1. जनन क्या है? (What is Reproduction?)
जीवों द्वारा अपने समान संतान उत्पन्न करने की प्रक्रिया को जनन (Reproduction) कहते हैं। यह जाति (species) की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। जनन कोई जैव प्रक्रम (life process) नहीं है क्योंकि इसके बिना भी जीव जीवित रह सकता है, लेकिन जाति के अस्तित्व के लिए यह अनिवार्य है।
📌 जनन का आधार — DNA प्रतिलिपिकरण (DNA Copying):
- जनन की मूल घटना DNA (Deoxyribonucleic Acid) की प्रतिलिपि बनाना है
- कोशिका में DNA प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है — जो शरीर की संरचना और कार्य निर्धारित करती हैं
- DNA प्रतिलिपिकरण में कुछ विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होती हैं — यह जाति के विकास (evolution) के लिए महत्वपूर्ण हैं
- विभिन्नताएँ बदलते पर्यावरण में जाति के उत्तरजीविता (survival) की संभावना बढ़ाती हैं
2. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
जब जनन में केवल एक जनक (single parent) भाग लेता है और युग्मकों (gametes) का निर्माण नहीं होता, तो इसे अलैंगिक जनन कहते हैं। संतान आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है।
A) विखंडन (Fission)
एककोशिकीय जीवों में कोशिका का दो या अधिक भागों में विभाजन:
- द्विखंडन (Binary Fission): जीव दो समान भागों में विभाजित होता है। उदाहरण — अमीबा (Amoeba) किसी भी तल में विभाजित हो सकता है; लीशमैनिया (Leishmania) एक निश्चित तल में विभाजित होता है
- बहुखंडन (Multiple Fission): प्रतिकूल परिस्थितियों में जीव एक पुटी (cyst) बनाता है और अनुकूल परिस्थिति आने पर अनेक संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाता है। उदाहरण — प्लाज्मोडियम (Plasmodium) — मलेरिया परजीवी
B) खंडन (Fragmentation)
बहुकोशिकीय जीव दो या अधिक खंडों (fragments) में टूट जाता है और प्रत्येक खंड एक नये जीव में विकसित हो जाता है।
उदाहरण — स्पाइरोगायरा (Spirogyra) — शैवाल जो टुकड़ों में टूटकर नये जीव बनाता है।
C) पुनरुद्भवन (Regeneration)
जब किसी जीव के कटे हुए भाग से पूर्ण जीव का निर्माण होता है, तो इसे पुनरुद्भवन कहते हैं। उदाहरण — प्लेनेरिया (Planaria), हाइड्रा (Hydra)।
महत्वपूर्ण:
पुनरुद्भवन (Regeneration) को जनन (Reproduction) नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य परिस्थितियों में जनन की विधि नहीं है। यदि किसी जीव को टुकड़ों में काटा जाए तो प्रत्येक टुकड़ा विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा पुनर्निर्मित होता है, लेकिन सरल जीवों को यादृच्छिक (randomly) काटने से नये जीव नहीं बनते।
D) मुकुलन (Budding)
जनक जीव के शरीर पर एक उभार (bud) बनता है जो बढ़कर नये जीव में विकसित हो जाता है और बाद में अलग हो जाता है।
- हाइड्रा (Hydra) — शरीर पर मुकुल (bud) बनता है जो विकसित होकर अलग हो जाता है
- यीस्ट (Yeast) — एककोशिकीय जीव में कोशिका पर उभार बनता है
E) कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
पौधों में कायिक भागों (तना, जड़, पत्ती) द्वारा नये पौधे उगाने की प्रक्रिया:
📌 कायिक प्रवर्धन के उदाहरण:
- तने द्वारा (Stem): गन्ना (Sugarcane), गुलाब (Rose), आलू (Potato — आँखों/eyes से), अदरक (Ginger)
- जड़ द्वारा (Root): डहेलिया (Dahlia), शकरकंद (Sweet Potato)
- पत्तियों द्वारा (Leaves): ब्रायोफिलम (Bryophyllum) — पत्ती के किनारों पर कलिकाएँ (buds) बनती हैं जो नये पौधे बनाती हैं
कायिक प्रवर्धन के लाभ:
- संतान जनक के आनुवंशिक रूप से समान (genetic clone) होती है
- बीज रहित पौधों को भी उगाया जा सकता है (केला, गुलाब, गन्ना)
- पौधे तेजी से विकसित होते हैं और फूल-फल जल्दी आते हैं
- कलम लगाना (Layering) और कलिकायन (Grafting) — कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की विधियाँ
