🔍 परिचय — जैव प्रक्रम क्या हैं?
जीवित जीवों (living organisms) को अपने शरीर की संरचना को बनाए रखने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। वे प्रक्रियाएँ जो सजीवों के अनुरक्षण (maintenance) के लिए आवश्यक हैं, जैव प्रक्रम (Life Processes) कहलाती हैं।
📌 प्रमुख जैव प्रक्रम:
- पोषण (Nutrition) — भोजन ग्रहण करना और उसका उपयोग
- श्वसन (Respiration) — भोजन से ऊर्जा प्राप्त करना
- वहन / परिवहन (Transportation) — पदार्थों का शरीर में परिवहन
- उत्सर्जन (Excretion) — अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना
1. पोषण (Nutrition)
जीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया को पोषण कहते हैं। पोषण दो प्रकार का होता है:
A) स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition)
वे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, स्वपोषी (autotrophs) कहलाते हैं। उदाहरण — हरे पौधे। पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया द्वारा भोजन बनाते हैं।
प्रकाश संश्लेषण का समीकरण:
6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
(कार्बन डाइऑक्साइड + जल → ग्लूकोज + ऑक्सीजन)
आवश्यक: क्लोरोफिल (Chlorophyll) + सूर्य का प्रकाश (Sunlight)
📌 प्रकाश संश्लेषण के चरण:
- प्रकाश अभिक्रिया (Light Reaction) — क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण, जल का अपघटन (photolysis), ATP और NADPH का निर्माण
- अंधकार अभिक्रिया (Dark Reaction / Calvin Cycle) — CO₂ का स्थिरीकरण (fixation), ग्लूकोज का निर्माण, यह प्रकाश पर सीधे निर्भर नहीं
- रंध्र (Stomata) — पत्तियों की सतह पर छोटे छिद्र जो CO₂ के प्रवेश और O₂ के निकास का मार्ग हैं; रक्षक कोशिकाएँ (guard cells) इन्हें खोलती-बंद करती हैं
B) विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
वे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं, विषमपोषी (heterotrophs) कहलाते हैं। यह तीन प्रकार का होता है:
- मृतजीवी (Saprophytic) — सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं। उदाहरण: कवक (fungi), ब्रेड मोल्ड
- परजीवी (Parasitic) — अन्य जीवित जीवों (होस्ट) के शरीर से पोषण लेते हैं। उदाहरण: अमरबेल (Cuscuta), जोंक, फीताकृमि
- प्राणिसम (Holozoic) — ठोस भोजन का अंतर्ग्रहण (ingestion) करते हैं। उदाहरण: अमीबा, मनुष्य
अमीबा में पोषण:
अमीबा अपने कूटपाद (pseudopodia) द्वारा भोजन कण को घेरकर खाद्य रिक्तिका (food vacuole) में ले लेता है। पाचन एंजाइम भोजन को पचाते हैं और पोषक तत्व अवशोषित कर लिए जाते हैं।
मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
मनुष्य में भोजन का पाचन आहार नाल (alimentary canal) में होता है:
मुख (Mouth) → ग्रासनली (Oesophagus) → आमाशय (Stomach) → छोटी आंत (Small Intestine) → बड़ी आंत (Large Intestine) → मलाशय (Rectum) → गुदा (Anus)
📌 प्रमुख पाचक एंजाइम:
- लार एमाइलेज (Salivary Amylase) — मुख में, स्टार्च को शर्करा (maltose) में बदलता है
- पेप्सिन (Pepsin) — आमाशय में, प्रोटीन का पाचन (अम्लीय माध्यम, HCl)
- ट्रिप्सिन (Trypsin) — छोटी आंत में, अग्न्याशय (pancreas) द्वारा स्रावित, प्रोटीन का पाचन
- पित्त रस (Bile) — यकृत (liver) द्वारा निर्मित, वसा का इमल्सीकरण (emulsification)
- लाइपेज (Lipase) — वसा (fats) का पाचन, फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में
छोटी आंत (Small Intestine) पाचन और अवशोषण का मुख्य स्थान है। इसकी भीतरी दीवार पर विली (villi) होते हैं जो अवशोषण का क्षेत्रफल बढ़ाते हैं। बड़ी आंत में जल का अवशोषण होता है।
