1. कार्बन की बहुमुखी प्रकृति — Versatile Nature of Carbon
कार्बन एक अद्वितीय तत्व है जो असंख्य यौगिक बना सकता है। इसका कारण कार्बन की दो विशेष क्षमताएँ हैं — श्रृंखलन (Catenation) और चतुर्संयोजकता (Tetravalency)।
कार्बन की विशेष क्षमताएँ:
- श्रृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं की आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखित श्रृंखलाएँ और वलय बनाने की क्षमता। C–C बंध बहुत मजबूत होता है।
- चतुर्संयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 है, इसलिए यह चार अन्य परमाणुओं के साथ बंध बना सकता है (C, H, O, N, S, Cl आदि)।
2. सहसंयोजक बंध — Covalent Bond
कार्बन अपने यौगिकों में सहसंयोजक बंध (Covalent Bond) बनाता है — इसमें दो परमाणु इलेक्ट्रॉन युग्मों का साझा (sharing) करते हैं।
सहसंयोजक बंध के प्रकार:
- एकल बंध (Single Bond): एक इलेक्ट्रॉन युग्म साझा — जैसे H–H, C–H (σ bond)
- द्विबंध (Double Bond): दो इलेक्ट्रॉन युग्म साझा — जैसे O=O, C=C (1σ + 1π)
- त्रिबंध (Triple Bond): तीन इलेक्ट्रॉन युग्म साझा — जैसे N≡N, C≡C (1σ + 2π)
सहसंयोजक यौगिकों के गुण:
- गलनांक और क्वथनांक निम्न होते हैं
- सामान्यतः विद्युत के कुचालक होते हैं
- जल में प्रायः अविलेय लेकिन कार्बनिक विलायकों में विलेय
3. हाइड्रोकार्बन — Hydrocarbons
केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
हाइड्रोकार्बन के प्रकार:
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated / Alkanes): केवल एकल बंध (C–C), सामान्य सूत्र: CnH2n+2 — जैसे CH₄ (मेथेन), C₂H₆ (एथेन), C₃H₈ (प्रोपेन)
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन — Alkenes: कम से कम एक द्विबंध (C=C), सामान्य सूत्र: CnH2n — जैसे C₂H₄ (एथीन), C₃H₆ (प्रोपीन)
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन — Alkynes: कम से कम एक त्रिबंध (C≡C), सामान्य सूत्र: CnH2n-2 — जैसे C₂H₂ (एथाइन/ऐसीटिलीन)
4. समजातीय श्रेणी — Homologous Series
कार्बन यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें क्रमिक सदस्यों का अंतर –CH₂– (14 u) होता है और सभी सदस्यों के रासायनिक गुण समान होते हैं।
ऐल्केन समजातीय श्रेणी (Alkane Homologous Series):
- CH₄ — मेथेन (Methane)
- C₂H₆ — एथेन (Ethane)
- C₃H₈ — प्रोपेन (Propane)
- C₄H₁₀ — ब्यूटेन (Butane)
- C₅H₁₂ — पेन्टेन (Pentane)
5. IUPAC नामपद्धति — Nomenclature
नामकरण के नियम:
- सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें → मूल नाम (Meth-, Eth-, Prop-, But-, Pent-...)