F) बीजाणु समासंघ (Spore Formation)
कवक (fungi) जैसे जीवों में बीजाणु (spores) द्वारा जनन होता है। बीजाणु एक मोटी भित्ति से घिरे होते हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों में सुरक्षा प्रदान करती है।
उदाहरण — राइजोपस (Rhizopus) अर्थात ब्रेड मोल्ड — इसमें ऊर्ध्व तंतुओं (sporangia) के शीर्ष पर बीजाणुधानी (sporangium) में बीजाणु बनते हैं, जो अनुकूल परिस्थिति पाकर अंकुरित होकर नया जीव बनाते हैं।
3. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
जब जनन में दो जनक (two parents) भाग लेते हैं और नर युग्मक (male gamete) तथा मादा युग्मक (female gamete) के संलयन (fusion) से संतान उत्पन्न होती है, तो इसे लैंगिक जनन कहते हैं।
📌 लैंगिक जनन का महत्व:
- दो जनकों से DNA मिलने पर संतान में अधिक विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होती हैं
- ये विभिन्नताएँ प्राकृतिक वरण (Natural Selection) और जैव विकास (Evolution) के लिए कच्चा माल प्रदान करती हैं
- विभिन्नता वाले जीव बदलते पर्यावरण में बेहतर अनुकूलित होते हैं
- लैंगिक जनन में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) होता है — जिससे युग्मकों में गुणसूत्रों (chromosomes) की संख्या आधी हो जाती है
4. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants)
पुष्प (Flower) पौधे का जनन अंग है। पुष्प के चार प्रमुख भाग होते हैं:
पुष्प की संरचना:
- बाह्यदल (Sepals) — सबसे बाहरी हरे भाग, कली (bud) की रक्षा करते हैं
- दल / पंखुड़ियाँ (Petals) — रंगीन भाग, कीटों को आकर्षित करते हैं
- पुंकेसर (Stamen) — नर जनन अंग: पुतंतु (Filament) + परागकोश (Anther) — परागकोश में परागकण (Pollen grains) बनते हैं
- स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel) — मादा जनन अंग: वर्तिकाग्र (Stigma) + वर्तिका (Style) + अंडाशय (Ovary) — अंडाशय में बीजांड (Ovules) होते हैं
एकलिंगी पुष्प (Unisexual Flower): जिसमें केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर होता है। उदाहरण — पपीता (Papaya), तरबूज (Watermelon)
द्विलिंगी पुष्प (Bisexual Flower): जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होते हैं। उदाहरण — गुड़हल (Hibiscus), सरसों (Mustard)
परागण (Pollination)
परागकोश (Anther) से परागकणों (Pollen grains) का वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचना परागण कहलाता है:
- स्वपरागण (Self-Pollination): एक ही पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं
- परपरागण (Cross-Pollination): एक पुष्प के परागकण दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं — वायु, जल, कीट, पक्षियों द्वारा
निषेचन (Fertilization)
परागण के बाद निषेचन की प्रक्रिया:
- परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर परागनली (Pollen tube) बनाता है
- परागनली वर्तिका से होती हुई अंडाशय (Ovary) तक पहुँचती है
- नर युग्मक (male gamete) बीजांड (ovule) में उपस्थित अंड कोशिका (egg cell) से संलयन (fusion) करता है
- इस संलयन को निषेचन (Fertilization) कहते हैं — निषेचन के बाद युग्मनज (Zygote) बनता है
📌 निषेचन के बाद के परिवर्तन:
- युग्मनज (Zygote) → विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) बनता है
- बीजांड (Ovule) → बीज (Seed) में बदलता है
- अंडाशय (Ovary) → फल (Fruit) में बदलता है
- बीज में भ्रूण और भ्रूणपोष (Endosperm) — भोजन का भंडार — होता है
5. मानव में जनन (Reproduction in Humans)
मनुष्य में लैंगिक जनन होता है। किशोरावस्था (Puberty) में जनन तंत्र परिपक्व (mature) होता है।
यौवनारंभ (Puberty) में परिवर्तन:
- लड़कों में: आवाज़ भारी होना, दाढ़ी-मूँछ आना, शरीर की वृद्धि — टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) हार्मोन के कारण