2. श्वसन (Respiration)
भोजन (ग्लूकोज) के ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा (ATP) प्राप्त करने की प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है:
A) वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration)
वायवीय श्वसन का समीकरण:
C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा (ATP)
ग्लूकोज + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
यह माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में होता है। इसमें ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है और 38 ATP अणु प्राप्त होते हैं।
B) अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration)
ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाला श्वसन। इसमें ग्लूकोज का अपूर्ण विखंडन होता है:
- यीस्ट (Yeast) में किण्वन (Fermentation) — ग्लूकोज → एथेनॉल (Ethanol) + CO₂ + ऊर्जा (2 ATP)
- मांसपेशियों में — ग्लूकोज → लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) + ऊर्जा — अत्यधिक व्यायाम के समय ऑक्सीजन की कमी होने पर यह होता है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन (cramps) होती है
मानव श्वसन तंत्र (Human Respiratory System)
नासिका (Nose) → ग्रसनी (Pharynx) → कंठ (Larynx) → श्वासनली (Trachea) → श्वसनी (Bronchi) → फेफड़े (Lungs) → कूपिका (Alveoli)
कूपिका (Alveoli) — फेफड़ों में गुब्बारे जैसी संरचनाएँ जहाँ गैसों का आदान-प्रदान (O₂ और CO₂) होता है। इनकी पतली दीवारें और रक्त केशिकाओं का जाल विसरण (diffusion) को सुगम बनाता है।
3. परिवहन / वहन (Transportation)
A) मनुष्य में परिवहन
मनुष्य में परिवहन रक्त परिसंचरण तंत्र (Blood Circulatory System) द्वारा होता है।
📌 हृदय (Heart) — चार कक्ष:
- दायाँ अलिंद (Right Atrium) — शरीर से अशुद्ध रक्त (CO₂ युक्त) प्राप्त करता है
- दायाँ निलय (Right Ventricle) — अशुद्ध रक्त को फेफड़ों में भेजता है
- बायाँ अलिंद (Left Atrium) — फेफड़ों से शुद्ध रक्त (O₂ युक्त) प्राप्त करता है
- बायाँ निलय (Left Ventricle) — शुद्ध रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है (सबसे मोटी दीवार)
दोहरा परिसंचरण (Double Circulation):
मनुष्य में रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से दो बार गुजरता है:
- फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary) — हृदय → फेफड़े → हृदय (रक्त शुद्धीकरण)
- दैहिक परिसंचरण (Systemic) — हृदय → शरीर के अंग → हृदय (O₂ और पोषक तत्वों की आपूर्ति)
रक्त के घटक: प्लाज्मा (Plasma — तरल भाग), लाल रक्त कणिकाएँ (RBC — O₂ वहन, हीमोग्लोबिन), श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC — रोग प्रतिरोध), प्लेटलेट्स (Platelets — रक्त का थक्का बनाना)।
B) पौधों में परिवहन
📌 पौधों में वहन तंत्र:
- जाइलम (Xylem) — जड़ों से पत्तियों तक जल और खनिज लवण का परिवहन (ऊपर की ओर)। यह वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (transpiration pull) द्वारा होता है
- फ्लोएम (Phloem) — पत्तियों से पौधे के अन्य भागों तक भोजन (sucrose) का स्थानांतरण (translocation)। यह ATP ऊर्जा का उपयोग करता है
4. उत्सर्जन (Excretion)
A) मनुष्य में उत्सर्जन
शरीर की उपापचयी (metabolic) क्रियाओं से उत्पन्न हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, यूरिक एसिड) को शरीर से बाहर निकालना उत्सर्जन कहलाता है।
वृक्क (Kidneys) → मूत्रवाहिनी (Ureters) → मूत्राशय (Urinary Bladder) → मूत्रमार्ग (Urethra)
