1. विद्युत आवेश एवं विद्युत धारा (Electric Charge & Current)
पदार्थ परमाणुओं (atoms) से मिलकर बना होता है। प्रत्येक परमाणु में धनावेशित प्रोटॉन (proton), ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन (electron) और उदासीन न्यूट्रॉन (neutron) होते हैं। जब किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है तो उस पर विद्युत आवेश (Electric Charge) उत्पन्न होता है।
विद्युत धारा (Electric Current):
- परिभाषा: किसी चालक में एकांक समय में प्रवाहित आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहते हैं।
- सूत्र: I = Q/t (जहाँ I = विद्युत धारा, Q = आवेश, t = समय)
- SI मात्रक: एम्पियर (Ampere, A); 1 A = 1 C/s
- छोटे मात्रक: मिलीएम्पियर (mA) = 10⁻³ A; माइक्रोएम्पियर (μA) = 10⁻⁶ A
- आवेश (Q) का SI मात्रक: कूलॉम (Coulomb, C)
- 1 इलेक्ट्रॉन का आवेश: e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C
परम्परागत धारा vs इलेक्ट्रॉन प्रवाह:
- परम्परागत धारा (Conventional Current): धनात्मक सिरे (+) से ऋणात्मक सिरे (−) की ओर बहती है (बाह्य परिपथ में)।
- इलेक्ट्रॉन प्रवाह (Electron Flow): ऋणात्मक सिरे (−) से धनात्मक सिरे (+) की ओर होता है — अर्थात् परम्परागत धारा की विपरीत दिशा में।
- एमीटर (Ammeter): विद्युत धारा मापने का यंत्र — परिपथ में श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है।
2. विद्युत विभव और विभवांतर (Electric Potential & Potential Difference)
जिस प्रकार पानी ऊँचाई के अंतर के कारण ऊँचे स्थान से नीचे स्थान की ओर बहता है, उसी प्रकार विद्युत धारा विभवांतर (Potential Difference) के कारण उच्च विभव से निम्न विभव की ओर बहती है।
विभवांतर (Potential Difference):
- परिभाषा: एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य।
- सूत्र: V = W/Q (जहाँ V = विभवांतर, W = कार्य/ऊर्जा, Q = आवेश)
- SI मात्रक: वोल्ट (Volt, V); 1 V = 1 J/C
- वोल्टमीटर (Voltmeter): विभवांतर मापने का यंत्र — परिपथ में समांतर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है।
3. ओम का नियम (Ohm's Law)
सन् 1827 में जर्मन भौतिकविद् जॉर्ज साइमन ओम (Georg Simon Ohm) ने विद्युत धारा और विभवांतर के बीच संबंध स्थापित किया।
ओम का नियम (Ohm's Law):
- कथन: स्थिर ताप पर किसी चालक के सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V), उसमें प्रवाहित विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है।
- V ∝ I अर्थात् V = IR
- जहाँ R = प्रतिरोध (Resistance) — नियतांक
- R = V/I
- V-I ग्राफ: मूल बिंदु (origin) से गुजरने वाली सरल रेखा — इसका ढाल (slope) प्रतिरोध R देता है।
प्रतिरोध (Resistance):
किसी चालक का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोध (Resistance) कहलाता है।
- SI मात्रक: ओम (Ohm, Ω)
- 1 Ω: जब किसी चालक के सिरों पर 1 V का विभवांतर लगाने पर उसमें 1 A की धारा प्रवाहित हो, तो उसका प्रतिरोध 1 Ω होता है।
4. प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Resistance)
किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
प्रतिरोध का सूत्र:
- R = ρl/A
- जहाँ ρ (rho) = प्रतिरोधकता (Resistivity) — पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर
- l = चालक की लम्बाई (R ∝ l — लम्बाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है)
- A = चालक की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (R ∝ 1/A — मोटाई बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है)
प्रतिरोधकता (Resistivity, ρ):
- परिभाषा: एकांक लम्बाई और एकांक अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले चालक का प्रतिरोध।
- SI मात्रक: Ω·m (ओम-मीटर)
- प्रतिरोधकता पदार्थ की प्रकृति और ताप पर निर्भर करती है, लम्बाई या मोटाई पर नहीं।
- चालक (Conductors): ρ बहुत कम (जैसे चाँदी ≈ 1.60 × 10⁻⁸ Ω·m, ताँबा ≈ 1.62 × 10⁻⁸ Ω·m)
- मिश्रधातु (Alloys): ρ अपेक्षाकृत अधिक (जैसे नाइक्रोम ≈ 100 × 10⁻⁶ Ω·m, मैंगनीन ≈ 44 × 10⁻⁶ Ω·m) — इसीलिए हीटर, टोस्टर आदि में प्रयुक्त
- विद्युतरोधी (Insulators): ρ बहुत अधिक (जैसे रबर ≈ 10¹³ – 10¹⁶ Ω·m, काँच ≈ 10¹⁰ – 10¹⁴ Ω·m)
5. प्रतिरोधों का संयोजन (Combination of Resistors)
प्रतिरोधों को दो प्रकार से जोड़ा जा सकता है:
5.1 श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination):
- प्रतिरोधों को एक के बाद एक (end to end) जोड़ा जाता है।
- कुल प्रतिरोध: R = R₁ + R₂ + R₃ + ...