- लड़कियों में: स्तनों का विकास, ऋतुस्राव प्रारंभ, शरीर में वसा जमा — एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन के कारण
पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System)
📌 पुरुष जनन तंत्र के अंग:
- वृषण (Testes): उदर गुहा के बाहर वृषणकोष (Scrotum) में स्थित — शुक्राणुओं (Sperms) का निर्माण और टेस्टोस्टेरॉन का स्राव। तापमान शरीर से कम रखने के लिए बाहर होते हैं
- शुक्रवाहिका (Vas Deferens): शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग तक ले जाती है
- शुक्राशय (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland): तरल पदार्थ स्रावित करते हैं जो शुक्राणुओं को पोषण और गतिशीलता प्रदान करते हैं — इस मिश्रण को वीर्य (Semen) कहते हैं
- मूत्रमार्ग (Urethra): वीर्य और मूत्र दोनों का मार्ग (एक साथ नहीं)
- शिश्न (Penis): वीर्य को मादा के शरीर में स्थानांतरित करता है
स्त्री जनन तंत्र (Female Reproductive System)
📌 स्त्री जनन तंत्र के अंग:
- अंडाशय (Ovaries): एक जोड़ी — अंडाणु (Ova/Eggs) का निर्माण और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्राव। प्रत्येक माह एक परिपक्व अंडाणु मुक्त होता है
- अंडवाहिनी / फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube / Oviduct): अंडाणु यहाँ पहुँचता है और निषेचन (Fertilization) यहीं होता है
- गर्भाशय (Uterus): निषेचित अंडाणु (भ्रूण) यहाँ प्रतिस्थापित होता है और विकसित होता है। गर्भाशय की भित्ति मोटी और रक्त वाहिकाओं से भरपूर होती है
- योनि (Vagina): शिश्न से वीर्य ग्रहण करने और शिशु के जन्म का मार्ग
ऋतुस्राव (Menstruation)
यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की मोटी आंतरिक परत (endometrium) टूटकर रक्तस्राव के रूप में बाहर आ जाती है। इसे ऋतुस्राव (Menstruation) या मासिक धर्म कहते हैं। यह चक्र लगभग 28 दिन का होता है और प्रत्येक माह दोहराया जाता है।
निषेचन और भ्रूण विकास
फैलोपियन नलिका में अंडाणु और शुक्राणु के संलयन से युग्मनज (Zygote) बनता है। युग्मनज विभाजित होता हुआ गर्भाशय की भित्ति में प्रतिस्थापित (implant) हो जाता है।
अपरा (Placenta):
अपरा (Placenta) एक विशेष ऊतक है जो भ्रूण को माँ के रक्त से जोड़ता है। इसके कार्य:
- माँ के रक्त से भ्रूण को ग्लूकोज, ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्रदान करना
- भ्रूण से CO₂ और अपशिष्ट पदार्थों को माँ के रक्त में स्थानांतरित करना
- गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए हार्मोन का स्राव
लगभग 9 महीने बाद शिशु का जन्म होता है।
6. जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health)
जनसंख्या नियंत्रण और यौन संचारित रोगों (STDs) से बचाव के लिए गर्भ निरोधक विधियों का ज्ञान आवश्यक है।
📌 गर्भ निरोधक विधियाँ (Contraceptive Methods):
- यांत्रिक अवरोधक विधि (Barrier Method): कंडोम (Condom) — शुक्राणुओं को अंडाणु तक पहुँचने से रोकता है। STDs से भी बचाव करता है
- रासायनिक विधि (Chemical Method): मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ (Oral Pills) — हार्मोन द्वारा अंडाणु मुक्ति को रोकती हैं
- अंतर्गर्भाशयी युक्ति (IUCD): कॉपर-टी (Copper-T) — गर्भाशय में लगाई जाती है, निषेचित अंडे को प्रतिस्थापन से रोकती है
- शल्य क्रिया विधि (Surgical Method):
- पुरुष — नसबंदी (Vasectomy): शुक्रवाहिका को काटकर बाँधना
- स्त्री — नलबंदी (Tubectomy): अंडवाहिनी (फैलोपियन नलिका) को काटकर बाँधना
यौन संचारित रोग (STDs — Sexually Transmitted Diseases):
- जीवाणु जनित: गोनोरिया (Gonorrhoea), सिफलिस (Syphilis)
- विषाणु जनित: HIV-AIDS, जननांग मस्सा (Genital Warts)
- बचाव: कंडोम का उपयोग सबसे प्रभावी — यांत्रिक अवरोध + STD से सुरक्षा दोनों