📌 वृक्क (Kidney) और नेफ्रॉन (Nephron):
- नेफ्रॉन — वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई (प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख)
- बोमन संपुट (Bowman's Capsule) — ग्लोमेरुलस (रक्त केशिकाओं का गुच्छा) को घेरता है
- मूत्र निर्माण के तीन चरण:
- निस्यंदन (Filtration) — ग्लोमेरुलस में रक्त से जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, यूरिया आदि छनते हैं
- पुनरवशोषण (Reabsorption) — नलिकाओं में उपयोगी पदार्थ (ग्लूकोज, जल, अमीनो अम्ल) पुनः रक्त में अवशोषित होते हैं
- स्रावण (Secretion) — अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थ नलिकाओं में स्रावित होते हैं
B) पौधों में उत्सर्जन
पौधों में विशिष्ट उत्सर्जन अंग नहीं होते। वे निम्न विधियों से अपशिष्ट पदार्थों का निपटान करते हैं:
- वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) — पत्तियों के रंध्रों द्वारा अतिरिक्त जल का उत्सर्जन
- गोंद और रेजिन (Gum & Resin) — अपशिष्ट पदार्थों का भंडारण (पुराने जाइलम में)
- पत्ती गिराना (Leaf fall) — अपशिष्ट पदार्थ युक्त पत्तियों का गिरना
- अपशिष्ट पदार्थों का कोशिकीय रिक्तिकाओं (vacuoles) में भंडारण
📖 पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर — NCERT Solutions
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1: हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?▼
बहुकोशिकीय जीवों में शरीर का आकार बड़ा होता है और सभी कोशिकाएँ सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में नहीं होतीं। विसरण (Diffusion) एक धीमी प्रक्रिया है जो केवल कम दूरी तक प्रभावी है। इसलिए शरीर के भीतर गहरी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए विशिष्ट श्वसन तंत्र (फेफड़े) और परिसंचरण तंत्र (रक्त) आवश्यक हैं।
प्रश्न 2: कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?▼
सजीव होने का मुख्य मापदंड आणविक गतियाँ (molecular movements) हैं। सजीव शरीर में निरंतर अणुओं की गति होती रहती है — जैसे उपापचय (metabolism), वृद्धि, श्वसन आदि। यदि कोई वस्तु जैव प्रक्रम (पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, वहन) प्रदर्शित करती है, तो वह सजीव है।
प्रश्न 3: किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?▼
जीवों द्वारा उपयोग की जाने वाली कच्ची सामग्री:
- भोजन (ग्लूकोज) — ऊर्जा का स्रोत
- ऑक्सीजन — श्वसन हेतु
- जल — सभी जैव रासायनिक अभिक्रियाओं का माध्यम
- कार्बन डाइऑक्साइड — पौधों में प्रकाश संश्लेषण के लिए
प्रश्न 4: स्वपोषी पोषण और विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है?▼
स्वपोषी पोषण (Autotrophic):
- जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं
- CO₂ और H₂O जैसे अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक भोजन बनाते हैं
- प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करते हैं
- उदाहरण: हरे पौधे
विषमपोषी पोषण (Heterotrophic):
- जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते
- अन्य जीवों पर भोजन के लिए निर्भर रहते हैं
- जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं
- उदाहरण: सभी जंतु, कवक
प्रश्न 5: प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?▼
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) — वायुमंडल से, पत्तियों के रंध्रों (stomata) द्वारा
- जल (H₂O) — मिट्टी से, जड़ों द्वारा अवशोषित
- सूर्य का प्रकाश (Sunlight) — सूर्य से, क्लोरोफिल द्वारा अवशोषित
