष्टिपटल / रेटिना (Retina): नेत्र की भीतरी परत — प्रकाश संवेदी कोशिकाएँ (शलाका/rods और शंकु/cones) यहाँ होती हैं। प्रतिबिम्ब यहीं बनता है।
  • दृक् तंत्रिका (Optic Nerve): विद्युत संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती है।

समंजन क्षमता (Power of Accommodation):

नेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को स्वयं समायोजित (adjust) कर सकता है, समंजन क्षमता कहलाती है। सिलियरी पेशियाँ (ciliary muscles) लेंस की मोटाई बदलकर फोकस दूरी को कम या अधिक करती हैं।

2. दृष्टि दोष एवं उनका संशोधन (Defects of Vision)

(i) निकट-दृष्टि दोष / मायोपिया (Myopia / Near-sightedness):

  • समस्या: दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं, निकट की दिखती हैं
  • कारण: नेत्र गोलक लंबा हो जाता है या लेंस अधिक मोटा हो जाता है
  • प्रतिबिम्ब: रेटिना के सामने बनता है
  • संशोधन: अवतल लेंस (Concave Lens) — उचित क्षमता का

(ii) दूर-दृष्टि दोष / हाइपरमेट्रोपिया (Hypermetropia / Far-sightedness):

  • समस्या: निकट की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं, दूर की दिखती हैं
  • कारण: नेत्र गोलक छोटा हो जाता है या लेंस अधिक पतला हो जाता है
  • प्रतिबिम्ब: रेटिना के पीछे बनता है
  • संशोधन: उत्तल लेंस (Convex Lens) — उचित क्षमता का

(iii) जरा-दूरदृष्टिता / प्रेस्बायोपिया (Presbyopia):

  • समस्या: निकट और दूर दोनों की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं
  • कारण: आयु बढ़ने के साथ सिलियरी पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, लेंस की समंजन क्षमता घट जाती है
  • संशोधन: द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lens) — ऊपरी भाग अवतल, निचला भाग उत्तल

3. प्रिज्म से अपवर्तन (Refraction through Prism)

प्रिज्म एक पारदर्शी पदार्थ (काँच) का त्रिभुजाकार टुकड़ा है। जब श्वेत प्रकाश प्रिज्म से गुजरता है तो वह अपने अवयवी रंगों में विभक्त हो जाता है।

4. विक्षेपण / वर्ण विक्षेपण (Dispersion of Light)

श्वेत प्रकाश (White Light) का अपने सात अवयवी रंगों में विभक्त होना वर्ण विक्षेपण कहलाता है।

VIBGYOR — वर्णक्रम (Spectrum):

  • V — बैंगनी (Violet) — सबसे अधिक विचलन, सबसे कम तरंगदैर्ध्य
  • I — जामुनी (Indigo)
  • B — नीला (Blue)
  • G — हरा (Green)
  • Y — पीला (Yellow)
  • O — नारंगी (Orange)
  • R — लाल (Red) — सबसे कम विचलन, सबसे अधिक तरंगदैर्ध्य

न्यूटन का प्रयोग (Newton's Experiment):

न्यूटन ने दो प्रिज्मों का प्रयोग किया। पहले प्रिज्म ने श्वेत प्रकाश को सात रंगों में विभक्त किया। दूसरा उल्टा प्रिज्म रखने पर सातों रंग पुनः मिलकर श्वेत प्रकाश बन गए। इससे सिद्ध हुआ कि श्वेत प्रकाश सात रंगों का मिश्रण है।

5. वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction)

तारों का टिमटिमाना (Twinkling of Stars):

तारे बहुत दूर होने के कारण प्रकाश के बिंदु स्रोत हैं। वायुमंडल की विभिन्न परतों का अपवर्तनांक लगातार बदलता रहता है (तापमान और घनत्व में भिन्नता के कारण)। इससे तारे से आने वाला प्रकाश लगातार अपवर्तित होता रहता है और तारा टिमटिमाता हुआ प्रतीत होता है।

अग्रिम सूर्योदय और विलंबित सूर्यास्त (Advanced Sunrise & Delayed Sunset):

वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य क्षितिज (horizon) से नीचे होते हुए भी दिखाई देता है। इससे सूर्योदय वास्तविक समय से लगभग 2 मिनट पहले और सूर्यास्त लगभग 2 मिनट बाद दिखाई देता है। अतः दिन की अवधि लगभग 4 मिनट बढ़ जाती है।

6. प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light)