📖 पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर — NCERT Solutions
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1: DNA प्रतिकृति (DNA copying) का जनन में क्या महत्व है?▼
DNA प्रतिकृति जनन की मूल घटना है। इसका महत्व:
- DNA कोशिका के प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है जो जीव की शारीरिक संरचना और कार्य निर्धारित करते हैं
- जनन में DNA की प्रतिलिपि बनाई जाती है जिससे संतान में जनक के लक्षण आते हैं
- DNA प्रतिलिपिकरण में कुछ विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं जो जाति के विकास (evolution) के लिए आवश्यक हैं
- ये विभिन्नताएँ बदलते पर्यावरण में जाति की उत्तरजीविता सुनिश्चित करती हैं
प्रश्न 2: जीवों में विभिन्नता (variation) स्पीशीज़ की उत्तरजीविता के लिए क्यों आवश्यक है?▼
विभिन्नता स्पीशीज़ (जाति) की उत्तरजीविता के लिए आवश्यक है क्योंकि:
- पर्यावरण में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं (जैसे तापमान, जलवायु परिवर्तन)
- यदि सभी जीव एक समान हों तो पर्यावरण में अचानक बदलाव आने पर पूरी जाति नष्ट हो सकती है
- विभिन्नता के कारण कुछ जीव नई परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं
- उदाहरण: यदि जल का तापमान बढ़ जाए तो अधिकांश जीवाणु मर सकते हैं, लेकिन ताप-सहन की विभिन्नता वाले कुछ जीवाणु जीवित रहेंगे
प्रश्न 3: द्विखंडन (Binary Fission) बहुखंडन (Multiple Fission) से किस प्रकार भिन्न है?▼
द्विखंडन (Binary Fission):
- जनक कोशिका दो समान संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है
- अनुकूल परिस्थितियों में होता है
- उदाहरण: अमीबा, लीशमैनिया, पैरामीशियम
बहुखंडन (Multiple Fission):
- जनक कोशिका अनेक संतति कोशिकाओं में एक साथ विभाजित होती है
- प्रतिकूल परिस्थितियों में पुटी (cyst) बनाकर, अनुकूल परिस्थिति आने पर विभाजन
- उदाहरण: प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)
प्रश्न 4: बीजाणु द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है?▼
बीजाणु द्वारा जनन के लाभ:
- बीजाणु मोटी सुरक्षात्मक भित्ति से ढके होते हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों (शुष्कता, उच्च तापमान) में सुरक्षा प्रदान करती है
- बीजाणु हल्के होते हैं — वायु द्वारा दूर तक फैल सकते हैं
- एक बीजाणुधानी में अनेक बीजाणु बनते हैं — जनन की दर अधिक
- अनुकूल परिस्थिति मिलने पर अंकुरित होकर नया जीव बनाते हैं
प्रश्न 5: क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं जिससे पता चलता है कि जटिल संरचना वाले जीवों में पुनरुद्भवन (Regeneration) द्वारा नये जीव उत्पन्न नहीं हो सकते?▼
जटिल बहुकोशिकीय जीवों में पुनरुद्भवन द्वारा नये जीव नहीं बन सकते क्योंकि:
- जटिल जीवों में विभिन्न विशिष्ट ऊतक और अंग तंत्र (organ systems) होते हैं जिन्हें सरल कोशिकाओं से पुनर्निर्मित करना संभव नहीं
- इनकी कोशिकाएँ अत्यधिक विभेदित (differentiated) होती हैं और उन्होंने विभाजन की क्षमता खो दी है
- शरीर के किसी कटे भाग में सभी प्रकार की कोशिकाएँ उपस्थित नहीं होतीं जो पूर्ण जीव बनाने के लिए आवश्यक हैं
- जटिल संरचनाओं (हृदय, मस्तिष्क आदि) को पुनर्निर्मित करने की जैविक क्षमता नहीं होती
प्रश्न 6: कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) की उपयोगिता क्या है?▼
- जो पौधे बीज उत्पन्न नहीं करते उन्हें उगाया जा सकता है (जैसे — केला, गुलाब, संतरा)
- संतान आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है — अच्छे लक्षणों को बनाए रखा जा सकता है
- बीज से उगाने की तुलना में पौधे तेजी से उगते हैं
- पौधों में फूल और फल जल्दी आते हैं
- कलम (Cutting), कलिकायन (Grafting), दाब लगाना (Layering) जैसी कृत्रिम विधियाँ कृषि में बहुत उपयोगी हैं