- खनिज लवण — मिट्टी से, जड़ों द्वारा
प्रश्न 6: हमारे आमाशय में अम्ल (HCl) की भूमिका क्या है?▼
आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) की भूमिकाएँ:
- अम्लीय माध्यम बनाता है जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया के लिए आवश्यक है
- भोजन के साथ आने वाले जीवाणुओं (bacteria) को नष्ट करता है
- भोजन को मुलायम बनाता है
प्रश्न 7: पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?▼
पाचक एंजाइम जैव उत्प्रेरक (biocatalysts) हैं जो जटिल खाद्य पदार्थों को सरल व घुलनशील रूप में तोड़ते हैं ताकि शरीर उन्हें अवशोषित कर सके:
- एमाइलेज — स्टार्च → शर्करा (माल्टोज)
- पेप्सिन — प्रोटीन → पेप्टोन (आमाशय में)
- ट्रिप्सिन — प्रोटीन → अमीनो अम्ल (छोटी आंत में)
- लाइपेज — वसा → फैटी अम्ल + ग्लिसरॉल
प्रश्न 8: श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में पथ-प्रदर्शन (diffusion) पर्याप्त क्यों नहीं है?▼
बहुकोशिकीय जीवों में विसरण पर्याप्त नहीं है क्योंकि:
- शरीर का आयतन बड़ा होता है और सतह क्षेत्रफल अनुपात में छोटा
- सभी कोशिकाएँ बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में नहीं होतीं
- विसरण अत्यंत धीमी प्रक्रिया है — गहरी कोशिकाओं तक O₂ पहुँचने में बहुत समय लगेगा
- इसलिए विशिष्ट श्वसन अंगों (फेफड़े, गिल) और परिसंचरण तंत्र की आवश्यकता होती है
प्रश्न 9: मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?▼
ऑक्सीजन का परिवहन:
- कूपिका (alveoli) से O₂ रक्त की केशिकाओं में विसरित होती है
- RBC में हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) O₂ से संयोजित होकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है
- शरीर के ऊतकों में O₂ मुक्त होकर कोशिकाओं को मिलती है
CO₂ का परिवहन:
- ऊतकों से CO₂ रक्त प्लाज्मा में घुलित अवस्था में वहन होती है
- फेफड़ों की कूपिका में CO₂ रक्त से बाहर विसरित होकर श्वसन द्वारा बाहर निकलती है
प्रश्न 10: वृक्क में निस्यंदन (filtration) की क्रिया का वर्णन कीजिए।▼
वृक्क में निस्यंदन नेफ्रॉन में होता है:
- वृक्क धमनी (renal artery) रक्त को वृक्क में लाती है
- रक्त ग्लोमेरुलस (केशिकाओं का गुच्छा) में प्रवेश करता है
- ग्लोमेरुलस में उच्च रक्तचाप के कारण रक्त से जल, यूरिया, ग्लूकोज, लवण आदि बोमन संपुट में छन जाते हैं
- यह छना हुआ तरल निस्यंद (filtrate) कहलाता है
- RBC, प्रोटीन जैसे बड़े अणु नहीं छनते — ये रक्त में ही रहते हैं
- इसके बाद पुनरवशोषण (ग्लूकोज, जल) और स्रावण (अपशिष्ट) होता है
अभ्यास प्रश्न (Exercise Questions)
प्रश्न 11: मनुष्यों में वहन तंत्र के घटक कौन-कौन से हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?▼
मनुष्य के वहन तंत्र के मुख्य घटक:
- हृदय (Heart) — पंपिंग अंग, रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है
- रक्त (Blood) — तरल संयोजी ऊतक, O₂, CO₂, पोषक तत्व, हार्मोन का वहन
- रक्त वाहिकाएँ:
- धमनियाँ (Arteries) — हृदय से अंगों तक O₂ युक्त रक्त ले जाती हैं
- शिराएँ (Veins) — अंगों से हृदय तक CO₂ युक्त रक्त लाती हैं
- केशिकाएँ (Capillaries) — धमनियों और शिराओं को जोड़ती हैं, गैस विनिमय
- लसीका (Lymph) — ऊतक द्रव जो कोशिकाओं से अपशिष्ट एकत्र करता है
प्रश्न 12: स्तनधारियों और पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रक्त को अलग रखना क्यों आवश्यक है?▼
स्तनधारी और पक्षी उष्णरक्ती (warm-blooded) जीव हैं जिन्हें शरीर का तापमान स्थिर बनाए रखने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- O₂ युक्त और CO₂ युक्त रक्त को अलग रखने से शरीर को शुद्ध ऑक्सीजन युक्त रक्त ही मिलता है
