Heredity
आनुवंशिकता (Heredity) — जनक (Parents) से संतान (Offspring) में लक्षणों का स्थानांतरण (Transmission of traits)। इसका अध्ययन करने वाले विज्ञान को आनुवंशिकी (Genetics) कहते हैं।
ग्रेगर जोहान मेंडल (1822-1884) — "आनुवंशिकी के जनक" (Father of Genetics)। उन्होंने मटर (Pisum sativum) के पौधों पर प्रयोग किए।
जब एक जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले जनकों का संकरण किया जाता है।
जब दो जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले जनकों का संकरण किया जाता है।
मनुष्य में 23 जोड़ी (46) गुणसूत्र होते हैं — 22 जोड़ी ऑटोसोम (Autosomes) + 1 जोड़ी लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes)।
जैव विकास (Evolution) — लंबे समय में जीवों में होने वाले क्रमिक परिवर्तन जिनसे नई प्रजातियाँ बनती हैं।
चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण का सिद्धांत दिया। जो जीव अपने पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, वे जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं — "Survival of the fittest"।
लक्षण B पहले उत्पन्न हुआ होगा। अलैंगिक जनन में DNA की प्रतिलिपि बनती है, इसलिए जो लक्षण पहले उत्पन्न हुआ वह अधिक पीढ़ियों में फैलकर अधिक प्रतिशत में पाया जाएगा।
लक्षण B = 60% (अधिक समय से मौजूद) > लक्षण A = 10% (बाद में उत्पन्न)
विभिन्नता के स्रोत:
जैविक महत्व: विभिन्नता से कुछ जीव बदलते पर्यावरण में जीवित रह सकते हैं → प्रजाति के अस्तित्व (survival) में सहायक।
मनुष्य में लिंग गुणसूत्र — स्त्री: XX, पुरुष: XY
माता हमेशा X गुणसूत्र देती है (क्योंकि उसके पास XX है)।
पिता X या Y दे सकता है (क्योंकि उसके पास XY है)।
अतः संतान का लिंग पिता के गुणसूत्र पर निर्भर करता है, माता पर नहीं।
जब एक जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले जनकों का संकरण किया जाता है।
उदाहरण: लंबा (TT) × बौना (tt)
F₁ पीढ़ी: सभी लंबे (Tt) — प्रभावी लक्षण व्यक्त
F₁ × F₁ (Tt × Tt):
समजात अंग (Homologous Organs):
समवृत्ति अंग (Analogous Organs):
उपार्जित लक्षण (Acquired Traits):
जन्मजात लक्षण (Inherited Traits):
नहीं, विकास को प्रगति कहना उचित नहीं है।
चार्ल्स डार्विन (1859) — "Origin of Species"
प्राकृतिक वरण के मुख्य बिंदु:
जीवाश्म — प्राचीन जीवों के शरीर या उनकी छाप के संरक्षित अवशेष जो चट्टानों, बर्फ या एम्बर में पाए जाते हैं।
विकास के प्रमाण:
प्रभावी लक्षण (Dominant Trait): वह लक्षण जो F₁ पीढ़ी (विषमयुग्मजी अवस्था Tt) में व्यक्त होता है।
उदा: मटर में लंबापन (T), गोल बीज (R), पीला बीज (Y)
अप्रभावी लक्षण (Recessive Trait): वह लक्षण जो F₁ में छिपा रहता है और F₂ में समयुग्मजी अवस्था (tt) में पुनः प्रकट होता है।
उदा: मटर में बौनापन (t), झुर्रीदार बीज (r), हरा बीज (y)
जीन (Gene): DNA का वह खंड जो किसी विशेष लक्षण को नियंत्रित करता है। जैसे: "ऊँचाई का जीन"
एलील (Allele / युग्मविकल्पी): एक ही जीन के वैकल्पिक रूप। प्रत्येक जीन के दो एलील होते हैं (एक माता से, एक पिता से)।
उदा: ऊँचाई के जीन के दो एलील — T (लंबा, प्रभावी) और t (बौना, अप्रभावी)
एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross):
एक जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन — लंबा (TT) × बौना (tt)
द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross):
दो जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन — गोल पीले (RRYY) × झुर्रीदार हरे (rryy)
जैव विकास: लंबे समय में जीवों में होने वाले क्रमिक परिवर्तन जिनसे नई प्रजातियाँ उत्पन्न होती हैं।
विकास के प्रमाण:
1. समजात अंग (Homologous Organs):
2. समवृत्ति अंग (Analogous Organs):
3. जीवाश्म (Fossils):
4. DNA विश्लेषण: सभी जीवों की DNA संरचना समान → सभी एक समान पूर्वज से विकसित
5. भ्रूण विज्ञान (Embryology): विभिन्न कशेरुकियों के भ्रूण प्रारंभिक अवस्था में समान दिखते हैं