प्रश्न 7: लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) के क्या लाभ हैं?▼
लैंगिक जनन के लाभ:
- दो जनकों के DNA के संयोजन से संतान में अधिक विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होती हैं
- ये विभिन्नताएँ जैव विकास (evolution) का आधार हैं
- विभिन्नता वाली संतान बदलते पर्यावरण में बेहतर अनुकूलन (adaptation) कर सकती है
- यह जाति की उत्तरजीविता की संभावना बढ़ाता है
- अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) और निषेचन (Fertilization) के कारण आनुवंशिक विविधता बनी रहती है
प्रश्न 8: पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।▼
पुष्प के मुख्य भाग (बाहर से अंदर की ओर):
- बाह्यदल (Sepals): सबसे बाहरी, हरे — कली की सुरक्षा
- दल (Petals): रंगीन पंखुड़ियाँ — कीटों को आकर्षित
- पुंकेसर (Stamen): नर जनन अंग — पुतंतु (Filament) + परागकोश (Anther)
- स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel): मादा जनन अंग — वर्तिकाग्र (Stigma) + वर्तिका (Style) + अंडाशय (Ovary)
- अंडाशय में बीजांड (Ovule) होते हैं जिनमें अंड कोशिका (Egg cell) होती है
नोट: चित्र अपनी कॉपी में बनाएँ — बाह्यदल, दल, पुंकेसर (परागकोश + पुतंतु) और स्त्रीकेसर (वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय + बीजांड) को नामांकित करें।
प्रश्न 9: निषेचन (Fertilization) किसे कहते हैं? पुष्पी पादपों में निषेचन की प्रक्रिया समझाइए।▼
नर युग्मक (शुक्राणु/पराग) और मादा युग्मक (अंडाणु) के संलयन (fusion) को निषेचन कहते हैं।
पुष्पी पादपों में निषेचन:
- परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र (Stigma) पर गिरता है
- परागकण अंकुरित होकर परागनली (Pollen tube) बनाता है
- परागनली वर्तिका (Style) से होती हुई अंडाशय (Ovary) तक पहुँचती है
- परागनली द्वारा नर युग्मक बीजांड (Ovule) में पहुँचता है
- नर युग्मक और अंड कोशिका का संलयन होता है → युग्मनज (Zygote) बनता है
- युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) बनता है
- बीजांड → बीज, अंडाशय → फल में परिवर्तित होते हैं
प्रश्न 10: शुक्राशय (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भूमिका है?▼
शुक्राशय (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland) अपना स्राव शुक्राणुओं के मार्ग में मिलाती हैं:
- ये ग्रंथियाँ तरल पदार्थ स्रावित करती हैं जो शुक्राणुओं का परिवहन सुगम बनाता है
- यह तरल शुक्राणुओं को पोषण (fructose) प्रदान करता है
- शुक्राणुओं की गतिशीलता बनाए रखता है
- शुक्राणु + इन ग्रंथियों का स्राव = वीर्य (Semen)
प्रश्न 11: गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?▼
- जनसंख्या वृद्धि दर को नियंत्रित करना — जनसंख्या विस्फोट रोकना
- परिवार नियोजन — बच्चों की संख्या और उनके बीच अंतर निर्धारित करना
- अनचाहे गर्भ को रोकना
- यौन संचारित रोगों (STDs) से बचाव — विशेषकर HIV/AIDS
- माँ और बच्चे दोनों का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करना
अभ्यास प्रश्न (Exercise Questions)
प्रश्न 12: अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) मुकुलन (Budding) द्वारा होता है — (a) अमीबा (b) यीस्ट (c) प्लाज्मोडियम (d) लीशमैनिया▼
सही उत्तर: (b) यीस्ट (Yeast)
यीस्ट में कोशिका पर एक छोटा उभार (bud) बनता है जो बढ़कर नई कोशिका बन जाता है और जनक कोशिका से अलग हो जाता है। अमीबा में द्विखंडन, प्लाज्मोडियम में बहुखंडन और लीशमैनिया में एक निश्चित तल में द्विखंडन होता है।
प्रश्न 13: निम्नलिखित में से कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है? (a) अंडाशय (b) गर्भाशय (c) शुक्रवाहिका (d) फैलोपियन नलिका▼
सही उत्तर: (c) शुक्रवाहिका (Vas Deferens)