- इससे ऊर्जा उत्पादन कुशल होता है
- यही कारण है कि इनके हृदय में चार कक्ष होते हैं — दायाँ भाग अशुद्ध और बायाँ भाग शुद्ध रक्त के लिए
- सेप्टम (पट) दोनों प्रकार के रक्त को मिलने नहीं देता
प्रश्न 13: उच्च संगठित पादपों (पौधों) में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?▼
उच्च संगठित पौधों में वहन तंत्र के दो मुख्य घटक हैं:
- जाइलम (Xylem): जड़ों से पत्तियों तक जल और खनिज लवणों का परिवहन (ऊपर की ओर)। इसमें ट्रेकीड्स (tracheids) और वेसल्स (vessels) होते हैं। वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (transpiration pull) से जल ऊपर चढ़ता है।
- फ्लोएम (Phloem): पत्तियों से अन्य भागों तक भोजन (sucrose) का स्थानांतरण (translocation)। यह ऊपर-नीचे दोनों दिशाओं में होता है। इसमें ATP ऊर्जा का उपयोग होता है। इसमें सिव ट्यूब (sieve tube) और सहचर कोशिकाएँ (companion cells) होती हैं।
प्रश्न 14: पौधों में जल और खनिज लवणों का वहन कैसे होता है?▼
पौधों में जल और खनिज लवणों का वहन जाइलम (Xylem) ऊतक द्वारा होता है:
- जड़ों की कोशिकाएँ मिट्टी से परासरण (osmosis) द्वारा जल अवशोषित करती हैं
- जल जड़ की कॉर्टेक्स, एंडोडर्मिस से होता हुआ जाइलम तक पहुँचता है
- पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन (transpiration) होने पर जल खिंचाव (suction force) उत्पन्न होता है
- यह वाष्पोत्सर्जन खिंचाव जल को ऊपर की ओर चढ़ाता है — बहुत ऊँचे पेड़ों में भी
- खनिज लवण जल में घुलकर सक्रिय परिवहन (active transport) द्वारा अवशोषित होते हैं
प्रश्न 15: भोजन के पाचन में पित्त रस (bile juice) की भूमिका क्या है?▼
पित्त रस (Bile Juice) यकृत (liver) द्वारा निर्मित और पित्ताशय (gall bladder) में संचित होता है।
- पित्त रस क्षारीय होता है — यह आमाशय से आने वाले अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है
- पित्त लवण वसा (fats) को छोटी-छोटी बूँदों में तोड़ते हैं — इसे इमल्सीकरण (emulsification) कहते हैं
- इससे वसा का सतह क्षेत्रफल बढ़ जाता है और लाइपेज एंजाइम की क्रिया सुगम होती है
🎯 प्रश्न बैंक — Question Bank
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पौधे के किस भाग में होती है?
- A) जड़ (Root)
- B) तना (Stem)
- C) पत्ती (Leaf)
- D) फूल (Flower)
✅ सही उत्तर: C) पत्ती (Leaf) — पत्तियों में क्लोरोफिल होता है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
2. अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration) में यीस्ट (Yeast) द्वारा क्या उत्पाद बनता है?
- A) लैक्टिक अम्ल
- B) एथेनॉल और CO₂
- C) जल और CO₂
- D) ग्लूकोज और O₂
✅ सही उत्तर: B) एथेनॉल और CO₂ — यीस्ट में अवायवीय श्वसन (किण्वन) के दौरान ग्लूकोज एथेनॉल (एथिल अल्कोहल) और CO₂ में टूटता है।
3. मनुष्य के हृदय में कितने कक्ष (chambers) होते हैं?
- A) एक
- B) दो
- C) तीन
- D) चार
✅ सही उत्तर: D) चार — मनुष्य के हृदय में 4 कक्ष होते हैं — दो अलिंद (atria) और दो निलय (ventricles)। इससे शुद्ध और अशुद्ध रक्त अलग-अलग रहता है।
4. वृक्क (Kidney) की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई क्या है?
- A) नेफ्रॉन (Nephron)
- B) न्यूरॉन (Neuron)
- C) कूपिका (Alveoli)
- D) विली (Villi)
✅ सही उत्तर: A) नेफ्रॉन (Nephron) — प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं जो रक्त को छानकर मूत्र बनाते हैं।
5. पौधों में जल और खनिज लवणों का परिवहन किसके द्वारा होता है?