- विद्युत धारा: सभी प्रतिरोधों में समान (I = I₁ = I₂ = I₃)
- विभवांतर: विभाजित होता है (V = V₁ + V₂ + V₃)
- कुल प्रतिरोध सबसे बड़े प्रतिरोध से भी अधिक होता है।
- एक प्रतिरोध खराब होने पर पूरा परिपथ टूट जाता है।
5.2 समांतर क्रम संयोजन (Parallel Combination):
- प्रतिरोधों को एक ही दो बिंदुओं के बीच जोड़ा जाता है।
- कुल प्रतिरोध: 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ + ...
- विभवांतर: सभी प्रतिरोधों पर समान (V = V₁ = V₂ = V₃)
- विद्युत धारा: विभाजित होती है (I = I₁ + I₂ + I₃)
- कुल प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
- एक प्रतिरोध खराब होने पर भी शेष परिपथ चालू रहता है। इसीलिए घरेलू परिपथ में उपकरण समांतर क्रम में जोड़े जाते हैं।
6. विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current)
जब किसी चालक तार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो चालक गर्म हो जाता है। यह विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा ऊर्जा (heat energy) में रूपांतरण है। इसे विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current) या जूल ऊष्मन (Joule Heating) कहते हैं।
जूल का ऊष्मा नियम (Joule's Law of Heating):
- H = I²Rt
- जहाँ H = उत्पन्न ऊष्मा (Joule में), I = विद्युत धारा (A), R = प्रतिरोध (Ω), t = समय (s)
- ऊष्मा I² के समानुपाती, R के समानुपाती और t के समानुपाती होती है।
- अन्य रूप: H = VIt = V²t/R
ऊष्मीय प्रभाव के व्यावहारिक अनुप्रयोग:
- विद्युत हीटर (Electric Heater): नाइक्रोम (Nichrome) तार का कुंडल — उच्च प्रतिरोधकता, उच्च गलनांक
- विद्युत इस्तरी (Electric Iron): नाइक्रोम तत्व द्वारा ऊष्मा उत्पन्न
- विद्युत बल्ब (Electric Bulb): टंगस्टन (Tungsten) फिलामेंट — गलनांक 3380°C; निष्क्रिय गैस (नाइट्रोजन/आर्गन) भरी होती है
- विद्युत फ्यूज (Electric Fuse): ताँबा-टिन मिश्रधातु — निम्न गलनांक; अधिक धारा प्रवाहित होने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है — सुरक्षा युक्ति
7. विद्युत शक्ति (Electric Power)
विद्युत शक्ति किसी विद्युत युक्ति द्वारा एकांक समय में उपभोग की गई विद्युत ऊर्जा (rate of consumption of electric energy) है।
विद्युत शक्ति के सूत्र:
- P = W/t = VI
- P = I²R (ओम के नियम से V = IR रखने पर)
- P = V²/R (ओम के नियम से I = V/R रखने पर)
- SI मात्रक: वाट (Watt, W); 1 W = 1 V × 1 A = 1 J/s
- बड़ा मात्रक: किलोवाट (kW); 1 kW = 1000 W
विद्युत ऊर्जा का व्यापारिक मात्रक (Commercial Unit of Energy):
- किलोवाट घंटा (kWh) — इसे "यूनिट" (Unit) भी कहते हैं।
- 1 kWh = 1000 W × 3600 s = 3.6 × 10⁶ J = 3600000 J
- बिजली का बिल kWh (यूनिट) में मापी गई ऊर्जा पर आधारित होता है।
- उदाहरण: 100 W का बल्ब 10 घंटे चलने पर ऊर्जा = 100 × 10 / 1000 = 1 kWh = 1 यूनिट
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पाठ्यपुस्तक प्रश्न (Textbook Questions)
प्रश्न 1: विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है?▼