शुक्रवाहिका (Vas Deferens) पुरुष जनन तंत्र का भाग है जो शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग तक ले जाती है। अंडाशय, गर्भाशय और फैलोपियन नलिका मादा जनन तंत्र के अंग हैं।
प्रश्न 14: पादप में लैंगिक जनन के लिए निषेचन प्रक्रम का वर्णन कीजिए।▼
पादप में लैंगिक जनन में निषेचन निम्न चरणों में होता है:
- परागण: परागकोश से परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं (कीट, वायु, जल आदि द्वारा)
- परागकण का अंकुरण: वर्तिकाग्र पर परागकण अंकुरित होकर परागनली बनाता है
- परागनली की वृद्धि: परागनली वर्तिका से होती हुई अंडाशय में बीजांड तक पहुँचती है
- नर युग्मक का स्थानांतरण: परागनली द्वारा नर युग्मक बीजांड में प्रवेश करता है
- निषेचन: नर युग्मक और अंड कोशिका (Egg cell) का संलयन → युग्मनज (Zygote)
- भ्रूण विकास: युग्मनज → भ्रूण, बीजांड → बीज, अंडाशय → फल
प्रश्न 15: जनन किसी स्पीशीज़ की समष्टि (population) के स्थायित्व में किस प्रकार सहायक है?▼
जनन स्पीशीज़ की समष्टि के स्थायित्व में निम्न प्रकार से सहायक है:
- जनन से नए जीव उत्पन्न होते हैं जो मृत्यु से होने वाली संख्या कमी की भरपाई करते हैं
- जन्म दर और मृत्यु दर के बीच संतुलन बनाए रखता है
- जनन में उत्पन्न विभिन्नताएँ जाति को बदलते पर्यावरण में टिके रहने में मदद करती हैं
- DNA प्रतिलिपिकरण से जाति के लक्षण अगली पीढ़ी में स्थानांतरित होते हैं
- इस प्रकार जनन जाति की निरंतरता और समष्टि का स्थायित्व सुनिश्चित करता है
प्रश्न 16: गर्भनिरोधक की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं?▼
गर्भनिरोधक की प्रमुख विधियाँ:
1. यांत्रिक अवरोधक विधि (Barrier Method):
- कंडोम (Condom): शुक्राणुओं को मादा जनन पथ में प्रवेश से रोकता है। STDs से भी बचाव करता है
2. रासायनिक विधि (Chemical Method):
- मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ (Oral Pills): हार्मोन परिवर्तन द्वारा अंडाणु मुक्ति (ovulation) रोकती हैं
3. अंतर्गर्भाशयी युक्ति (IUCD):
- कॉपर-टी (Copper-T): गर्भाशय में स्थापित, निषेचित अंडे के प्रतिस्थापन (implantation) को रोकती है
4. शल्य क्रिया विधि (Surgical Method):
- नसबंदी (Vasectomy): पुरुष में शुक्रवाहिका को काटकर बाँधना
- नलबंदी (Tubectomy): स्त्री में फैलोपियन नलिका को काटकर बाँधना
प्रश्न 17: एकलिंगी और द्विलिंगी पुष्पों में अंतर बताइए। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।▼
एकलिंगी पुष्प (Unisexual Flower):
- इसमें केवल एक ही प्रकार का जनन अंग होता है — या तो पुंकेसर या स्त्रीकेसर
- उदाहरण: पपीता (Papaya), तरबूज, खीरा
द्विलिंगी पुष्प (Bisexual Flower):
- इसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों एक ही पुष्प में होते हैं
- उदाहरण: सरसों (Mustard), गुड़हल, गुलाब
प्रश्न 18: मानव में भ्रूण का विकास कैसे होता है? अपरा (Placenta) की भूमिका बताइए।▼
भ्रूण विकास:
- फैलोपियन नलिका में अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन → युग्मनज (Zygote)
- युग्मनज समसूत्री विभाजन (Mitosis) करता हुआ गर्भाशय की ओर बढ़ता है
- लगभग 7 दिन बाद भ्रूण गर्भाशय की भित्ति में प्रतिस्थापित (implant) हो जाता है
- भ्रूण के चारों ओर अपरा (Placenta) विकसित होती है
अपरा (Placenta) की भूमिका:
- अपरा एक विशेष डिस्क आकार का ऊतक है जो भ्रूण को गर्भनाल (Umbilical cord) द्वारा गर्भाशय भित्ति से जोड़ता है
- माँ के रक्त से भ्रूण को ग्लूकोज, ऑक्सीजन, पोषक तत्व प्रदान करता है
- भ्रूण से CO₂ और अपशिष्ट पदार्थ माँ के रक्त में स्थानांतरित करता है
- गर्भावस्था बनाए रखने के लिए हार्मोन स्रावित करता है
- लगभग 9 महीने (38-40 सप्ताह) के बाद शिशु का जन्म होता है
🎯 प्रश्न बैंक — Question Bank
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. ब्रायोफिलम (Bryophyllum) में कायिक प्रवर्धन किसके द्वारा होता है?