टिण्डल प्रभाव (Tyndall Effect):

  • जब प्रकाश किरण कोलॉइडी कणों से गुजरती है तो प्रकाश प्रकीर्णित (scatter) होता है — इसे टिण्डल प्रभाव कहते हैं।
  • उदाहरण: जंगल में सूर्य की किरणें, धुएँ में टॉर्च की रोशनी

प्रकीर्णन की घटनाएँ:

⚡ मुख्य बिंदु एवं तुलना सारणियाँ

दृष्टि दोषों की तुलना

गुणनिकट-दृष्टि (Myopia)दूर-दृष्टि (Hypermetropia)जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia)
समस्यादूर नहीं दिखतानिकट नहीं दिखतादोनों नहीं दिखता
प्रतिबिम्बरेटिना के सामनेरेटिना के पीछेदोनों स्थिति
कारणगोलक लंबा / लेंस मोटागोलक छोटा / लेंस पतलासिलियरी पेशी कमजोर
संशोधनअवतल लेंस (−ve)उत्तल लेंस (+ve)द्विफोकसी लेंस

VIBGYOR — याद रखें

  • Violet → Indigo → Blue → Green → Yellow → Orange → Red
  • बैंगनी → जामुनी → नीला → हरा → पीला → नारंगी → लाल
  • विचलन: बैंगनी (सर्वाधिक) → लाल (न्यूनतम)
  • तरंगदैर्ध्य: बैंगनी (न्यूनतम, ~380 nm) → लाल (अधिकतम, ~700 nm)

मुख्य प्रकाशिक घटनाएँ — सारांश

घटनाकारणउदाहरण
वर्ण विक्षेपणविभिन्न रंगों का अपवर्तनांक भिन्नप्रिज्म से इंद्रधनुष
तारों का टिमटिमानावायुमंडलीय अपवर्तनरात में तारे
अग्रिम सूर्योदयवायुमंडलीय अपवर्तन2 मिनट पहले दिखना
आकाश का नीला रंगप्रकाश का प्रकीर्णनछोटी तरंगदैर्ध्य अधिक प्रकीर्णित
सूर्य का लाल रंगप्रकाश का प्रकीर्णनसूर्योदय/सूर्यास्त
टिण्डल प्रभावकोलॉइडी कणों से प्रकीर्णनजंगल में सूर्य किरणें

नेत्र के महत्वपूर्ण बिंदु

  • निकट बिंदु: 25 cm (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी)
  • दूर बिंदु: अनंत (∞)
  • नेत्र लेंस = उत्तल लेंस (Convex Lens)
  • रेटिना पर प्रतिबिम्ब = वास्तविक और उल्टा
  • मस्तिष्क प्रतिबिम्ब को सीधा समझता है
  • कॉर्निया पर सर्वाधिक अपवर्तन होता है

📖 NCERT प्रश्न-उत्तर — Solutions

प्रश्न 1: मानव नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है?

नेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके द्वारा वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर सकता है, समंजन क्षमता (Power of Accommodation) कहलाती है। जब हम दूर की वस्तु देखते हैं तो सिलियरी पेशियाँ शिथिल होती हैं और लेंस पतला हो जाता है (फोकस दूरी बढ़ती है)। निकट की वस्तु देखने पर पेशियाँ सिकुड़ती हैं और लेंस मोटा हो जाता है (फोकस दूरी घटती है)। इस प्रकार विभिन्न दूरियों की वस्तुओं का प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनता है।

प्रश्न 2: निकट-दृष्टि दोष (Myopia) किसे कहते हैं? इसे किस प्रकार संशोधित किया जाता है?

निकट-दृष्टि दोष (Myopia): इस दोष से पीड़ित व्यक्ति निकट की वस्तुएँ तो स्पष्ट देख सकता है परंतु दूर की वस्तुएँ धुँधली दिखाई देती हैं।

कारण: (i) नेत्र गोलक लंबा हो जाना (ii) नेत्र लेंस अधिक मोटा हो जाना — इससे प्रतिबिम्ब रेटिना के सामने बनता है।

संशोधन: उचित क्षमता का अवतल लेंस (Concave Lens) उपयोग किया जाता है। यह अपसारी लेंस प्रतिबिम्ब को पीछे खिसकाकर रेटिना पर बनाता है।

प्रश्न 3: दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia) क्या है? इसका संशोधन कैसे होता है?

दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia): इस दोष से पीड़ित व्यक्ति दूर की वस्तुएँ स्पष्ट देख सकता है परंतु निकट की वस्तुएँ धुँधली दिखाई देती हैं। निकट बिंदु 25 cm से अधिक दूर हो जाता है।

कारण: (i) नेत्र गोलक छोटा हो जाना (ii) नेत्र लेंस बहुत पतला हो जाना — प्रतिबिम्ब रेटिना के पीछे बनता है।

संशोधन: उचित क्षमता का उत्तल लेंस (Convex Lens) उपयोग किया जाता है। यह अभिसारी लेंस प्रतिबिम्ब को आगे लाकर रेटिना पर बनाता है।

प्रश्न 4: प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण को समझाइए।

जब श्वेत प्रकाश की एक पतली किरण काँच के प्रिज्म पर आपतित होती है, तो यह अपने सात अवयवी रंगों (VIBGYOR) में विभक्त हो जाती है। इस घटना को वर्ण विक्षेपण (Dispersion) कहते हैं।

कारण: श्वेत प्रकाश विभिन्न तरंगदैर्ध्य के रंगों का मिश्रण है। प्रत्येक रंग का काँच में अपवर्तनांक भिन्न होता है — बैंगनी रंग का अपवर्तनांक सर्वाधिक और लाल का न्यूनतम। इसलिए बैंगनी रंग सबसे अधिक और लाल रंग सबसे कम विचलित होता है।

प्रिज्म से निकलने वाला रंगों का पट्ट वर्णक्रम (Spectrum) कहलाता है: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल (VIBGYOR)।

प्रश्न 5: इंद्रधनुष (Rainbow) कैसे बनता है?

इंद्रधनुष एक प्राकृतिक वर्णक्रम है। वर्षा के बाद वायुमंडल में लटकती जल की सूक्ष्म बूँदें प्रिज्म का कार्य करती हैं। सूर्य का श्वेत प्रकाश जल की बूँद में प्रवेश करते समय अपवर्तित होता है, बूँद की आंतरिक सतह से पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, और बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तित होकर सात रंगों में विभक्त हो जाता है। सूर्य की विपरीत दिशा में (पीठ की ओर सूर्य रखकर) देखने पर इंद्रधनुष दिखाई देता है।

प्रश्न 6: तारे क्यों टिमटिमाते हैं?

तारे पृथ्वी से बहुत दूर होने के कारण प्रकाश के बिंदु स्रोत (point source) हैं। तारों का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते समय विभिन्न घनत्व और तापमान वाली परतों से लगातार अपवर्तित होता रहता है। वायुमंडलीय स्थितियाँ सतत बदलती रहती हैं, इसलिए तारे का आभासी स्थान भी बदलता रहता है और हमारी आँखों में पहुँचने वाले प्रकाश की मात्रा भी घटती-बढ़ती रहती है। इसी कारण तारे टिमटिमाते हुए प्रतीत होते हैं।

ग्रह नहीं टिमटिमाते क्योंकि वे पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट हैं और प्रकाश के विस्तृत स्रोत (extended source) हैं।

प्रश्न 7: आकाश का रंग नीला क्यों प्रतीत होता है?

वायुमंडल में अत्यंत सूक्ष्म कण (अणु, धूल कण) होते हैं। जब सूर्य का श्वेत प्रकाश इन कणों से टकराता है तो छोटी तरंगदैर्ध्य (नीला, बैंगनी) का प्रकाश अधिक प्रकीर्णित होता है (रेले प्रकीर्णन — प्रकीर्णन तरंगदैर्ध्य के चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होता है)। नीले रंग का प्रकीर्णन लाल रंग की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक होता है। इसलिए जब हम आकाश की ओर देखते हैं तो चारों ओर से प्रकीर्णित नीला प्रकाश हमारी आँखों में पहुँचता है और आकाश नीला दिखाई देता है।

प्रश्न 8: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों प्रतीत होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज के निकट होता है। इस स्थिति में सूर्य के प्रकाश को वायुमंडल में बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इस लंबी दूरी में छोटी तरंगदैर्ध्य वाले रंग (बैंगनी, नीला) पूरी तरह प्रकीर्णित हो जाते हैं और हमारी आँखों तक नहीं पहुँच पाते। केवल लाल रंग (बड़ी तरंगदैर्ध्य) जो कम प्रकीर्णित होता है, हमारी आँखों तक पहुँचता है। इसलिए सूर्य लाल प्रतीत होता है।

प्रश्न 9: खतरे के संकेत लाल रंग के क्यों बनाए जाते हैं?

लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक (~700 nm) होती है। अधिक तरंगदैर्ध्य के कारण लाल रंग का प्रकाश सबसे कम प्रकीर्णित होता है और सबसे दूर तक स्पष्ट दिखाई देता है — कोहरे, धुएँ या खराब मौसम में भी। इसीलिए खतरे के संकेत (traffic lights, stop signs) लाल रंग के बनाए जाते हैं।

प्रश्न 10: टिण्डल प्रभाव (Tyndall Effect) क्या है? उदाहरण दीजिए।

जब प्रकाश किरण कोलॉइडी विलयन (colloidal solution) या सूक्ष्म कणों वाले माध्यम से गुजरती है तो प्रकाश प्रकीर्णित (scatter) होता है और प्रकाश पुंज का मार्ग दिखाई देने लगता है। इसे टिण्डल प्रभाव कहते हैं।

उदाहरण:

  • जंगल में पेड़ों के बीच से सूर्य की किरणों का दिखना
  • अंधेरे कमरे में खिड़की से आने वाली प्रकाश किरण में धूल कणों का दिखना
  • सिनेमा हॉल में प्रोजेक्टर की किरण का दिखना

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बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. निकट-दृष्टि दोष (Myopia) को किस लेंस से संशोधित किया जाता है?
  • A) उत्तल लेंस (Convex Lens)
  • B) अवतल लेंस (Concave Lens)
  • C) द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lens)
  • D) बेलनाकार लेंस (Cylindrical Lens)
✅ सही उत्तर: B) अवतल लेंस — Myopia में प्रतिबिम्ब रेटिना के सामने बनता है, अवतल लेंस इसे पीछे रेटिना पर लाता है।
2. मानव नेत्र का निकट बिंदु (Near Point) कितना होता है?
  • A) 10 cm
  • B) 15 cm
  • C) 20 cm
  • D) 25 cm
✅ सही उत्तर: D) 25 cm — सामान्य नेत्र की स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 cm (D) होती है।
3. प्रिज्म से गुजरने पर सबसे अधिक विचलित होने वाला रंग है:
  • A) बैंगनी (Violet)
  • B) लाल (Red)
  • C) हरा (Green)
  • D) पीला (Yellow)
✅ सही उत्तर: A) बैंगनी — बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम और अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है, इसलिए यह सबसे अधिक विचलित होता है।
4. आकाश का नीला रंग किस घटना के कारण होता है?
  • A) अपवर्तन (Refraction)
  • B) परावर्तन (Reflection)
  • C) प्रकीर्णन (Scattering)
  • D) विक्षेपण (Dispersion)
✅ सही उत्तर: C) प्रकीर्णन — वायुमंडलीय कणों द्वारा नीले रंग (छोटी तरंगदैर्ध्य) का अधिक प्रकीर्णन होता है (रेले प्रकीर्णन)।
5. वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्योदय वास्तविक समय से कितना पहले दिखाई देता है?
  • A) लगभग 1 मिनट
  • B) लगभग 2 मिनट
  • C) लगभग 5 मिनट
  • D) लगभग 10 मिनट
✅ सही उत्तर: B) लगभग 2 मिनट — वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्योदय ~2 मिनट पहले और सूर्यास्त ~2 मिनट बाद दिखता है, दिन की अवधि ~4 मिनट बढ़ जाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)

1. प्रेस्बायोपिया (Presbyopia) क्या है? इसे कैसे संशोधित करते हैं?

प्रेस्बायोपिया (जरा-दूरदृष्टिता): यह आयु बढ़ने के साथ होने वाला दृष्टि दोष है। इसमें व्यक्ति निकट और दूर दोनों की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं देख पाता। कारण: सिलियरी पेशियों का कमजोर होना और नेत्र लेंस की लचीलापन (elasticity) कम होना। संशोधन: द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lens) का उपयोग — इसका ऊपरी भाग अवतल (दूर देखने) और निचला भाग उत्तल (निकट देखने) होता है।

2. न्यूटन के दो प्रिज्मों के प्रयोग से क्या सिद्ध हुआ?