- प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) → प्रत्यय (Suffix): -ol (ऐल्कोहॉल), -al (ऐल्डिहाइड), -one (कीटोन), -oic acid (कार्बोक्सिलिक अम्ल)
- शाखा → उपसर्ग (Prefix): मेथिल-, एथिल- आदि
प्रमुख प्रकार्यात्मक समूह (Functional Groups):
- –OH — ऐल्कोहॉल (Alcohol) → suffix: -ol (जैसे एथेनॉल CH₃CH₂OH)
- –CHO — ऐल्डिहाइड (Aldehyde) → suffix: -al (जैसे एथेनल CH₃CHO)
- –CO– — कीटोन (Ketone) → suffix: -one (जैसे प्रोपेनोन CH₃COCH₃)
- –COOH — कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic acid) → suffix: -oic acid (जैसे एथेनोइक अम्ल CH₃COOH)
- –X (Cl, Br) — हैलो (Halo-) → prefix: क्लोरो-, ब्रोमो-
6. कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण — Chemical Properties
6.1 दहन (Combustion)
कार्बन यौगिक वायु में जलकर CO₂, H₂O और ऊष्मा तथा प्रकाश देते हैं।
उदाहरण:
- CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा (मेथेन का दहन)
- C₂H₅OH + 3O₂ → 2CO₂ + 3H₂O + ऊष्मा (एथेनॉल का दहन)
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन — स्वच्छ नीली ज्वाला (clean blue flame)
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन — पीली कज्जलमय ज्वाला (yellow sooty flame)
6.2 उपचयन (Oxidation)
ऐल्कोहॉल को क्षारीय KMnO₄ या अम्लीय K₂Cr₂O₇ से उपचयित करने पर कार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है।
- CH₃CH₂OH → (KMnO₄/K₂Cr₂O₇) → CH₃COOH (एथेनॉल → एथेनोइक अम्ल)
6.3 संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction)
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन उत्प्रेरक (Ni/Pd/Pt) की उपस्थिति में H₂ से जुड़कर संतृप्त यौगिक बनाते हैं। इसे हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) कहते हैं।
- वनस्पति तेल (असंतृप्त) + H₂ → वनस्पति घी (संतृप्त) [Ni उत्प्रेरक]
6.4 प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction)
संतृप्त हाइड्रोकार्बन में H परमाणु किसी अन्य परमाणु (Cl, Br) द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं।
- CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (सूर्य के प्रकाश में)
- CH₃Cl → CH₂Cl₂ → CHCl₃ → CCl₄ (क्रमिक प्रतिस्थापन)
7. एथेनॉल (Ethanol) — C₂H₅OH
एथेनॉल के गुण:
- रंगहीन, विशिष्ट गंध वाला द्रव, क्वथनांक 78°C
- Na के साथ: 2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂↑
- निर्जलीकरण: C₂H₅OH → (सांद्र H₂SO₄, 443K) → C₂H₄ + H₂O
- एस्टरीकरण: C₂H₅OH + CH₃COOH → CH₃COOC₂H₅ + H₂O (अम्ल उत्प्रेरक, एथिल एथेनोएट बनता है — मीठी गंध)
- अपमिश्रित ऐल्कोहॉल (Denatured alcohol): पीने योग्य न रहे इसलिए विषैले पदार्थ मिलाए जाते हैं
8. एथेनोइक अम्ल (Ethanoic Acid) — CH₃COOH
एथेनोइक अम्ल (ऐसीटिक अम्ल / सिरका) के गुण:
- तीखी गंध, 5-8% जलीय विलयन = सिरका (Vinegar)
- गलनांक 290K (17°C) — सर्दियों में जम जाता है → ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल
- NaHCO₃ के साथ: CH₃COOH + NaHCO₃ → CH₃COONa + H₂O + CO₂↑
- NaOH के साथ: CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O (उदासीनीकरण)
9. साबुन और अपमार्जक — Soaps and Detergents
साबुन — लंबी श्रृंखला वाले वसीय अम्लों के सोडियम/पोटेशियम लवण (जैसे C₁₇H₃₅COONa — सोडियम स्टिएरेट)।
साबुनीकरण (Saponification):
- वसा/तेल + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल
- साबुन अणु का दो भाग — जलरागी (Hydrophilic) सिर और जलविरागी (Hydrophobic) पूँछ
- मिसेल (Micelle) बनाकर तेल/गंदगी को जल में घोलता है
साबुन vs अपमार्जक:
- साबुन: कठोर जल में झाग नहीं देता (Ca²⁺, Mg²⁺ आयनों के साथ अविलेय लवण बनाता है)
- अपमार्जक (Detergent): कठोर और मृदु दोनों जल में झाग देता है, सल्फोनेट लवण होते हैं