विद्युत परिपथ (Electric Circuit): विद्युत धारा के प्रवाह का सतत एवं बंद पथ (continuous and closed path) विद्युत परिपथ कहलाता है। इसमें विद्युत सेल (या बैटरी), तार, स्विच, बल्ब आदि घटक होते हैं। परिपथ टूटने (open circuit) पर धारा का प्रवाह रुक जाता है।
प्रश्न 2: विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।▼
विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पियर (Ampere, A) है।
परिभाषा: जब किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस चालक में प्रवाहित धारा 1 एम्पियर कहलाती है।
1 A = 1 C/s = 1 कूलॉम/सेकंड
प्रश्न 3: एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।▼
हल: एक इलेक्ट्रॉन का आवेश e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C
1 कूलॉम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n) = Q/e
n = 1/(1.6 × 10⁻¹⁹) = 6.25 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन
प्रश्न 4: किसी बल्ब में 0.5 A विद्युत धारा 10 मिनट तक प्रवाहित होती है। विद्युत परिपथ से प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश का परिमाण ज्ञात कीजिए।▼
हल: I = 0.5 A, t = 10 min = 10 × 60 = 600 s
Q = I × t = 0.5 × 600 = 300 C
प्रश्न 5: 6 V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?▼
हल: V = 6 V, Q = 1 C
V = W/Q → W = V × Q = 6 × 1 = 6 J
प्रत्येक कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा दी जाती है।
प्रश्न 6: ओम के नियम की परिभाषा लिखिए।▼
ओम का नियम: स्थिर ताप पर किसी धातु के चालक के सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है।
V ∝ I अर्थात् V = IR
जहाँ R = प्रतिरोध (Resistance), जो चालक के लिए एक नियतांक है।
प्रश्न 7: प्रतिरोध (Resistance) से आप क्या समझते हैं? इसका SI मात्रक लिखिए।▼
प्रतिरोध (Resistance): किसी चालक का वह गुण जिसके कारण वह विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है। R = V/I
SI मात्रक: ओम (Ohm, Ω)
प्रतिरोध चालक की लम्बाई, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल, पदार्थ की प्रकृति और ताप पर निर्भर करता है।
प्रश्न 8: किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2 Ω, 3 Ω तथा 6 Ω के तीन प्रतिरोधक क्रमशः श्रेणीक्रम में 4.5 V बैटरी से संयोजित हों। प्रत्येक प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा की गणना कीजिए।▼
हल: श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध:
R = R₁ + R₂ + R₃ = 2 + 3 + 6 = 11 Ω
ओम के नियम से: I = V/R = 4.5/11 = 0.409 A ≈ 0.41 A
श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों में समान धारा प्रवाहित होती है।
अतः प्रत्येक प्रतिरोधक में धारा = 0.41 A
प्रश्न 9: 2 Ω, 3 Ω तथा 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में जोड़ा गया है। संयोजन का कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।▼
हल:
1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃
1/R = 1/2 + 1/3 + 1/6
1/R = 3/6 + 2/6 + 1/6 = 6/6 = 1
R = 1 Ω
समांतर क्रम का कुल प्रतिरोध 1 Ω है, जो सबसे छोटे प्रतिरोध (2 Ω) से भी कम है।