न्यूटन ने पहले प्रिज्म से श्वेत प्रकाश को सात रंगों (VIBGYOR) में विभक्त किया। फिर दूसरा प्रिज्म उल्टा रखकर इन सातों रंगों को पुनः एक साथ मिलाया, जिससे श्वेत प्रकाश प्राप्त हुआ। इससे सिद्ध हुआ कि श्वेत प्रकाश सात रंगों (VIBGYOR) का मिश्रण है और प्रिज्म नए रंग उत्पन्न नहीं करता, बल्कि केवल उन्हें पृथक करता है।

3. ग्रह टिमटिमाते नहीं हैं परंतु तारे टिमटिमाते हैं — क्यों?

तारे बिंदु स्रोत (point source) हैं क्योंकि वे पृथ्वी से बहुत दूर हैं। वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण उनके प्रकाश की दिशा और तीव्रता लगातार बदलती रहती है, इसलिए तारे टिमटिमाते हैं। ग्रह विस्तृत स्रोत (extended source) हैं क्योंकि वे अपेक्षाकृत निकट हैं। ग्रह को बिंदु स्रोतों के समूह के रूप में मान सकते हैं — प्रत्येक बिंदु का प्रकीर्णन एक-दूसरे को संतुलित कर देता है, इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)

1. मानव नेत्र की संरचना का वर्णन कीजिए। यह किस प्रकार कार्य करता है?

मानव नेत्र लगभग गोलाकार होता है और इसका व्यास लगभग 2.3 cm होता है। इसकी संरचना निम्नलिखित है:

कॉर्निया (Cornea): नेत्र की सबसे बाहरी पारदर्शी परत। प्रकाश सबसे पहले यहाँ अपवर्तित होता है।

परितारिका / आइरिस (Iris): कॉर्निया के पीछे रंगीन पर्दा। यह पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।

पुतली (Pupil): आइरिस का केंद्रीय छिद्र जो नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है।

नेत्र लेंस (Eye Lens): रेशेदार जेली जैसी पारदर्शी संरचना। सिलियरी पेशियों द्वारा इसकी वक्रता (और फोकस दूरी) बदली जा सकती है।

रेटिना (Retina): नेत्र की भीतरी सतह — एक पतली झिल्ली जिसमें प्रकाश संवेदी कोशिकाएँ (शलाका और शंकु) होती हैं। प्रतिबिम्ब यहीं बनता है।

दृक् तंत्रिका (Optic Nerve): रेटिना पर बने प्रतिबिम्ब के विद्युत संकेतों को मस्तिष्क तक ले जाती है।

कार्यविधि: प्रकाश कॉर्निया से अपवर्तित होकर पुतली से नेत्र में प्रवेश करता है → नेत्र लेंस इसे और अपवर्तित करता है → रेटिना पर वास्तविक और उल्टा प्रतिबिम्ब बनता है → दृक् तंत्रिका संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती है → मस्तिष्क प्रतिबिम्ब को सीधा समझकर हमें दृष्टि प्रदान करता है।

2. प्रकाश के प्रकीर्णन को समझाइए। इसके आधार पर निम्नलिखित की व्याख्या कीजिए: (i) आकाश का नीला रंग (ii) सूर्योदय/सूर्यास्त का लाल रंग (iii) खतरे के संकेत लाल क्यों

प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering): जब प्रकाश सूक्ष्म कणों से टकराता है तो विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है। रेले प्रकीर्णन के अनुसार — प्रकीर्णन तरंगदैर्ध्य (λ) के चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होता है: प्रकीर्णन ∝ 1/λ⁴। अतः छोटी तरंगदैर्ध्य का प्रकाश अधिक प्रकीर्णित होता है।

(i) आकाश का नीला रंग: नीले रंग की तरंगदैर्ध्य कम होने के कारण वायुमंडलीय कणों द्वारा सर्वाधिक प्रकीर्णित होता है। यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश सभी दिशाओं से हमारी आँखों में पहुँचता है, इसलिए आकाश नीला दिखता है।

(ii) सूर्योदय/सूर्यास्त का लाल रंग: सूर्य क्षितिज के निकट होने पर प्रकाश को वायुमंडल में बहुत लंबा पथ तय करना पड़ता है। इस दौरान नीला/बैंगनी प्रकाश पूर्णतः प्रकीर्णित हो जाता है। केवल लाल प्रकाश (अधिक तरंगदैर्ध्य) ही हमारी आँखों तक पहुँचता है।

(iii) खतरे के संकेत लाल: लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सर्वाधिक (~700 nm) होने से यह सबसे कम प्रकीर्णित होता है। इसलिए यह कोहरे, धुएँ और लंबी दूरी तक स्पष्ट दिखता है — खतरे का संकेत देने के लिए सर्वोत्तम रंग है।

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