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पाठगत प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1: सहसंयोजक बंध क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।▼
जब दो परमाणु इलेक्ट्रॉनों का साझा (sharing) करके बंध बनाते हैं तो उसे सहसंयोजक बंध (Covalent Bond) कहते हैं।
उदाहरण: H₂ अणु में — दोनों H परमाणु अपना-अपना 1 इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं (H–H)।
CH₄ (मेथेन) में — कार्बन अपने 4 इलेक्ट्रॉन चार H परमाणुओं के साथ साझा करता है।
प्रश्न 2: कार्बन एक छोटा परमाणु होते हुए भी बहुत अधिक यौगिक बनाता है। क्यों?▼
कार्बन अधिक यौगिक बनाता है क्योंकि:
- श्रृंखलन (Catenation): C–C बंध अत्यंत मजबूत होता है, इसलिए कार्बन लंबी, शाखित एवं वलय श्रृंखलाएँ बना सकता है।
- चतुर्संयोजकता: संयोजकता 4 होने से कार्बन 4 अन्य परमाणुओं (C, H, O, N, S, Cl) से बंध बना सकता है।
- कार्बन एकल, द्वि और त्रि बंध — तीनों प्रकार बना सकता है।
प्रश्न 3: संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में क्या अंतर है?▼
संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated): केवल C–C एकल बंध, सामान्य सूत्र CnH2n+2, संकलन अभिक्रिया नहीं दिखाते, स्वच्छ ज्वाला से जलते हैं। उदा: CH₄, C₂H₆
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated): C=C द्विबंध या C≡C त्रिबंध, सामान्य सूत्र CnH2n या CnH2n-2, संकलन अभिक्रिया दिखाते हैं, कज्जलमय ज्वाला से जलते हैं। उदा: C₂H₄, C₂H₂
प्रश्न 4: समजातीय श्रेणी (Homologous Series) क्या है? उदाहरण दीजिए।▼
कार्बन यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें प्रत्येक क्रमिक सदस्य का अंतर –CH₂– (14 u) होता है और सभी सदस्यों का सामान्य सूत्र और रासायनिक गुण समान होते हैं।
उदाहरण — ऐल्केन श्रेणी: CH₄, C₂H₆, C₃H₈, C₄H₁₀... (सामान्य सूत्र: CnH2n+2)
प्रश्न 5: एथेनॉल से एथेनोइक अम्ल में परिवर्तन को उपचयन क्यों माना जाता है?▼
एथेनॉल (C₂H₅OH) में ऑक्सीजन जुड़कर एथेनोइक अम्ल (CH₃COOH) बनता है। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है, इसलिए यह उपचयन है।
C₂H₅OH + [O] → CH₃COOH + H₂O (क्षारीय KMnO₄ या अम्लीय K₂Cr₂O₇ उत्प्रेरक)
प्रश्न 6: साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action) समझाइए।▼
साबुन अणु के दो सिरे होते हैं:
- जलविरागी (Hydrophobic) — लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ → तेल/गंदगी में घुलती है
- जलरागी (Hydrophilic) — आयनिक सिरा → जल में घुलता है
जब साबुन गंदे कपड़े पर लगाया जाता है:
- जलविरागी सिरे गंदगी/तेल को घेर लेते हैं
- जलरागी सिरे जल की ओर रहते हैं
- इससे मिसेल (Micelle) बनता है — गोलाकार संरचना
- मिसेल गंदगी को जल में निलंबित कर देता है और धोने पर बह जाता है
अभ्यास प्रश्न (Exercise Questions)
प्रश्न 7: ब्यूटेनोन (Butanone) का संरचना सूत्र लिखिए।▼
ब्यूटेनोन एक कीटोन है (–one suffix)। इसमें 4 कार्बन हैं और कीटोन समूह (>C=O) दूसरे कार्बन पर है।
CH₃–CO–CH₂–CH₃ (ब्यूटेनोन / Butanone / MEK)
प्रश्न 8: खाना बनाते समय यदि बर्तन की तली बाहर से काली हो रही है, तो इसका कारण क्या है? ज्वाला को समायोजित कैसे करें?▼
कारण: ईंधन का अपूर्ण दहन (Incomplete combustion) हो रहा है जिससे कार्बन (कालिख/soot) बनती है और बर्तन की तली पर जम जाती है। इसका मतलब है कि ऑक्सीजन (वायु) की आपूर्ति कम है।
समाधान: स्टोव/बर्नर की वायु छिद्रों (air holes) को खोलकर वायु की आपूर्ति बढ़ाएँ ताकि पूर्ण दहन हो और स्वच्छ नीली ज्वाला आए।
प्रश्न 9: एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल को अलग-अलग कैसे पहचानें?▼
विधि 1 — लिटमस परीक्षण:
- एथेनोइक अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देगा (अम्लीय)