प्रश्न 10: 100 W और 60 W के दो विद्युत बल्ब 220 V विद्युत मेन से जोड़े गए हैं। प्रत्येक बल्ब से प्रवाहित विद्युत धारा ज्ञात कीजिए।▼
हल: V = 220 V
100 W बल्ब: P = VI → I = P/V = 100/220 = 0.454 A ≈ 5/11 A
60 W बल्ब: I = P/V = 60/220 = 0.273 A ≈ 3/11 A
प्रश्न 11: किसी विद्युत हीटर की डोरी (तार) का प्रतिरोध 10 Ω है। यदि हीटर 220 V की विद्युत मेन से जुड़ा हो तो 5 मिनट में उत्पन्न ऊष्मा ज्ञात कीजिए।▼
हल: R = 10 Ω, V = 220 V, t = 5 min = 300 s
H = V²t/R = (220)² × 300/10
H = 48400 × 300/10 = 48400 × 30
H = 14,52,000 J = 1.452 × 10⁶ J = 1452 kJ
प्रश्न 12: विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर (Rate) का निर्धारण कैसे किया जाता है?▼
विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर को विद्युत शक्ति (Electric Power) कहते हैं।
P = W/t = VI
अन्य सूत्र: P = I²R = V²/R
SI मात्रक: वाट (W), 1 W = 1 J/s
प्रश्न 13: एक विद्युत मोटर 220 V की विद्युत मेन से 5 A विद्युत धारा लेती है। मोटर की शक्ति ज्ञात कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा व्यय ऊर्जा ज्ञात कीजिए।▼
हल: V = 220 V, I = 5 A, t = 2 h
शक्ति: P = VI = 220 × 5 = 1100 W = 1.1 kW
ऊर्जा: E = P × t = 1.1 × 2 = 2.2 kWh = 2.2 यूनिट
जूल में: E = 2.2 × 3.6 × 10⁶ = 7.92 × 10⁶ J
प्रश्न 14: 20 cm लम्बाई और 8.4 × 10⁻⁴ cm² अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले एक प्रतिरोधक तार का प्रतिरोध 6 Ω है। इसकी प्रतिरोधकता ज्ञात कीजिए।▼
हल: l = 20 cm = 0.20 m, A = 8.4 × 10⁻⁴ cm² = 8.4 × 10⁻⁸ m², R = 6 Ω
R = ρl/A → ρ = RA/l
ρ = (6 × 8.4 × 10⁻⁸)/0.20
ρ = 50.4 × 10⁻⁸ / 0.20
ρ = 252 × 10⁻⁸ = 2.52 × 10⁻⁶ Ω·m
प्रश्न 15: कोई विद्युत लैम्प, जिसका प्रतिरोध 20 Ω है तथा एक 4 Ω प्रतिरोध का चालक, 6 V बैटरी से श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। परिपथ में विद्युत धारा तथा प्रत्येक के सिरों पर विभवांतर ज्ञात कीजिए।▼
हल: R₁ = 20 Ω (लैम्प), R₂ = 4 Ω (चालक), V = 6 V
कुल प्रतिरोध (श्रेणीक्रम): R = R₁ + R₂ = 20 + 4 = 24 Ω
विद्युत धारा: I = V/R = 6/24 = 0.25 A
लैम्प पर विभवांतर: V₁ = IR₁ = 0.25 × 20 = 5 V
चालक पर विभवांतर: V₂ = IR₂ = 0.25 × 4 = 1 V
जाँच: V₁ + V₂ = 5 + 1 = 6 V = कुल विभवांतर (सही)
प्रश्न 16: किसी विद्युत इस्तरी की खपत 840 W है जो 220 V के विद्युत मेन से कार्य करती है। इस्तरी का प्रतिरोध तथा उसमें प्रवाहित विद्युत धारा ज्ञात कीजिए।▼
हल: P = 840 W, V = 220 V
विद्युत धारा: I = P/V = 840/220 = 3.82 A ≈ 3.8 A
प्रतिरोध: R = V²/P = (220)²/840 = 48400/840 = 57.6 Ω ≈ 57.6 Ω
या R = V/I = 220/3.82 = 57.6 Ω
प्रश्न 17: कोई विद्युत रेफ्रिजरेटर जिसकी अंकित शक्ति 400 W है, यदि 8 घंटे/दिन चलता है, तो 30 दिनों में खपत ऊर्जा (यूनिट) एवं बिजली बिल ज्ञात कीजिए। (₹ 3.00 प्रति यूनिट)▼
हल: P = 400 W = 0.4 kW, t = 8 h/day × 30 days = 240 h
ऊर्जा = P × t = 0.4 × 240 = 96 kWh = 96 यूनिट
बिजली बिल = 96 × 3.00 = ₹ 288