- A) फ्लोएम (Phloem)
- B) कॉर्टेक्स (Cortex)
- C) जाइलम (Xylem)
- D) एपिडर्मिस (Epidermis)
✅ सही उत्तर: C) जाइलम (Xylem) — जाइलम जड़ों से पत्तियों तक जल और खनिज लवणों का ऊपर की ओर परिवहन करता है। भोजन का परिवहन फ्लोएम करता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)
1. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) क्या है? इसका समीकरण लिखिए।▼
वह प्रक्रिया जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज (भोजन) का निर्माण करते हैं और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं, प्रकाश संश्लेषण कहलाती है।
6CO₂ + 6H₂O क्लोरोफिल + सूर्य प्रकाश→ C₆H₁₂O₆ + 6O₂
यह प्रक्रिया पत्तियों के हरित लवक (Chloroplast) में होती है। रंध्रों (stomata) से CO₂ प्रवेश करती है।
2. दोहरे परिसंचरण (Double Circulation) से क्या तात्पर्य है?▼
मनुष्य में रक्त एक पूर्ण चक्र के दौरान हृदय से दो बार गुजरता है, इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं:
- फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation): दायाँ निलय → फेफड़े → बायाँ अलिंद (रक्त शुद्ध होता है)
- दैहिक परिसंचरण (Systemic Circulation): बायाँ निलय → शरीर के अंग → दायाँ अलिंद (O₂ व पोषक तत्व पहुँचते हैं)
यह व्यवस्था शुद्ध और अशुद्ध रक्त को अलग रखती है जिससे ऊर्जा उत्पादन कुशल होता है।
3. जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) में अंतर बताइए।▼
जाइलम (Xylem):
- जल और खनिज लवणों का परिवहन करता है
- परिवहन ऊपर की ओर (जड़ → पत्ती) होता है
- मृत कोशिकाओं (ट्रेकीड्स, वेसल्स) से बना होता है
- ATP ऊर्जा की आवश्यकता नहीं — वाष्पोत्सर्जन खिंचाव से होता है
फ्लोएम (Phloem):
- भोजन (sucrose) का स्थानांतरण (translocation) करता है
- परिवहन दोनों दिशाओं (ऊपर व नीचे) में होता है
- जीवित कोशिकाओं (सिव ट्यूब, सहचर कोशिका) से बना होता है
- ATP ऊर्जा की आवश्यकता होती है
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)
1. मानव पाचन तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए। विभिन्न अंगों में होने वाली पाचन क्रियाओं को स्पष्ट कीजिए।▼
मानव पाचन तंत्र आहार नाल (Alimentary Canal) और सहायक ग्रंथियों से मिलकर बना होता है:
1. मुख गुहा (Oral Cavity): भोजन को दाँतों द्वारा चबाया जाता है। लार ग्रंथि से लार एमाइलेज निकलता है जो स्टार्च को माल्टोज में बदलता है।
2. ग्रासनली (Oesophagus): क्रमाकुंचन (peristalsis) गति द्वारा भोजन आमाशय तक पहुँचता है।
3. आमाशय (Stomach): HCl अम्लीय माध्यम बनाता है। पेप्सिन एंजाइम प्रोटीन को पेप्टोन में बदलता है। HCl जीवाणुओं को भी नष्ट करता है।
4. छोटी आंत (Small Intestine): पाचन का मुख्य स्थान। यकृत (liver) से पित्त रस — वसा का इमल्सीकरण। अग्न्याशय (pancreas) से ट्रिप्सिन (प्रोटीन), लाइपेज (वसा), एमाइलेज (कार्बोहाइड्रेट) का पाचन। विली (Villi) द्वारा पचे हुए भोजन का अवशोषण — ये अंगुली जैसी संरचनाएँ सतह क्षेत्रफल बढ़ाती हैं।
5. बड़ी आंत (Large Intestine): अपचित भोजन से जल का अवशोषण होता है। शेष पदार्थ मलाशय (rectum) में जमा होता है और गुदा (anus) से बाहर निकलता है।
2. मनुष्य में उत्सर्जन तंत्र का वर्णन कीजिए। नेफ्रॉन में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।▼
मानव उत्सर्जन तंत्र के प्रमुख अंग:
- दो वृक्क (Kidneys) — उदर गुहा के पिछले भाग में, सेम के आकार के
- दो मूत्रवाहिनी (Ureters) — वृक्क से मूत्राशय तक मूत्र ले जाती हैं
- मूत्राशय (Urinary Bladder) — मूत्र का भंडारण
- मूत्रमार्ग (Urethra) — मूत्र को शरीर से बाहर निकालता है
नेफ्रॉन (Nephron) में मूत्र निर्माण:
नेफ्रॉन वृक्क की क्रियात्मक इकाई है। इसमें बोमन संपुट, ग्लोमेरुलस और नलिकाकार भाग (tubule) होता है।
चरण 1 — निस्यंदन (Filtration): रक्त ग्लोमेरुलस (केशिकाओं का गुच्छा) में प्रवेश करता है। उच्च दाब के कारण जल, यूरिया, ग्लूकोज, लवण बोमन संपुट में छन जाते हैं। RBC और प्रोटीन नहीं छनते।
चरण 2 — पुनरवशोषण (Reabsorption): नलिकाओं में उपयोगी पदार्थ (ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, जल, लवण) पुनः रक्त केशिकाओं में अवशोषित हो जाते हैं।
चरण 3 — स्रावण (Secretion): रक्त से अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थ (यूरिक अम्ल, K⁺ आयन) नलिकाओं में स्रावित होते हैं।
अंतिम उत्पाद मूत्र (Urine) है जो संग्रहण नलिका → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग से बाहर निकलता है।