- A) तने द्वारा
- B) पत्तियों द्वारा
- C) जड़ों द्वारा
- D) बीजों द्वारा
✅ सही उत्तर: B) पत्तियों द्वारा — ब्रायोफिलम की पत्तियों के किनारों पर कलिकाएँ (buds) बनती हैं जो मिट्टी में गिरकर नये पौधे बनाती हैं।
2. निषेचन (Fertilization) के बाद अंडाशय (Ovary) किसमें परिवर्तित होता है?
- A) बीज (Seed)
- B) भ्रूण (Embryo)
- C) फल (Fruit)
- D) परागकण (Pollen)
✅ सही उत्तर: C) फल (Fruit) — निषेचन के बाद अंडाशय फल में और बीजांड (Ovule) बीज (Seed) में परिवर्तित होता है।
3. प्लाज्मोडियम (Plasmodium) में जनन किस विधि से होता है?
- A) बहुखंडन (Multiple Fission)
- B) द्विखंडन (Binary Fission)
- C) मुकुलन (Budding)
- D) खंडन (Fragmentation)
✅ सही उत्तर: A) बहुखंडन (Multiple Fission) — प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) में बहुखंडन होता है जिसमें एक कोशिका अनेक संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है।
4. मानव में निषेचन (Fertilization) कहाँ होता है?
- A) गर्भाशय (Uterus) में
- B) अंडाशय (Ovary) में
- C) योनि (Vagina) में
- D) फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) में
✅ सही उत्तर: D) फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) में — मानव में निषेचन फैलोपियन नलिका (अंडवाहिनी) में होता है जहाँ शुक्राणु और अंडाणु का संलयन होता है।
5. निम्नलिखित में से कौन-सी गर्भनिरोधक विधि यौन संचारित रोगों (STDs) से भी बचाव करती है?
- A) गर्भनिरोधक गोलियाँ (Oral Pills)
- B) कंडोम (Condom)
- C) कॉपर-टी (Copper-T)
- D) नलबंदी (Tubectomy)
✅ सही उत्तर: B) कंडोम (Condom) — कंडोम एक यांत्रिक अवरोधक है जो शुक्राणुओं को रोकने के साथ-साथ STDs (HIV, गोनोरिया आदि) से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer)
1. मुकुलन (Budding) और खंडन (Fragmentation) में अंतर स्पष्ट कीजिए।▼
मुकुलन (Budding):
- जनक जीव के शरीर पर एक उभार (bud) बनता है जो बढ़कर नये जीव में विकसित होता है
- जनक जीव अक्षत (intact) रहता है
- उदाहरण: हाइड्रा, यीस्ट
खंडन (Fragmentation):
- जनक जीव टुकड़ों (fragments) में टूट जाता है और प्रत्येक टुकड़ा नये जीव में विकसित होता है
- जनक जीव नष्ट हो जाता है (टुकड़ों में बँट जाता है)
- उदाहरण: स्पाइरोगायरा
2. ऋतुस्राव (Menstruation) क्या है? यह क्यों होता है?▼
ऋतुस्राव (Menstruation) स्त्री जनन तंत्र में प्रत्येक माह होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है:
- प्रत्येक माह अंडाशय से एक परिपक्व अंडाणु मुक्त होता है
- गर्भाशय की भित्ति मोटी होकर रक्त वाहिकाओं से भरपूर हो जाती है — भ्रूण प्राप्त करने की तैयारी
- यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता तो यह मोटी परत टूटकर रक्तस्राव के रूप में बाहर आ जाती है
- यह चक्र लगभग 28 दिन का होता है
- ऋतुस्राव सामान्यतः 3-7 दिन तक रहता है
- यौवनारंभ (12-15 वर्ष) से शुरू होकर रजोनिवृत्ति (Menopause — 45-55 वर्ष) तक चलता है
3. पुंकेसर (Stamen) और स्त्रीकेसर (Pistil) की संरचना और कार्य बताइए।▼
पुंकेसर (Stamen) — नर जनन अंग:
- पुतंतु (Filament): लंबा डंठल जो परागकोश को सहारा देता है