प्रश्न 18: प्रतिरोधकता (Resistivity) किसे कहते हैं? इसका SI मात्रक लिखिए। प्रतिरोधकता पर किन कारकों का प्रभाव पड़ता है?▼
प्रतिरोधकता (Resistivity): R = ρl/A से, ρ = RA/l
यदि l = 1 m और A = 1 m² तो ρ = R
अर्थात् 1 m लम्बे और 1 m² अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले चालक का प्रतिरोध, उस पदार्थ की प्रतिरोधकता होती है।
SI मात्रक: Ω·m (ओम-मीटर)
प्रभावित करने वाले कारक:
- पदार्थ की प्रकृति — भिन्न पदार्थों की प्रतिरोधकता भिन्न होती है
- ताप (Temperature) — ताप बढ़ने पर धातुओं की प्रतिरोधकता बढ़ती है
- लम्बाई और क्षेत्रफल का प्रतिरोधकता पर कोई प्रभाव नहीं
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बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. विद्युत धारा का SI मात्रक है:
- A) वोल्ट (V)
- B) एम्पियर (A)
- C) ओम (Ω)
- D) वाट (W)
✅ सही उत्तर: B) एम्पियर (A) — विद्युत धारा I = Q/t, इसका SI मात्रक एम्पियर (Ampere) है।
2. 4 Ω और 12 Ω के दो प्रतिरोधकों को समांतर क्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध होगा:
- A) 16 Ω
- B) 8 Ω
- C) 3 Ω
- D) 48 Ω
✅ सही उत्तर: C) 3 Ω — 1/R = 1/4 + 1/12 = (3+1)/12 = 4/12; R = 12/4 = 3 Ω
3. 1 kWh बराबर होता है:
- A) 3.6 × 10³ J
- B) 3.6 × 10⁴ J
- C) 3.6 × 10⁵ J
- D) 3.6 × 10⁶ J
✅ सही उत्तर: D) 3.6 × 10⁶ J — 1 kWh = 1000 W × 3600 s = 3,600,000 J = 3.6 × 10⁶ J
4. एमीटर (Ammeter) को परिपथ में किस क्रम में जोड़ा जाता है?
- A) श्रेणीक्रम (Series) में
- B) समांतर क्रम (Parallel) में
- C) दोनों में
- D) इनमें से कोई नहीं
✅ सही उत्तर: A) श्रेणीक्रम (Series) में — एमीटर का प्रतिरोध बहुत कम होता है इसलिए इसे श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है ताकि परिपथ में धारा प्रभावित न हो।
5. जूल के ऊष्मा नियम के अनुसार उत्पन्न ऊष्मा (H) का सूत्र है:
- A) H = IRt
- B) H = I²Rt
- C) H = IR²t
- D) H = I²R/t
✅ सही उत्तर: B) H = I²Rt — जूल का ऊष्मा नियम: किसी प्रतिरोध R वाले चालक में I धारा t समय तक प्रवाहित होने पर उत्पन्न ऊष्मा H = I²Rt
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)
1. घरेलू परिपथ में विद्युत उपकरण समांतर क्रम में क्यों जोड़े जाते हैं? तीन कारण लिखिए।▼
घरेलू परिपथ में विद्युत उपकरण समांतर क्रम में जोड़े जाते हैं क्योंकि:
(i) समांतर क्रम में प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर (220 V) प्राप्त होता है, जो उनके सही कार्य करने के लिए आवश्यक है।
(ii) प्रत्येक उपकरण स्वतंत्र रूप से कार्य करता है — एक उपकरण खराब होने पर भी शेष उपकरण चालू रहते हैं।
(iii) कुल प्रतिरोध कम होता है जिससे विद्युत मेन से पर्याप्त धारा प्रवाहित हो सकती है।
2. मिश्रधातु (Alloys) का उपयोग विद्युत ऊष्मन युक्तियों (Heating Devices) में क्यों किया जाता है?▼
विद्युत ऊष्मन युक्तियों (जैसे हीटर, टोस्टर, इस्तरी) में मिश्रधातुओं (जैसे नाइक्रोम) का उपयोग किया जाता है क्योंकि:
(i) मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता (ρ) बहुत अधिक होती है जिससे अधिक ऊष्मा (H = I²Rt) उत्पन्न होती है।