- एथेनॉल लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा (उदासीन)
विधि 2 — NaHCO₃ परीक्षण:
- एथेनोइक अम्ल + NaHCO₃ → CO₂ गैस के बुलबुले (तेज बुदबुदाहट)
- एथेनॉल + NaHCO₃ → कोई अभिक्रिया नहीं
प्रश्न 10: साबुन कठोर जल में झाग क्यों नहीं देता?▼
कठोर जल में कैल्शियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयन घुले होते हैं। साबुन इन आयनों के साथ अभिक्रिया करके अविलेय (insoluble) लवण बनाता है:
2C₁₇H₃₅COONa + CaCl₂ → (C₁₇H₃₅COO)₂Ca↓ + 2NaCl
यह अविलेय लवण (scum/मैल) के रूप में जमता है। साबुन का अधिकांश भाग इसी अभिक्रिया में खर्च हो जाता है, इसलिए झाग कम बनता है।
अपमार्जक (Detergent) कठोर जल में भी झाग देता है क्योंकि इसके Ca²⁺/Mg²⁺ लवण विलेय होते हैं।
प्रश्न 11: हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) क्या है? इसका औद्योगिक उपयोग बताइए।▼
हाइड्रोजनीकरण: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (C=C) में निकेल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन (H₂) जुड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाता है। यह संकलन अभिक्रिया है।
औद्योगिक उपयोग: वनस्पति तेल (असंतृप्त, द्रव) को हाइड्रोजनीकरण द्वारा वनस्पति घी (संतृप्त, ठोस/अर्ध-ठोस) में बदला जाता है।
प्रश्न 12: प्रयोग द्वारा ऐल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल के गुणों की तुलना कीजिए।▼
ऐल्कोहॉल (Ethanol — C₂H₅OH):
- उदासीन (Neutral) — लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं
- Na से अभिक्रिया → H₂ गैस निकलती है
- NaHCO₃ से कोई अभिक्रिया नहीं
कार्बोक्सिलिक अम्ल (Ethanoic acid — CH₃COOH):
- अम्लीय — नीले लिटमस को लाल करता है
- NaHCO₃ से अभिक्रिया → CO₂ गैस (बुदबुदाहट)
- NaOH से उदासीनीकरण → लवण + जल
प्रश्न 13: एस्टरीकरण अभिक्रिया क्या है? उदाहरण दीजिए।▼
जब कार्बोक्सिलिक अम्ल, ऐल्कोहॉल के साथ अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया करके एस्टर और जल बनाता है तो इसे एस्टरीकरण (Esterification) कहते हैं।
CH₃COOH + C₂H₅OH → CH₃COOC₂H₅ + H₂O
(एथेनोइक अम्ल + एथेनॉल → एथिल एथेनोएट + जल)
एस्टर की मीठी फलों जैसी गंध होती है। इत्र (perfume) और स्वाद (flavouring agent) बनाने में उपयोग होता है।
प्रश्न 14: साबुनीकरण (Saponification) क्या है?▼
वसा या तेल को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ गर्म करने पर साबुन और ग्लिसरॉल बनते हैं। इस अभिक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं।
वसा/तेल + NaOH → साबुन (सोडियम कार्बोक्सिलेट) + ग्लिसरॉल
यह एस्टरीकरण की उत्क्रमणीय अभिक्रिया (reverse of esterification) है।
🎯 प्रश्न बैंक — Question Bank
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. कार्बन की संयोजकता कितनी है?
✅ सही उत्तर: B) 4 — कार्बन की इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,4 है, इसलिए यह 4 सहसंयोजक बंध बना सकता है (चतुर्संयोजक)।
2. एथीन (C₂H₄) में कौन-सा बंध होता है?
- A) एकल बंध
- B) त्रिबंध
- C) द्विबंध
- D) आयनिक बंध
✅ सही उत्तर: C) द्विबंध — एथीन (C₂H₄) एक ऐल्कीन है जिसमें C=C द्विबंध होता है।
3. वनस्पति तेल को वनस्पति घी में बदलने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
- A) हाइड्रोजनीकरण
- B) साबुनीकरण
- C) एस्टरीकरण
- D) दहन
✅ सही उत्तर: A) हाइड्रोजनीकरण — Ni उत्प्रेरक की उपस्थिति में असंतृप्त वनस्पति तेल में H₂ जुड़कर संतृप्त वनस्पति घी बनता है।
4. समजातीय श्रेणी में क्रमिक सदस्यों का अंतर कितना होता है?
- A) –CH₃ (15 u)
- B) –OH (17 u)
- C) –C₂H₅ (29 u)
- D) –CH₂– (14 u)
✅ सही उत्तर: D) –CH₂– (14 u) — समजातीय श्रेणी में प्रत्येक क्रमिक सदस्य –CH₂– (अणु भार 14 u) से भिन्न होता है।
5. एथेनोइक अम्ल का IUPAC नाम क्या है?