- परागकोश (Anther): शीर्ष पर स्थित, इसमें परागकण (Pollen grains) बनते हैं जो नर युग्मक होते हैं
स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel) — मादा जनन अंग:
- वर्तिकाग्र (Stigma): सबसे ऊपर, चिपचिपा — परागकणों को ग्रहण करता है
- वर्तिका (Style): बीच का लंबा भाग — परागनली का मार्ग
- अंडाशय (Ovary): सबसे नीचे, फूला हुआ — इसमें बीजांड (Ovules) होते हैं जिनमें मादा युग्मक (अंड कोशिका) होती है
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer)
1. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) की विभिन्न विधियों का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।▼
अलैंगिक जनन में केवल एक जनक भाग लेता है और युग्मक नहीं बनते। इसकी प्रमुख विधियाँ:
1. विखंडन (Fission):
- द्विखंडन: कोशिका दो भागों में विभाजित — अमीबा (किसी भी तल में), लीशमैनिया (निश्चित तल में)
- बहुखंडन: एक कोशिका अनेक संतति कोशिकाओं में — प्लाज्मोडियम (प्रतिकूल स्थिति में पुटी बनाकर)
2. खंडन (Fragmentation): बहुकोशिकीय जीव टुकड़ों में टूटता है, प्रत्येक खंड नया जीव बनता है — स्पाइरोगायरा
3. पुनरुद्भवन (Regeneration): कटे भाग से पूर्ण जीव का निर्माण — प्लेनेरिया, हाइड्रा। ध्यान रहे यह वास्तविक जनन विधि नहीं है।
4. मुकुलन (Budding): शरीर पर उभार बनता है जो नये जीव में विकसित होकर अलग हो जाता है — हाइड्रा, यीस्ट
5. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): पौधों में कायिक भागों द्वारा — तने से (गन्ना, आलू), जड़ से (डहेलिया), पत्ती से (ब्रायोफिलम)। लाभ: आनुवंशिक समानता, तीव्र वृद्धि।
6. बीजाणु निर्माण (Spore Formation): बीजाणुधानी में बीजाणु बनते हैं जो मोटी भित्ति से सुरक्षित होते हैं — राइजोपस (ब्रेड मोल्ड)
2. मानव के पुरुष और स्त्री जनन तंत्र का विस्तृत वर्णन कीजिए। निषेचन और भ्रूण विकास की प्रक्रिया समझाइए।▼
पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System):
- वृषण (Testes): एक जोड़ी, वृषणकोष में (शरीर से कम तापमान पर)। शुक्राणु (Sperms) बनाते हैं और टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन स्रावित करते हैं
- शुक्रवाहिका (Vas Deferens): शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग तक पहुँचाती है
- शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथि: तरल स्राव जो शुक्राणुओं को पोषण और गतिशीलता देता है → वीर्य
- मूत्रमार्ग और शिश्न: वीर्य को मादा शरीर में स्थानांतरित करते हैं
स्त्री जनन तंत्र (Female Reproductive System):
- अंडाशय (Ovaries): एक जोड़ी — अंडाणु बनाते हैं, एस्ट्रोजन स्रावित करते हैं। प्रतिमाह एक परिपक्व अंडाणु मुक्त
- फैलोपियन नलिका (Oviduct): अंडाणु यहाँ आता है — निषेचन का स्थान
- गर्भाशय (Uterus): भ्रूण का विकास — मोटी, रक्तयुक्त भित्ति
- योनि (Vagina): वीर्य ग्रहण और शिशु जन्म का मार्ग
निषेचन और भ्रूण विकास:
- फैलोपियन नलिका में शुक्राणु + अंडाणु → युग्मनज (Zygote)
- युग्मनज समसूत्री विभाजन करता हुआ गर्भाशय में प्रतिस्थापित होता है
- अपरा (Placenta) विकसित होती है — माँ और भ्रूण के बीच O₂, पोषण, CO₂ का आदान-प्रदान
- लगभग 9 महीने (40 सप्ताह) बाद शिशु का जन्म
- यदि निषेचन नहीं → गर्भाशय भित्ति टूटती है → ऋतुस्राव (28 दिन का चक्र)