(ii) इनका गलनांक (melting point) बहुत ऊँचा होता है, अतः उच्च ताप पर भी पिघलते नहीं।
(iii) ये उच्च ताप पर ऑक्सीकृत (oxidize) नहीं होतीं।
3. विद्युत फ्यूज (Electric Fuse) क्या है? यह कैसे काम करता है?▼
विद्युत फ्यूज (Electric Fuse): यह एक महत्वपूर्ण सुरक्षा युक्ति (safety device) है जो परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ी जाती है।
संरचना: यह ताँबे-टिन (या सीसा-टिन) मिश्रधातु का तार होता है जिसका गलनांक बहुत कम होता है।
कार्य सिद्धांत: जब परिपथ में अधिक धारा (शॉर्ट सर्किट या अतिभारण के कारण) प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार H = I²Rt के कारण अत्यधिक गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है, जिससे उपकरणों को क्षति से बचाया जाता है।
फ्यूज की रेटिंग (जैसे 1A, 2A, 3A, 5A) उस अधिकतम धारा को दर्शाती है जो फ्यूज सहन कर सकता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)
1. ओम का नियम (Ohm's Law) क्या है? सत्यापन के प्रयोग का वर्णन कीजिए। V-I ग्राफ खींचिए और प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।▼
ओम का नियम: स्थिर ताप पर किसी चालक के सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V), उसमें प्रवाहित विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है। V = IR
सत्यापन प्रयोग:
(i) एक नाइक्रोम तार को बैटरी, एमीटर, वोल्टमीटर और स्विच से जोड़ा जाता है। एमीटर श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर तार के सिरों पर समांतर क्रम में लगाया जाता है।
(ii) बैटरी की संख्या (1, 2, 3...) बदलकर विभवांतर बदला जाता है। प्रत्येक बार एमीटर और वोल्टमीटर की रीडिंग नोट की जाती है।
(iii) V/I का अनुपात प्रत्येक बार स्थिर (constant) आता है = R
V-I ग्राफ: विभवांतर (V) को Y-अक्ष पर और धारा (I) को X-अक्ष पर लेने पर मूल बिंदु से गुजरने वाली सरल रेखा प्राप्त होती है। इसका ढाल (slope) = R
प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक:
- लम्बाई (l): R ∝ l (लम्बाई बढ़ने पर R बढ़ता है)
- अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (A): R ∝ 1/A (मोटाई बढ़ने पर R घटता है)
- पदार्थ की प्रकृति: भिन्न पदार्थों की प्रतिरोधकता (ρ) भिन्न होती है
- ताप: ताप बढ़ने पर धातुओं का प्रतिरोध बढ़ता है
2. श्रेणीक्रम और समांतर क्रम संयोजन में अंतर लिखिए। 3 Ω, 6 Ω और 9 Ω के प्रतिरोधकों को (i) श्रेणीक्रम (ii) समांतर क्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। इन्हें 18 V बैटरी से जोड़ने पर परिपथ में कुल धारा ज्ञात कीजिए।▼
श्रेणीक्रम और समांतर क्रम में अंतर:
(i) श्रेणीक्रम में धारा समान, समांतर में विभवांतर समान।
(ii) श्रेणीक्रम में R_total = R₁+R₂+R₃, समांतर में 1/R_total = 1/R₁+1/R₂+1/R₃
(iii) श्रेणीक्रम में कुल R बढ़ता है, समांतर में कुल R घटता है।
(i) श्रेणीक्रम:
R = 3 + 6 + 9 = 18 Ω
I = V/R = 18/18 = 1 A
(ii) समांतर क्रम:
1/R = 1/3 + 1/6 + 1/9 = 6/18 + 3/18 + 2/18 = 11/18
R = 18/11 = 1.636 Ω ≈ 1.64 Ω
I = V/R = 18/(18/11) = 18 × 11/18 = 11 A