- A) मेथेनोइक अम्ल
- B) एथेनोइक अम्ल
- C) प्रोपेनोइक अम्ल
- D) ब्यूटेनोइक अम्ल
✅ सही उत्तर: B) एथेनोइक अम्ल — CH₃COOH का IUPAC नाम एथेनोइक अम्ल (Ethanoic acid) है। इसे ऐसीटिक अम्ल भी कहते हैं। 5-8% जलीय विलयन = सिरका (Vinegar)।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
1. श्रृंखलन (Catenation) क्या है? कार्बन में श्रृंखलन गुण क्यों अधिक होता है?▼
श्रृंखलन — किसी तत्व के परमाणुओं की आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ (सीधी, शाखित, वलय) बनाने की क्षमता।
कार्बन में श्रृंखलन सबसे अधिक होता है क्योंकि:
- C–C बंध ऊर्जा बहुत अधिक (348 kJ/mol) — अत्यंत मजबूत बंध
- कार्बन छोटा परमाणु है → इलेक्ट्रॉन साझा प्रभावी रूप से होता है
- कार्बन एकल, द्वि और त्रि बंध तीनों बना सकता है
2. संकलन अभिक्रिया और प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अंतर बताइए।▼
संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction):
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (C=C, C≡C) में होती है
- द्विबंध/त्रिबंध टूटकर नया परमाणु जुड़ता है
- उदा: CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃ [Ni उत्प्रेरक]
प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction):
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (C–C) में होती है
- एक H परमाणु किसी अन्य परमाणु (Cl, Br) से बदल जाता है
- उदा: CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl [सूर्य प्रकाश]
3. एथेनॉल के दो महत्वपूर्ण रासायनिक गुण लिखिए।▼
1. सोडियम से अभिक्रिया:
2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂↑
(सोडियम एथॉक्साइड बनता है और H₂ गैस निकलती है)
2. निर्जलीकरण (Dehydration):
C₂H₅OH → C₂H₄ + H₂O (सांद्र H₂SO₄, 443K पर)
(सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल जल अवशोषित करता है → एथीन बनती है)
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
1. कार्बन यौगिकों की चार प्रमुख रासायनिक अभिक्रियाएँ उदाहरण सहित समझाइए।▼
1. दहन (Combustion): कार्बन यौगिक O₂ में जलकर CO₂ + H₂O + ऊष्मा देते हैं।
CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा (संतृप्त → स्वच्छ नीली ज्वाला)
2. उपचयन (Oxidation): ऐल्कोहॉल → कार्बोक्सिलिक अम्ल
C₂H₅OH + [O] → CH₃COOH (KMnO₄/K₂Cr₂O₇ उत्प्रेरक)
3. संकलन (Addition): असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में H₂ जुड़ना
वनस्पति तेल + H₂ → वनस्पति घी [Ni उत्प्रेरक, हाइड्रोजनीकरण]
4. प्रतिस्थापन (Substitution): संतृप्त हाइड्रोकार्बन में H → Cl/Br
CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (सूर्य प्रकाश में)
2. साबुन और अपमार्जक में अंतर बताइए। साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action) विस्तार से समझाइए।▼
साबुन vs अपमार्जक:
- साबुन: वसीय अम्लों का सोडियम/पोटेशियम लवण (जैसे C₁₇H₃₅COONa)। कठोर जल में झाग नहीं देता।
- अपमार्जक: सल्फोनेट लवण। कठोर और मृदु दोनों जल में प्रभावी। जैव अनिम्नीकरणीय (non-biodegradable) हो सकते हैं।
शोधन क्रिया:
- साबुन अणु का जलविरागी (hydrophobic) सिरा — लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला
- साबुन अणु का जलरागी (hydrophilic) सिरा — –COO⁻Na⁺ आयनिक भाग
- गंदे कपड़े पर: जलविरागी सिरे गंदगी/तेल में → जलरागी सिरे जल में → मिसेल (Micelle) बनता है
- मिसेल = गोलाकार संरचना जिसमें तेल/गंदगी केंद्र में फँसी होती है
- पानी से धोने पर मिसेल बह जाता है → कपड़ा साफ
कठोर जल में समस्या: Ca²⁺/Mg²⁺ + साबुन → अविलेय मैल (scum) → साबुन बर्बाद, झाग कम। अपमार्जक में यह समस्या नहीं।